हैदराबाद/नई दिल्ली: बिना किसी रिस्क के स्थिर रिटर्न चाहिए तो सबसे पहले बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट याद आते हैं। हालांकि, ब्याज दरों के मामले में बैंक मनमानी करते हैं। एक डिपॉजिटर को एक तरह से और दूसरे को दूसरी तरह से ब्याज देते हैं। इससे यह तय करने में दिक्कत होती है कि कहां डिपॉजिट किया जाए।

हालांकि, अब ऐसी समस्याओं पर लगाम लगने वाली है। फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाली ब्याज दरों की घोषणा और निर्धारण में और ज्यादा पारदर्शिता लाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नियमों में बदलाव किया है। आरबीआई ने “डिपॉजिट पर ब्याज दर संशोधन निर्देश 2026” जारी किए हैं। ये नए नियम 1 अक्टूबर से लागू होंगे।
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1 अक्टूबर से लागू होने वाले नए नियम:
आरबीआई ने साफ किया कि ये नए दिशा-निर्देश कमर्शियल बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, पेमेंट बैंक और अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों पर लागू होंगे। अब एक ही बैंक की अलग-अलग शाखाओं में एक ही रकम और एक ही दिन खोले गए डिपॉजिट पर अलग-अलग ब्याज दरें नहीं दी जा सकेंगी। सभी शाखाओं में एक ही दिन स्वीकृत समान डिपॉजिट पर समान ब्याज दर लागू करनी होगी।
बैंकों को अपनी डिपॉजिट ब्याज दरों का ब्योरा पहले से वेबसाइट पर प्रकाशित करना होगा। प्रकाशित शेड्यूल के अनुसार ही ग्राहकों को ब्याज देना होगा। मनमाने तरीके से अंतर नहीं दिखा सकते। वहीं 3 करोड़ रुपये और उससे ज्यादा की बल्क डिपॉजिट पर अलग-अलग ब्याज दरें देने की छूट आरबीआई ने बैंकों को दी है। लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) के आधार पर बैंक बल्क डिपॉजिट की दरें तय कर सकते हैं। हालांकि, बल्क डिपॉजिट की दरों को हर कार्यदिवस सुबह 10 बजे तक वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इसके लिए 10 मिनट का अतिरिक्त समय दिया गया है।
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नए नियम लागू होने से फिक्स्ड डिपॉजिट की दरें एकदम बढ़ या घट नहीं जाएंगी। बैंक अपनी तरलता और बाजार की स्थिति के आधार पर ब्याज दरें खुद तय करने के लिए स्वतंत्र रहेंगे। ये नया कानून सिर्फ डिपॉजिट दरों की घोषणा और प्रदर्शन में पारदर्शिता से जुड़े बदलाव ला रहा है।
