नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय में आयोजित विजयादशमी उत्सव में शामिल हुए आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने आयुध पूजा करने के बाद अहम टिप्पणियां कीं। मोहन भागवत ने कहा कि हिमालय क्षेत्र में किए जा रहे एकतरफा विकास कार्यों के कारण ही हाल ही में नेपाल में अचानक बाढ़ आई है, इन गतिविधियों के कारण ही पूरे हिमालय क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाएं आ रही हैं। अपने भाषण में सामाजिक मुद्दों से लेकर भू-राजनीतिक चुनौतियों तक कई विषयों पर आरएसएस चीफ ने प्रतिक्रिया दी। इस कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
दुनिया के कई देशों में सत्ता परिवर्तन के बारे में मोहन भागवत ने अहम टिप्पणियां कीं। बांग्लादेश, नेपाल जैसे देशों में हुए आंदोलनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से मीडिया में आ रही खबरों को देखें तो पता चलता है कि फ्रांस, अल्बानिया जैसे देशों में क्या हो रहा है। व्यवस्थाओं, संस्कृति, मानवीय मूल्यों को नष्ट कर भ्रष्ट करने के लिए पश्चिमी देशों से आए तूफान के रूप में उन्होंने इन आंदोलनों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि विकसित देश भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
भारत अभी भी विकासशील दौर में ही है इसलिए चुनौतियां आती रहेंगी, कहते हुए आरएसएस चीफ ने कहा कि चाहे विरोध करने वाले हों, शांति व्यवस्था लागू करने वाले अधिकारी हों या राजनेता हों किसी के भी काम एकजुट हमारे समाज में टकराव, नफरत की ओर न ले जाएं, विभाजन पैदा न करें। उन्होंने अपील की कि भावनाएं तीव्र होने पर भी हमारे कार्य निश्चित रूप से संविधान, कानून, नागरिक मर्यादा के दायरे में ही रहने चाहिए, ऐसी सलाह दी। उन्होंने माना कि पश्चिमी देशों की सत्ता परिवर्तन शक्तियों के लिए भारत ही अंतिम लक्ष्य है।
Also Read-
ओटीटी कंटेंट को नियंत्रित करने की जरूरत है, कहते हुए भागवत ने कहा कि युवा बिना किसी विवेक के कंटेंट देख रहे हैं। विवेक खोने के कारण ही नशे के आदी होना जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं। ड्रग्स हानिकारक हैं, जानलेवा हैं, यह लोगों को पता न होने के कारण नहीं, यह बात लोगों को पता है, फिर भी वे उसके आदी हो रहे हैं। चेतावनी दी कि यह एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या बन गई है।
हमारा देश विविधता का घर है, कहते हुए आरएसएस चीफ ने कहा कि इस विविधता को स्वीकार करना, उसकी रक्षा करना ही हमारी पारंपरिक विशेषता है। उन्होंने कहा कि ‘स्व’ की भावना को जगाने के लिए संघ पिछले सौ सालों से काम कर रहा है। ‘स्व’ के तत्व की नींव पर भारत को एकजुट करने और अधिक शक्तिशाली बनाने के प्रयास हो रहे हैं। आरएसएस चीफ ने कहा, “आप मंदिर जाएं, मठ या गुरुद्वारा जाएं, आपको वही ज्ञान, आध्यात्मिक मार्गदर्शन मिलेगा। विविधता का सम्मान करना, उसे स्वीकार कर सभी को सुरक्षा देना भारतीय विचारधारा में आप जहां भी जाएं दिखेगा”।
