नई दिल्ली : देश की जेलों में मौजूद महिला कैदी और उनके साथ रह रहे बच्चों के मानवाधिकारों की सुरक्षा पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने चिंता जताई। आयोग ने कहा कि इस मामले में अधिकारों की सुरक्षा ही लक्ष्य के तौर पर केंद्र के नौ मंत्रालयों के सीएस, तेलंगाना सहित सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों के डीजीपी को गुरुवार को गाइडलाइंस जारी की। इसके तहत महिला कैदी और उनके बच्चों के कल्याण के लिए कुल दस व्यापक कार्य क्षेत्रों पर ध्यान दिया।
आयोग ने सुझाव दिया कि इसके तहत गिरफ्तारी से पहले पालन की जाने वाली प्रक्रियाएं, जेल एडमिशन रिकॉर्ड का रखरखाव, बच्चों से संबंधित समग्र डेटाबेस, डॉक्यूमेंटेशन प्रक्रियाओं को पक्के तौर पर लागू करना चाहिए। स्पष्ट किया कि इनके साथ ही कैदियों की शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं, जेलों में साफ-सुथरी रहने की स्थिति और उनके अधिकारों पर जागरूकता फैलाने जैसे विषयों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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आयोग ने आगे कहा कि वैसे ही माताओं के साथ जेल में रह रहे या बाहर अलग पल रहे बच्चों का कल्याण, परिवार के सदस्यों से बात करने के लिए मुलाकात सुविधाएं, मुफ्त कानूनी मदद मिले, यह देखना चाहिए। कोर्ट की पेशी के समय महिला कैदियों को जरूरी सुविधाएं देने के साथ, जेल से रिहा होने के बाद वे सम्मान से जी सकें, इसके लिए पुनर्वास, सामाजिक पुन:एकीकरण कदम उठाने चाहिए। साथ ही चेतावनी दी कि फॉरेन नेशनल कैदियों के मामले में भी तय नियमों का पालन करना चाहिए।
