इजरायल की राजनीति में अनहोनी घटनाएं हो रही हैं। हाल में हुए राष्ट्रीय चुनावों के फाइनल नतीजे आए हैं। फिर भी किसी पार्टी या गठबंधन को भी सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। इससे वहां राजनीतिक गर्मी और बढ़ गई। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू गंभीर आरोप लगा रहे हैं कि चुनावों में धांधली हुई है और विपक्ष के नेता तो कह रहे हैं कि जीत हमारी ही है। यह राजनीतिक घमासान फिलहाल इजरायल में हॉट टॉपिक बन गया।
सेंट्रल इलेक्शन कमेटी द्वारा जारी आधिकारिक फाइनल नतीजों के मुताबिक मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली लिकुड पार्टी 27 सीटें जीत कर सबसे बड़ी पार्टी बनी है। येश अतीद 21 सीटें, जॉइंट लिस्ट 11 सीटें जीती वहीं.. डेमोक्रेट्स, राम पार्टियां हर एक 8 सीटें पाईं हैं। वहीं इजरायल बेतेनु, यूनाइटेड तोरा जूडाइज्म, ओट्ज्मा येहुदित पार्टियां हर एक 7 सीटें, शास, रिलिजियस जियोनिज्म पार्टियां हर एक 6 सीटें हासिल की हैं।

गादी आइज़नकोट
आंकड़ों के मुताबिक.. नेतन्याहू गठबंधन को 53 सीटें ही मिली हैं। विपक्ष खेमे को 48 सीटें और अरब पार्टियों को 19 सीटें मिली हैं। सरकार बनाने के लिए चाहिए मैजिक फिगर 61 सीटें किसी गठबंधन को भी नहीं मिली हैं। इससे हंग स्थिति पैदा हुई। इन चुनावों में कुल वोटरों में 77.9 प्रतिशत ने अपने वोट का इस्तेमाल किया।
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इस पृष्ठभूमि में नेतन्याहू और उनकी पार्टी ‘लिकुड’ मांग कर रही है कि हाल ही चुनावों में अरब पार्टियां धोखाधड़ी में शामिल रही हैं। इस पर पुलिस के साथ शिन बेट तथा सेंट्रल इलेक्शन कमेटी जांच करे। सोशल मीडिया पर चुनावी रिश्वत और धांधली पर नेतन्याहू लगातार पोस्ट करते ही रहे। दूसरी तरफ विपक्ष के नेता तो “जीत किसी की भी हो जीत ही है।” कहते हुए नेतन्याहू के आरोपों का जवाब दे रहे हैं।

आपको बता दें कि इजरायल प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन प्रणाली का पालन करता है। पूरे देश को एक ही निर्वाचन क्षेत्र मान कर वोट गिनते हैं। संसद में प्रवेश करने के लिए पार्टियों को कम से कम 3.25 प्रतिशत वोटों की थ्रेशोल्ड पार करनी चाहिए। इन नियमों के मुताबिक.. 3.25 प्रतिशत वोट न पाने वाली ‘द रिजर्विस्ट्स’, ‘पीपल ऑफ इजरायल’ और ‘हरेडी पब्लिक’ जैसी 3 सूचियां संसद से दूर रह गईं।
चुनाव के फाइनल नतीजे 4 नवंबर को देश के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को आधिकारिक रूप से सौंपे जाएंगे। 10 नवंबर को नव निर्वाचित 26वीं संसद के सदस्य शपथ लेंगे। इसी क्रम में गठबंधन सरकार बनाने के लिए पार्टियों के बीच बातचीत तेज हुई है। अब इस रोमांचक लड़ाई में कौन सा गठबंधन सत्ता हासिल करेगा यह फिलहाल दिलचस्प बन गया है।
