हैदराबाद में अमानवीय और बर्बरता : दलित लड़की से शादी करने पर मंदिर में प्रवेश पर रोक, सामान भी फेंका

हैदराबाद: देश के अग्रणी शहरों में से हैदराबाद एक है। इस शहर की खूबी यह है कि हर कोई जाति, धर्म और क्षेत्र के लोग यहां पर स्वतंत्र रूप से रहते हैं। यही कारण है कि हैदराबाद शहर को मिनी इंडिया कहा जाता है। ऐसे ही महान शहर में एक अमानवीय और बर्बर घटना प्रकाश में आई है। दलित लड़की से शादी करने के कारण बुजुर्गों ने उस व्यक्ति को पहले नौकरी से निकाल दिया। बाद में उसके मंदिर में प्रवेश पर रोक लगा दी। इस घटना का खुलासा हाल ही में वनस्थलीपुरम थाना क्षेत्र में सामने आया है।

पीड़ितों के अनुसार, नक्का यादगिरि गौड़ नामक एक व्यक्ति पिछले 14 सालों से वनस्थलीपुरम के श्री पद्मावती समेत श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में काम कर रहा है। दो महीने पहले उसने प्रेमलता नाम की महिला से प्रेम विवाह किया। प्रेमलता मादिगा सामाजिक वर्ग की है। इसके चलते मंदिर समिति के अध्यक्ष लक्ष्मय्या ने यादगिरि गौड़ा को नौकरी से बर्खास्त करने कार दिया। यह जानकार प्रेमलता दुखी हो गई कि उसके कारण उसके पति की नौकरी चली गई। इस विषय को लेकर बातचीत करने के लिए वह लक्ष्मय्या के घर गई।

प्रेमलता को देखते ही लक्ष्मय्या क्रोधित हुआ। उसने जाति के नाम पर उसे अपमान किया। साथ ही कहा कि यदि आप मादिगा जाति की होने का पहले ही पता चलता तो मंदिर में पैर भी रखने नहीं देता। इसके बाद उसे धकेल दिया और मंदिर का गेट बंद कर दिया। इसके बाद लक्ष्मय्या मंदिर समिति के सदस्य सत्यनारायण, प्रबंधक श्रीहरि और चिरंजीवी के साथ यादगिरी और प्रेमलता रह रहे निवास पर गये और मकान का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया तथा उनका सामान बाहर फेंक दिया।

इसके चलते पीड़ितों ने शिकायत दर्ज कारने पुलिस थाना गई। हालांकि पुलिस ने पीड़ितों के आरोप की घटना की प्राथमिकी दर्ज कराने में हिचकिचाये। यह देख पीड़ितों ने धमकी दी कि यदि पुलिस प्राथमिकी दर्ज नहीं करती है तो वे जाति समूहों का सहारा लेंगे। यह सुनकर आखिर पुलिस ने लक्ष्मय्या और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किया है। पता चला है कि पुलिस सवर्ण जाति के आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है।

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