हैदराबाद/सोनीपत : हरियाणा के सोनीपत के एक समय के नामी व्यापारी ने जीवन के अंतिम पड़ाव में अकेलापन से तड़पते हुए वृद्धाश्रम में अंतिम सांस ली। संपत्ति और रुतबा कमानया और अपने बच्चों को ऊंचे मुकाम पर पहुंचाने के बाद भी उसकी आखिरी यात्रा में बचा तो सिर्फ एक अनाथ शव का दर्द। बेटियों ने अपने जन्मदाता पिता के गुजर जाने पर आखिरी बार देखने तक आने की जहमत नहीं उठाई। एक बेटी ने अंत में अंतिम संस्कार को भी सिर्फ मोबाइल फोन पर वीडियो कॉल से देखकर संतोष कर लिया। एक बेटी ने पिता के अंतिम संस्कार के खर्च के लिए सिर्फ ₹5,100 भेजकर उसने अपनी जिम्मेदारी खत्म मान ली। इस घटना से जुड़ा वीडियो अभी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इस घटना पर हैदराबाद पुलिस आयुक्त सज्जनार सोशल मीडिया पर भड़क गए। उन्होंने सवाल किया कि रात दिन कड़ी मेहनत करके बड़ा करने वाले माता-पिता के प्यार के प्रति अपनापन और जिम्मेदारी कहां जा रही है? उन्होंने कहा कि आज के समाज में मशीन बनते मानवीय रिश्ते और नष्ट होते नैतिक मूल्यों का यह दृश्य जीता-जागता उदाहरण है। सज्जनार ने सवाल किया कि क्या अंतिम समय में तकनीक द्वारा दिए जाने वाले डिजिटल स्क्रीन और ऑनलाइन मनी ट्रांसफर खून के रिश्ते का विकल्प बन सकते हैं? उन्होंने कहा कि माता-पिता के जीवित रहते उन्हें दिल से अपनाना और उनके अंतिम समय में साथ देना बच्चों का प्राथमिक धर्म है।
सज्जनार ने दुख जताया कि माता-पिता को वृद्धाश्रम तक सीमित कर देना और उनकी मृत्यु को भी वीडियो कॉल से देखकर अपनापन तोड़ लेना बेहद शर्मनाक है। मानवता पर दाग लगाने वाली ऐसी संस्कृति को बदलना चाहिए। सीपी ने क्रोध व्यक्त करते हुए कहा, “जिन्होंने आपको इस दुनिया में लाया और आपके भविष्य के लिए अपना जीवन दांव पर लगा दिया। उस पिता की अंतिम यात्रा में साथ न खड़े हो पाने वाली ये ऐश्वर्यपूर्ण, व्यापारिक जिंदगियां किस काम की? करोड़ों कमाने के बाद, ऊंचे पदों पर पहुंचने के बाद भी माता-पिता का कर्ज न चुका पाने वाली शिक्षा और संस्कार किस काम की है?”
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गौरतलब है कि 4 अगस्त को तड़के करीब साढ़े तीन बजे शिवचरण रामरतन गुप्ता का निधन हो गया। उनकी मौत के बाद वृद्धाश्रम प्रबंधन ने तुरंत उनकी तीनों बेटियों को इसकी सूचना दी और अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए संपर्क किया। हालांकि बेटियां नहीं पहुंचीं। अंतिम संस्कार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
