हैदराबाद : पूर्व जिला जज, लेखक और कवि ‘जिम्बो’ मंगारी राजेंदर के ‘साहित्य के क्षेत्र में मेरी जीवन यात्रा’ विषय पर एक साहित्यिक परिचर्चा कार्यक्रम का भव्य आयोजन 8 ऑक्टोबर को बंजारा हिल्स स्थित लामाकान (Lamakaan) में किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजक प्रमुख फिल्म निर्देशक, निर्माता, लेखक और कवि डॉ. बी. नरसिंगराव ने किया। जबकि कार्यक्रम का संचालन प्रमुख समाजवाद और इतिहासकार डी सत्यनारायण ने किया।

प्रमुख फिल्म निर्देशक, निर्माता, लेखक और कवि डॉ. बी. नरसिंगराव
इस अवसर पर सत्यनारायण ने जज राजेंदर के साथ उनका परिचय और उनके साहित्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके बाद मंगारी राजेंदर ने बचपन में बिताये दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि एक जज, कवि और लेखक के रूप में कैसे-कैसे कार्य किया विस्तार से बताया।

पूर्व जिला जज, लेखक और कवि ‘जिम्बो’ मंगारी राजेंदर और समाजवाद और इतिहासकार डी सत्यनारायण
इस अवसर पर मंगारी राजेंदर ने कहा कि एक न्यायाधीश के रूप में कोर्ट में कानून के दायरे में जिम्मेदारियां निभाई हैं। हालांकि एक लेखक और कवि के रूप में समाज के दुखों, अन्यायों को अपनी कलम के जरिए सवाल किया है। उन्होंने कहा कि उनके साहित्य में जितना प्रेम होता है, सामाजिक बुराइयों पर उतना ही विद्रोह होता है। राजेंदर ने बताया कि पेशे से कानून में विश्वास करने वाले उन्होंने, प्रवृत्ति से अक्षर को हथियार बनाया है। उन्होंने याद किया कि उनकी लिखी ‘वेमुलवाड़ा कथाएँ’ सीरीज को पाठकों से अद्भुत सराहना मिली है। इस तरह लेखक के रूप में अपार पहचान दिलाई है।
राजेंदर ने इस पर दुख जताते हुए कहा कि बदलते समय में लोग प्रकृति की उपेक्षा कर रहे हैं। इसीलिए पर्यावरण संरक्षण पर जागरूकता फैलाने के लिए उनकी रचनाएँ चलीं। उन्होंने उनका गांव कवियों के लिए, साहित्य के लिए जन्मस्थान है, बचपन से उनके गांव में मौजूद साहित्यिक माहौल, वहां की मिट्टी की खुशबू ने ही उन्हें कवि बनाया। जज ने कहा कि आंदोलन की धरती तेलंगाना में कितनी ही माताओं के आंसुओं की व्यथा को अपने साहित्य में दर्शाया है। स्पष्ट किया कि आम लोगों की तकलीफें और शहीदों के बलिदान ही उनकी कलम की जान हैं। सभा में मॉडरेटर के रूप में मौजूद प्रमुख इतिहासकार डी सत्यनारायण ने कहा कि जिम्बो सिर्फ कानून पढ़ने वाले जज ही नहीं, बल्कि समाज की गहराइयों को समझने वाले महान सामाजिक दार्शनिक हैं। एक बार तो अपनी रचना का पाठ करते हुए अपने बच्चों को याद करके भावुक हो गये। इस दौरान सभागार में उपस्थित कवि और लेखकों के सवालों का जवाब जज राजेंदर ने दिया।
