इंदिरा और राजीव हत्याओं से राजनीतिक सफर तक..
अगले महीने 10 तारीख को दुनियाभर में रिलीज होने वाली किताब
प्रेम, कर्तव्य और विषादों के साथ 544 पन्नों की जीवन यात्रा
पेंग्विन संस्था पीछे हटी.. हार्पर कॉलिन्स के हाथ में प्रकाशन
नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी की शीर्ष नेता सोनिया गांधी ने इंस्टाग्राम पर कदम रखा है। अपने जीवन की खास बातों से तैयार की गई ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ का फर्स्ट लुक पहली पोस्ट के तौर पर शेयर किया है। दुनियाभर में 10 नवंबर को यह किताब रिलीज होने वाली है। सोनिया गांधी ने बताया कि अपने जीवन में हुई कई बातों के साथ-साथ प्रेम, कर्तव्य, विषाद और अनेक मोड़ों का इस किताब में जिक्र किया है। कहा कि अपनी आत्मकथा को पाठकों के साथ साझा करने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रही हैं।

उन्हें किताब देने वाले प्रकाशकों से कहा- “आप बहुत भारी जिम्मेदारी लेकर आए हैं” हंसते हुए मजाक किया। इसके बाद 544 पन्नों की किताब पकड़ कर फोटो खिंचवाईं। पन्नों को दिलचस्पी से पलटते हुए उसमें मौजूद दुर्लभ फोटो बेटी प्रियंका गांधी को दिखाईं। इस मौके पर प्रियंका ने सोनिया को मिठाई खिलाई और गले लगाया।
इंस्टा में पहली पोस्ट
इंस्टा पोस्ट में सोनिया ने कहा “सभी को नमस्कार। ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ का फर्स्ट लुक आपके साथ शेयर करते हुए बहुत खुशी हो रही है। प्रेम, जिम्मेदारी, नुकसान, हम जिस जगह से जुड़े हैं उसकी तलाश.. इन विषयों के इर्द-गिर्द यह कहानी चलती है। इस किताब को आपके साथ साझा करने का इंतजार कर रही हूं”।
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सोनिया गांधी ने पहले कहा कि इंदिरा गांधी और राजीव गांधी हत्याओं से..अपने परिवार के बारे में अब तक कई बातें लिखी गई हैं, लेकिन भावनाओं को पूरी तरह सामने नहीं ला पाईं। यह किताब उनके परिवार के सदस्यों के मानवीय पहलू को बताएगी। खुलासा किया कि छह दशकों में उन्होंने जो सामाजिक, राजनीतिक बदलाव देखे, उन अनुभवों को भी इसमें बताया है।
गौरतलब है कि 1984 में अपनी सास इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सोनिया का जीवन अप्रत्याशित मोड़ ले गया। उसके बाद राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाली। सात साल बाद 1991 में राजीव गांधी की भी हत्या कर दी गई। इन त्रासदियों के बाद सोनिया गांधी राजनीति में आईं। कांग्रेस पार्टी की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष के तौर पर काम किया। प्रधानमंत्री पद संभालने के पार्टी के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया।
प्रकाशन संस्थाओं में बदलाव
पहले इस किताब को प्रकाशित करने के लिए आगे आई पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया बाद में पीछे हट गई। खबरें आईं कि पांडुलिपि में संपादकीय बदलाव करने के प्रस्तावों को सोनिया गांधी ने ठुकरा दिया, इसलिए यह फैसला लिया। उसके बाद हार्पर कॉलिन्स ने इस किताब के प्रकाशन की जिम्मेदारी संभाली।
