केंद्रीय हिंदी संस्थान के 497वें नवीकरण पाठ्यक्रम का समापन समारोह संपन्न, भाषा विज्ञान वक्ताओं ने दिया यह सुझाव

हैदराबाद : केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र द्वारा तमिलनाडु राज्य के तिरूचिरापल्ली जिले के हिंदी प्रचारकों के प्रशिक्षण के लिए 497वें नवीकरण पाठ्यक्रम’ का आयोजन 28 मई से 9 जून तक किया गया। इसका समापन समारोह 9 जून को केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के निदेशक प्रो. हरिशंकर के मार्गदर्शन संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा (टी.) त्रिची, तमिलनाडु की प्रभारी सचिव श्रीमती एन. अरविंदानायकी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा (टी.), त्रिची, तमिलनाडु एस. नारायणन, कोषाध्यक्ष उपस्थित रहे।

इस अवसर पर पाठ्यक्रम संयोजक केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. भास्कर कृष्णाजी ठुबे, डॉ. दीपेश व्यास, डॉ. आर. विजयलक्ष्मी उपस्थित थीं। सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रतिभागियों द्वारा संस्थान गीत एवं स्वागत गीत प्रस्तुत करके कार्यक्रम की शुरूआत की गई। इस कार्यक्रम में कुल 61 (महिला-60 पुरुष-01) प्रतिभागियों ने कक्षा में उपस्थित होकर प्रशिक्षण प्राप्त किया। मुख्य अतिथि के रूप में एन. अरविंदानायकी ने कहा कि दक्षिण भारत में हिंदी का प्रचार-प्रसार केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा लगातार किया जा रहा है। हम हमेशा उनका सहयोग करेंगे। उन्होंने यहाँ आकर प्रशिक्षण दिया उसके लिए हम सभी अध्यापकों का आभार एवं धन्यावाद प्रकट करते हैं।

विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित एस. नारायणन ने कहा कि आप सभी भाग्यशाली हैं जो आपको यहाँ आकर इन शिक्षकों ने यह उपयोगी कार्यक्रम किया तथा यहां सीखा हुआ आपको अपने बच्चों को सीखाना है। आप सभी को आदर्श प्रचारक बनना है। शिक्षक वह सीढी होती है जो सभी को उपर चढ़ाती है। पाठ्यक्रम संयोजक एवं क्षेत्रीय निदेशक डॉ. भास्कर कृष्णाजी ठुबे ने कहा कि इस बारह दिन के प्रशिक्षण के दौरान बताया है दक्षिण में बड़े-बड़े वैज्ञानिक एवं विद्वान यहाँ से बनकर निकले हैं। इसलिए तमिलनाडु की धरती पूजनीय है। अहिंदी प्रदेशों में हिंदी का प्रचार-प्रसार करना ही केंद्रीय हिंदी संस्थान का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने हिंदी प्रचारकों की आशा किया की आप सभी को इन 12 दिनों के प्रशिक्षण के दौरान जो कुछ सीखा होगा उसका लाभ विद्यार्थियों को अवश्य मिलेगा। डॉ. दीपेश व्यास ने कहा कि एक शिक्षक जीवनपर्यंत सीखता रहता है आपने यहाँ प्रशिक्षण के दौरान जो सीखा है वह अपने विद्यार्थियों को अवश्य सिखाएँ।

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इस कार्यक्रम का संचालन उषा एस. एवं आभार ज्ञापन एम. कौशल्या एवं एस. गायत्री द्वारा किया गया। इस पाठ्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने हस्तलिखित पत्रिका ‘तिरूचिरापल्ली : तमिलनाडु का हृदय’ की रचना की। समापन समारोह के दौरान अतिथियों द्वारा हस्तलिखित पत्रिका का लोकार्पण किया गया। प्रतिभागियों को अतिथियों के द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किए गए। पर-परीक्षण के आधार पर उत्तम अंक प्राप्त छात्रों को विशेष पुरस्कार दिए गए। डी. एस. गौतमी को प्रथम पुरस्कार, एम. सायरा बानू को द्वितीय पुरस्कार, एस. पूर्णकला को तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए। डी. मोहनराज को प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया गया।

इस पाठ्यक्रम के समापन समारोह में प्रतिभागियों द्वारा अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। पाठ्यक्रम से संबंधित प्रतिक्रिया प्रतिभागी सुधा जी. तथा प्रतिवेदन नरेश विजय चव्हाण द्वारा दी गईं। प्रतिभागियों द्वारा देश भक्ति गीत, सामूहिक नृत्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा (टी.) त्रिची के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का भरपूर सहयोग रहा। अंत में राष्ट्रगान से कार्यक्रम का समापन हुआ।

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