सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में इंडिया गठबंधन के मुख्य बिंदु – “EC की सभी फाइल्स को उजाकर किया जाये”

नई दिल्ली : गौरतलब है कि चुनाव आयोग कर रही SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर इंडिया गठबंधन नेताओं ने याचिकाएं दाखिल की। अक्टूबर 12 को मार्च फॉर डेमोक्रेसी करने वाले गठबंधन के राहुल गांधी सहित 11 नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल कीं। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को स्वीकार किया। याचिका में चुनाव आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार और अन्य दो चुनाव आयुक्तों को रेस्पोंडेंट के तौर पर जोड़ा है।

राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, सौगत रॉय (TMC), अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी), तेजस्वी प्रसाद यादव (RJD), संजय राउत (शिवसेना UBT), एमए बेबी (CPM), डी राजा (CPI), महुआ मांझी (JMM), सुप्रिया सुले (NCP शरद पवार), ईटी मोहम्मद बशीर (IUML) आदि 11 नेताओं ने याचिकाएं दाखिल कीं।

याचिका में कहा कि SIR प्रक्रिया से जुड़ी सभी फाइलें, एजेंडा, मिनट्स, नोटिंग्स और आपत्तियां बाहर लानी चाहिए। RTI जवाबों के आधार पर कहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर SIR शुरू करने का चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर फैसला लिया, इसका रिकॉर्ड नहीं है। आलोचना की है कि फॉर्म-6 को नियम संशोधित किए बिना ही बदला गया, यह पहली बार वोट डालने वालों पर अनावश्यक बोझ डालता है।

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याचिका में कहा कि 2025 जून 24 को SIR शुरू करने के लिए लिए गए फैसले के साथ ECINET, ERONET एक्सेस लॉग्स को उजागर करना चाहिए। चिंता जताई है कि ECINET, ERONET डेटाबेस पारदर्शी तरीके से काम नहीं कर रहे हैं, वोटर नाम हटाने के बाद फिर से जोड़ने की सुविधा नहीं है। चेतावनी दी है कि करीब 13 करोड़ वोटरों के नाम ड्राफ्ट चरण में हटाए जाने का खतरा है, ऐसा कहते हुए, योग्य वोटर बाहर हो जाने का खतरा है।

आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग के सामूहिक अधिकारों का मुख्य चुनाव आयुक्त ने अकेले इस्तेमाल किया। चिंता जताई है कि अन्य चुनाव आयुक्तों की अनुमति के बिना फैसले लिए। आगे कहा कि आर्टिकल 324, 2023 कानून, टीएन शेषन केस फैसले के अनुसार फैसले लिए क्या, इसकी जांच करनी चाहिए। मांग की है कि किसी भी नोटिस के बिना और पक्ष सुनने का मौका दिए बिना किसी भी वोटर को नहीं हटाना चाहिए।

अपील की है कि हटाए गए वोटरों की सूची बूथ वार, कारणों और डेमोग्राफिक विवरण के साथ प्रकाशित करनी चाहिए। रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र ऑडिट कमेटी बनाकर वोटर लिस्ट बदलावों की जांच करनी चाहिए। कोर्ट का फैसला आने तक SIR को अस्थायी रूप से रोकना चाहिए।

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