चेन्नई (प्रो. ऋषभदेव शर्मा की रिपोर्ट) : भारत गौरव अवार्ड से सम्मानित प्रख्यात शिक्षाविद् एवं पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) निर्मला एस. मौर्य के सम्मान में उनके शोधार्थियों एवं पूर्व विद्यार्थियों द्वारा शनिवार को क्राउन रेजिडेंसेज़, बाश्याम के क्लब हाउस में एक भव्य ‘फेलिसिटेशन ईवनिंग’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न भागों से आए लगभग सभी पीएच.डी. शोधार्थियों एवं शिष्यों ने अपने गुरु का सम्मान करते हुए उन्हें भारत गौरव अवार्ड प्राप्त होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. रमीला के संवेदनशील स्वागत भाषण से हुआ। इसके उपरांत प्रो. (डॉ.) निर्मला एस. मौर्य के शैक्षणिक, साहित्यिक एवं प्रशासनिक योगदान पर आधारित उनकी प्रेरणादायी जीवन-यात्रा की एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गई, जिसे उपस्थित सभी अतिथियों ने अत्यंत भावुकता एवं गर्व के साथ देखा। डॉ. डॉली ने उपस्थित अध्यापकगण को, डॉ. रमीला ने शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को तथा खुशबू ने परिवार एवं मित्रों को अपने विचार व्यक्त करने हेतु आमंत्रित किया। सभी ने अपनी-अपनी स्मृतियाँ साझा कीं।

शोधार्थियों एवं पूर्व विद्यार्थियों ने अपने संस्मरण साझा करते हुए गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा, कृतज्ञता एवं स्नेह व्यक्त किया। जो विद्यार्थी एवं विशिष्टजन व्यक्तिगत रूप से कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके, उन्होंने वीडियो संदेशों के माध्यम से अपनी शुभकामनाएँ एवं सम्मान प्रेषित किए, जिन्हें समारोह में प्रदर्शित किया गया। विशिष्ट विद्वान एवं प्रख्यात भाषा वैज्ञानिक प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने अपने वीडियो संदेश में चेन्नई के अपने शुरुआती दिनों की स्मृतियों को भावपूर्ण ढंग से साझा करते हुए प्रो. (डॉ.) निर्मला एस. मौर्य के साथ बिताए गए अविस्मरणीय क्षणों का उल्लेख किया तथा उनके व्यक्तित्व, विद्वत्ता और स्नेहपूर्ण मार्गदर्शन की सराहना करते हुए अत्यंत भावनात्मक एवं विचारोत्तेजक संदेश प्रेषित किया। डॉ. वैशाली, डॉ. मीना कृष्णन, डॉ. संतोषी, डॉ. राजी, सेन्दिलनाथन, राजीव टण्डन, प्रणव तिवारी, आलोक, कुमुद, श्रीदेवी, आशीष, प्रियंका एवं विकास ने भी अपने अनुभव साझा किए।

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इस अवसर पर डी. जी. वैष्णव कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष ने अपने उद्बोधन में प्रस्ताव रखा कि सभी शिष्यगण वर्ष में एक बार एक दिन अथवा एक संध्या अपनी गुरु प्रो. (डॉ.) निर्मला एस. मौर्य के साथ इसी प्रकार आत्मीय मिलन के रूप में व्यतीत करेंगे। इस प्रस्ताव का उपस्थित सभी शिष्यों ने जोरदार तालियों के साथ समर्थन एवं अनुमोदन किया, जिससे पूरे सभागार का वातावरण भावनात्मक एवं उत्साहपूर्ण हो उठा।

प्रो. (डॉ.) निर्मला एस. मौर्य ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रो. मानस पांडे, प्रो. ऋषभ देव शर्मा, डॉ. किशोर वासवानी, धनंजय, डॉ. अनिता, ईश्वर करुण, डॉ. पद्मावती, डॉ. श्यामा सिंह, डॉ. गीता सिंह, डॉ. सुन्दर, डॉ. विवेक राय तथा सभी शिष्यों, सहयोगियों और शुभचिंतकों के प्रति स्नेहिल आभार व्यक्त किया तथा संस्थान से जुड़ी अनेक प्रेरक स्मृतियाँ साझा कीं। उन्होंने कहा, “खुशियाँ खरीदी नहीं जातीं, वे हमारे चारों ओर बिखरी होती हैं; आवश्यकता केवल उन्हें महसूस करने की होती है।”
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. आर. रमीला, डॉ. डॉली एवं खुशबू ने संयुक्त रूप से किया। अंत में वरिष्ठ शोधार्थी डॉ. राजरत्नम ने विद्यार्थियों की ओर से तथा प्रो. (डॉ.) निर्मला एस. मौर्य के पुत्र अभिषेक ने सभी अतिथियों, शोधार्थियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। संपूर्ण समारोह गुरु-शिष्य परंपरा, आत्मीयता, सम्मान एवं आजीवन जुड़े रहने की भावना का एक अनुपम उदाहरण बनकर उपस्थित सभी लोगों की स्मृतियों में सदा के लिए अंकित हो गया।
