बहुत-बहुत बधाई: प्रो ऋषभदेव शर्मा की अड़सठवीं वर्षगाँठ पर ‘द थ्रेशोल्ड’ पुस्तक लोकार्पित, जानें अनुवादक के विचार

हैदराबाद: कवि और समीक्षक प्रोफेरस ऋषभदेव शर्मा की अड़सठवीं वर्षगाँठ पर उनके 35 स्त्रीपक्षीय कविताओं के संग्रह ‘देहरी’ के कुमार लव कृत अंग्रेज़ी अनुवाद “द थ्रेशोल्ड” (2025: साहित्य रत्नाकर, कानपुर) का ऑनलाइन लोकार्पण ‘साहित्य मंथन’ के तत्वावधान में संपन्न हुआ।

अनुवादक कुमार लव ने बताया कि इस संग्रह की सभी कविताएँ स्त्री विमर्श पर केंद्रित हैं और यह संग्रह भारत की उन तमाम महिलाओं को समर्पित हैं जो अपने पर्स में फल काटने का चाकू लेकर चलती हैं, इसलिए इसका लोकार्पण महिलाओं की तीन पीढ़ियों से कराने का निश्चय किया गया।

पुस्तक का ऑनलाइन लोकार्पण करते हुए हैदराबाद से डॉ. पूर्णिमा शर्मा और लिपि भारद्वाज, खतौली से डॉ. मिथलेश भारद्वाज, आराध्या और ज्योति भारद्वाज, मुंबई से श्वेता शिरसाट, बेंगलुरु से डॉ. दीक्षा भारद्वाज, दिल्ली से अनुपमा शर्मा, सोनल और गार्गी, नोएडा से भावना और शुचि भारद्वाज ने पुस्तक की प्रतियों को स्क्रीन पर प्रदर्शित किया और सभी ने उससे अपनी पसंद की एक-एक कविता का वाचन भी किया।

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मूल रचनाकार और अनुवादक ने रचना और अनुवाद की प्रक्रिया का खुलासा किया। संग्रह की कविताओं में निहित स्त्री जाति के आक्रोश, पीड़ा, करुणा और उल्लास को उजागर करने वाली प्रो. गोपाल शर्मा की भूमिका और प्रवीण प्रणव की समीक्षात्मक टिप्पणी को भी पढ़कर सुनाया गया। संचालन आशीष भारद्वाज ने किया तथा प्रथम पंडित ने धन्यवाद दिया।

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