सूत्रधार: गीत ऋषि गोपालदास नीरज पर परिचर्चा एवं सावन के गीतों की काव्य गोष्ठी में मची यादों की धूम

हैदराबाद (सरिता सुराणा की रिपोर्ट) : सूत्रधार साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, भारत हैदराबाद की ओर से 27 वीं मासिक गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया गया। संस्थापिका सरिता सुराणा ने सभी अतिथियों और सहभागियों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन किया। नाभिकीय ईंधन सम्मिश्र, परमाणु ऊर्जा विभाग हैदराबाद के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक अधिकारी एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री दर्शन सिंह ने इस गोष्ठी की अध्यक्षता की। श्रीमती आर्या झा की सरस्वती वन्दना से कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ।

तत्पश्चात् सरिता सुराणा ने गीत ऋषि गोपालदास नीरज जी के जीवन और रचना संसार पर परिचर्चा प्रारम्भ करते हुए कहा कि नीरज जी का जन्म 4 जनवरी 1925 को उत्तर-प्रदेश के इटावा जिले के गाँव पुरावली में हुआ। वे शिक्षक, कवि एवं गीतकार और फ़िल्मों के गीत लेखक थे। वे पहले व्यक्ति थे, जिन्हें शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भारत सरकार ने दो-दो बार सम्मानित किया, पहले पद्म श्री से, उसके बाद पद्म भूषण से।

यही नहीं, फ़िल्मों में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिए उन्हें लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला। उनकी काव्य पुस्तकों में प्रमुख हैं- दर्द दिया है, आसावरी, बादलों से सलाम लेता हूँ, गीत जो गाए नहीं, नीरज की पाती, नीरज दोहावली, गीत-अगीत, कारवां गुजर गया, पुष्प पारिजात के, काव्यांजलि, नीरज संचयन, नीरज के संग-कविता के सात रंग, बादर बरस गयो, मुक्तकी, दो गीत, नदी किनारे, लहर पुकारे, प्राण-गीत, फिर दीप जलेगा, तुम्हारे लिये, वंशीवट सूना है और नीरज की गीतिकाएँ शामिल हैं।

उन्होंने कई प्रसिद्ध फ़िल्मों के गीतों की रचना भी की थी। वे दार्शनिक शैली में प्रतीक प्रधान व्यंजना के द्वारा सीधे-सादे ढंग से अपनी बात कहते थे। आर्या झा ने कहा कि उन्हें नीरज जी के लेखन से बहुत प्रेरणा मिलती है। उनका शब्द संयोजन अद्भुत था। उनके गीतों में संवेदनशीलता दृष्टिगोचर होती है। इसका उत्तम उदाहरण है- न कुछ तुम कह सके, न कुछ हम कह सके। भावना पुरोहित ने नीरज जी के गीत- ओ मेरी शर्मीली…. का संगान किया। कोलकाता से गोष्ठी में उपस्थित गीतकार श्रीमती सुशीला चनानी ने कहा कि उन्हें नीरज जी को रुबरु सुनने का बहुत बार मौका मिला। वे बहुत अच्छे गीतकार थे।

अध्यक्षीय टिप्पणी देते हुए दर्शन सिंह ने कहा कि नीरज जी की लोकप्रियता कुछ अलग किस्म की थी।उनकी कविताओं में एक कहानी, एक खत होता था, एक याद होती थी, बचपन होता था, यौवन का प्रेम और विछोह का दुःख होता था, सैनिकों के नाम पाती होती थी। यानि कि विषय की दृष्टि से नीरज जी भारतीय श्रोता के हर आयाम पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते थे। उनकी कविताएं भारत के आम कस्बाई इंसान का पूरा भाव जगत अपने में समेटे होती थीं। परिचर्चा सत्र बहुत ही सारगर्भित रहा।

द्वितीय सत्र में सावन के गीतों पर आधारित काव्य गोष्ठी का शुभारम्भ करते हुए सिलीगुड़ी से श्रीमती भारती बिहानी ने- आया सावन मास अति पावन जैसी खूबसूरत रचना प्रस्तुत की। श्रीमती भावना पुरोहित ने- नीली छतरी वाले सर्जनहार का अहसास है बरसात जैसी सुन्दर भावपूर्ण रचना प्रस्तुत की।

गीतकार श्रीमती सुशीला चनानी ने मारवाड़ी भाषा में स्वरचित गीत- झोटा देवै है गिरधारी/झूले है राधारानी प्रस्तुत करके सबको आनंदित कर दिया। कोलकाता से ही प्रसिद्ध गीतकार श्रीमती हिम्मत चौरड़िया ने आध्यात्मिक भावों से परिपूर्ण गीत- गड़-गड़ नभ ओ गरजे, आयो सावण मास की सस्वर प्रस्तुति दी।

आर्या झा ने अपनी रचना- बड़ा अनोखा सा दृश्य है/धूप भी है और फुहार भी जैसी मनोरम रचना प्रस्तुत करके सबको भावविभोर कर दिया। कटक, उड़ीसा से द्विभाषी कवयित्री एवं कहानीकार श्रीमती रिमझिम झा ने मैथिली भाषा में अपना भावपूर्ण गीत- हम तो जैयबे शंभू नगरिया/अबकी सावन महीना ना, प्रस्तुत किया।

सिलीगुड़ी से वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती बबीता अग्रवाल कंवल ने- नमामि शंकर, नमामि भोले, नमो नमो हे महाकाल! जैसा भक्ति भाव से ओतप्रोत गीत प्रस्तुत करके सावन मास में वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सरिता सुराणा ने अपने बचपन की यादों को ताज़ा करते हुए अपनी रचना- रह-रह कर याद आता है/वर्षा ऋतु का वह मनोरम दृश्य/एक लम्बे इन्तजार के बाद/टप-टप बरसता सावन/हवेली का वह बड़ा-सा आंगन प्रस्तुत करके सबको बचपन की याद दिला दी। उन्होंने मारवाड़ी भाषा के प्रसिद्ध सावन गीत- बन्ना रे! बागां मं झूला घाल्या की प्रस्तुति दी।

अध्यक्षीय काव्य पाठ प्रस्तुत करते हुए दर्शन सिंह जी ने अपनी रचना- सन्नाटा है चारों ओर/पर कानों में तेरा नाम गूंज रहा है रचना का पाठ किया और सभी सहभागियों की रचनाओं पर अपनी टिप्पणी देते हुए कहा कि सभी रचनाकारों ने सावन के गीतों और कविताओं के माध्यम से कवि सम्मेलन जैसा समां बांध दिया।

वरिष्ठ पत्रकार के राजन्ना भी गोष्ठी में श्रोता के रूप में उपस्थित थे। बहुत ही आत्मीयतापूर्ण और उल्लासमय वातावरण में गोष्ठी सम्पन्न हुई। सरिता सुराणा ने सभी अतिथियों और सहभागियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। आर्या झा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

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