लेखक प्रवीण प्रणव की नई किताब ‘लिए लुकाठी हाथ’ के लिए वरिष्ठ साहित्यकार प्रोफेसर देवराज के ‘आशीर्वचन’

(ऋषभदेव शर्मा के साहित्य की समीक्षा) लुकाठी के गुणों का

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मूल्यवान धरोहर हैं : प्रोफेसर ऋषभदेव शर्मा की लेखकीय डायरी पर डॉ सुरभि दत्त की प्रतिक्रिया

'तेलंगाना समाचार' में 7 मई को प्रकाशित आदरणीय प्रोफेसर ऋष

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‘डायरी-अंश, समकाल में स्त्री : कुछ टिप्पणियां’ प्रो ऋषभदेव शर्मा के संकलन पर कहानीकार NR श्याम की प्रतिक्रिया

"युद्ध हो या दंगा, जीत का झंडा हमेशा औरत की योनि पर ही गड़ता

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डायरी-अंश, समकाल में स्त्री : कुछ टिप्पणियां

[‘स्त्री’ यों तो सदा से तमाम सभ्यताओं के केंद्र में रही ह

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सामयिक टिप्पणी: वे मारी जाती हैं क्योंकि वे औरतें हैं

संयुक्त राष्ट्र महासभा में हाल ही में पेश की गई एक रिपोर्

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सामयिक टिप्पणी: 29 नोबेल विजेताओं की मार्मिक अपील, वे सब ‘हमारे बच्चे’ हैं!

[नोट-हमास-इजरायल युद्ध एक भयानक मोड़ ले चुका है। इस युद्ध

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