पानी चाहिए तो पढ़ें खबर : नए बोरवेल के लिए शर्तें, बोरवेल डालने के लिए एनओसी जरूरी, पुराने बोरवेल को रेगुलराइज करना ही होगा

हैदराबाद : एल नीनो इफेक्ट से आने वाले दिनों में भारी जल संकट पैदा होने की संभावना होने से सरकार ने भूगर्भ जल के संरक्षण पर ध्यान दिया है। ग्राउंड वाटर का अंधाधुंध इस्तेमाल रोकने के साथ दुरुपयोग रोकने के लिए कदम उठाए हैं। इसके तहत पहले से लागू वाल्टा कानून के साथ जीओ 15 नियमों को सख्ती से लागू करने का संबंधित विभागों को आदेश जारी किया। इससे अब मनमाने तरीके से बोरवेल खोद कर भूगर्भ जल निकालने की इजाजत नहीं है।

फीस

ग्रेटर हैदराबाद सीमा में पीने के पानी की जरूरतों को छोड़ अन्य बोरवेल खोदने पर 1 नवंबर से रोक नियम लागू होने वाली है। जीएचएमसी सीमा में पीने के पानी के बोरवेल के साथ अन्य इलाकों में नया बोरवेल डालना है तो ग्राउंड वाटर डिपार्टमेंट से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) लेना जरूरी है। खेती, घरेलू, व्यापार, वाणिज्यिक केंद्र, वाटर प्लांट, इंडस्ट्रीज, माइंस सहित सभी क्षेत्रों को यह नियम लागू होने वाले है। तय 10 हजार रुपये फीस देने पर नियमों के मुताबिक अफसर एनओसी जारी करेंगे।

एनओसी

सरकार ने उन विभागों को स्पष्ट किया कि नई संस्थाओं और उद्योगों की स्थापना की अनुमति देते समय एनओसी देखना चाहिए। सुझाव दिया गया है कि पहले से बिना परमिशन डाले गये बोरवेल को तुरंत रिन्यू कर लेना चाहिए और अवधि खत्म हुई एनओसी को तुरंत फिर से बनवा लेना चाहिए। बोरवेल रिग के इस्तेमाल पर भी सरकार ने पाबंदी लगाई। चेतावनी दी है कि रजिस्ट्रेशन वाले ड्रिलिंग रिग का ही इस्तेमाल करना चाहिए, बिना रजिस्ट्रेशन वालों को सीज करेंगे। अधिकारियों ने कहा कि आने वाले दिनों में भूगर्भ जल को नियमित करना और दुरुपयोग रोकना ही इन कदमों का मुख्य उद्देश्य हैं।

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यूजर चार्ज

ग्राउंड वाटर का ज्यादा इस्तेमाल करने वाली इंडस्ट्रीज और वाणिज्यिक संस्थाओं पर यूजर चार्ज लगाएंगे। ब्रिक्स उद्योग, रेडीमिक्स कंक्रीट प्लांट, मिनरल वाटर, डिस्टिल्ड वाटर प्लांट, गोली सोडा, बर्फ बनाने की यूनिट, आइसक्रीम कंपनियां, ऑटोमोबाइल सर्विसिंग सेंटर, होटल, रेस्टोरेंट, अपार्टमेंट, स्विमिंग पूल, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल आदि संस्थाओं को यूजर चार्ज देना होगा। पानी के इस्तेमाल को गिनने के लिए डिजिटल फ्लो मीटर लगाना होगा। इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की संस्थाओं में हर हजार लीटर पर 1 रुपया यूजर चार्ज वसूल रहे हैं।

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टैरिफ

माइंस और इंडस्ट्रीज में रोज निकाले जाने वाले ग्राउंड वाटर की क्षमता के हिसाब से यह टैरिफ बदलता है। सामान्य उद्योगों के लिए सुरक्षित इलाकों में हर किलो लीटर पर 2 रुपये से 10 रुपये तक, ओवर एक्सप्लॉइटेड एरिया में यह टैरिफ 20 रुपये से 100 रुपये तक लगाया जा रहा है। इस बारे में ग्राउंड वाटर विभाग के अफसर संबंधित संस्थाओं को नोटिस जारी कर रहे हैं। बड़ी इंडस्ट्रीज जैसे सिंगरेनी कोल माइंस और सीमेंट उद्योगों से संबंधित चूना पत्थर माइंस ही एनओसी लेकर यूजर चार्ज दे रहे हैं। इसमें ग्रेनाइट और स्टोन माइंस को भी जोड़ने की जरूरत है।

छूट

ग्रामीण और शहरी इलाकों में व्यक्तिगत घरेलू उपभोक्ता, खेती गतिविधियां, रूरल वाटर सप्लाई स्कीम, सशस्त्र बलों की संस्थाओं को यूजर चार्ज से छूट है। शहरी इलाके के आवासीय अपार्टमेंट और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी को महीने के मीटर रीडिंग के आधार पर यूजर चार्ज लगाएंगे। इनके लिए भी स्लैब के हिसाब से टैरिफ बदलता है। सोख्ता गड्ढे जैसे ग्राउंड वाटर रिचार्ज निर्माण करने पर ही 50 प्रतिशत रिबेट मिलता है।

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