कौशांबी (डॉ. नरेन्द्र दिवाकर) : मृत्युभोज जैसी सामाजिक कुरीति के विरुद्ध जनजागरूकता बढ़ाने और शोकाकुल परिवारों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से बचाने के उद्देश्य से नगर पंचायत चरवा, चायल, जनपद कौशांबी (उ.प्र.) स्थित सर्व श्री राम लौटन निर्मल, राम मिलन, राम सरन निर्मल एवं डॉ. राम करन निर्मल (प्रदेश अध्यक्ष, लोहिया वाहिनी, समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश) के निवास पर श्रद्धांजलि सभा एवं सामाजिक जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्मृतिशेष राधे लाल निर्मल जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मृत्युभोज का त्याग करने, सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जनमत तैयार करने तथा शिक्षा, सेवा और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया गया।
उल्लेखनीय है डॉ. राम करन निर्मल के पूज्य पिताजी स्मृतिशेष राधे लाल निर्मल जी का निधन 19 अक्टूबर 2026 को हुआ था। उनकी स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी एवं उसके विभिन्न फ्रंटल संगठनों के वरिष्ठ नेताओं, सामाजिक सुधार कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, रिश्तेदारों, प्रबुद्धजनों तथा क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की। उपस्थित लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। कार्यक्रम का मुख्य संदेश था “भोज नहीं, बोझ नहीं, शोक में सादगी, स्मृति में सेवा”।

वक्ताओं ने कहा कि किसी प्रियजन के निधन के बाद परिवार को भावनात्मक संबल, सहयोग और संवेदना की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में सामाजिक परंपरा या लोकलाज के नाम पर मृत्युभोज के लिए आर्थिक दबाव बनाना उचित नहीं है। मृत्यु के उपरांत दिखावे पर धन खर्च करने के बजाय उस धन का उपयोग बच्चों की शिक्षा, जरूरतमंदों की सहायता और समाजोपयोगी कार्यों में किया जाना चाहिए। इस अवसर पर डॉ. राम करन निर्मल एवं उनके परिजनों ने मृत्युभोज जैसी कुप्रथा का त्याग करने की घोषणा करते हुए समाज के लोगों से भी इस दिशा में आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि सामाजिक बदलाव की शुरुआत स्वयं से करनी होगी। जब परिवार स्वेच्छा से ऐसी प्रथाओं का त्याग करेंगे, तभी समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होगा।

कार्यक्रम के दौरान समृतिशेष राधे लाल निर्मल जी की स्मृति में बड़ी संख्या में पौधों का वितरण भी किया गया। इस पहल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और स्मृति को जनकल्याण से जोड़ने का संदेश दिया गया। उपस्थित लोगों ने मृत्युभोज के स्थान पर सादगीपूर्ण श्रद्धांजलि, जरूरतमंदों की मदद और सामाजिक सुधार को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
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कौशांबी में वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन फॉर रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑफ धोबिस (WORDD) द्वारा वर्ष पूर्व प्रोत्साहित मृत्युभोज विरोधी सामाजिक जागरूकता अभियान का उल्लेख करते हुए बताया गया कि इससे प्रेरित होकर रोहित दिवाकर, विजय दिवाकर, मुकेश निर्मल, अनिल मानव, हरिशंकर, प्रो. राजकुमार चौधरी, कमलेश दिवाकर, इंद्रजीत निर्मल, अश्वनी यादव, चन्द्र राम दिवाकर, राम चन्द्र, सुशील निर्मल, अवनीश कुमार तथा अब डॉ. राम करन निर्मल सहित अनेक लोगों ने मृत्युभोज जैसी कुप्रथा का त्याग करने की पहल की है। आयोजकों ने इस अभियान को सामाजिक समानता, आर्थिक विवेक और मानवीय संवेदना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तथा सांसद माननीय नरेश उत्तम पटेल सहित अनेक लोगों ने अपने विचार रखे। वक्ताओं में डॉ. रामकरन निर्मल, राम सरन निर्मल, अवनीश कुमार, अनिल मानव, चन्द्रबली रैना, रितेश निर्मल, ऋषिकेश निर्मल, राकेश पहलवान, अमित, सुमित, हिमांशु, अनुज, कविता, रंजना, कान्ति देवी, रिन्धु पासवान, अमरेंद्र आर्य, चिंतामणि दिवाकर, प्रो. राजकुमार चौधरी, विकास मौर्य, दुर्गावती, डॉ. अनिल कनौजिया, दिग्विजय सिंह देव, मंजर यार, अरुण गौतम और उद्धव श्याम यादव सहित अन्य गणमान्य लोग शामिल रहे।

कार्यक्रम का संचालन अमरेंद्र आर्य एवं डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने किया। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी लोगों से अपील की कि वे मृत्युभोज जैसी कुप्रथाओं को बढ़ावा देने के बजाय शोकाकुल परिवारों का सहयोग करें, सामाजिक दबाव से मुक्त वातावरण बनाएं तथा शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जनसेवा को प्राथमिकता दें। “मृत्यु के बाद दिखावे का भोज नहीं, जीवन में शिक्षा, सेवा और सम्मान हो” का संकल्प भी लिया गया। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि व्यक्तिगत संकल्पों से शुरू हुआ यह अभियान व्यापक सामाजिक जनजागरण का रूप लेगा और समाज में सादगीपूर्ण, संवेदनशील तथा जनकल्याणकारी परंपराओं को प्रोत्साहित करेगा।
