हैदराबाद: पशुधन पर एल-नीनो का असर गंभीर रूप से पड़ने वाला है। पीवी नरसिम्हा राव वेटनरी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक चिंता जता रहे हैं कि वर्षा सामान्य से कम दर्ज होने, अत्यधिक तापमान के कारण खेती के साथ पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादकता पर गंभीर असर पड़ेगा। तापमान सामान्य से 6 डिग्री तक बढ़ने की संभावना होने से, पशुओं में तनाव हार्मोन निकल कर रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती है।
नतीजतन गलघोंटू और सुजन जैसी खतरनाक बीमारियां तेजी से लगने का खतरा है। गायें गर्मी सहने की प्रक्रिया में पाचन धीमा हो कर चारा लेना कम हो जाता है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इससे दूध उत्पादन 10 से 30 प्रतिशत तक गिर जाएगा।
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अप्रत्यक्ष रूप से इस मौसमी असर का असर तेलंगाना में दूध संग्रह पर पहले से दिख रहा है। विजय डेयरी के सरकारी आंकड़ों को देखें तो 2024-25 में 4 लाख लीटर रहा औसत रोजाना दूध संग्रह, 2025-26 तक 3.36 लाख लीटर तक गिर गया। पिछले साल की तुलना में 64 हजार लीटर की कमी दर्ज हुई। इस पृष्ठभूमि में डेयरी आय बढ़ाने के लिए अपनी जगहों पर पेट्रोल पंप व शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के जरिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने पर डेयरी ने ध्यान दिया है।
दूसरी ओर पशु चिकित्सक सुझाव दे रहे हैं कि पशुओं को बचाने के लिए (खास तौर पर फरवरी से जून तक) आने वाली सूखे की स्थिति को देखते हुए पशु चारा योजनाएं तैयार करनी चाहिए। लू से बचने के लिए पीने के पानी में इलेक्ट्रोलाइट, अपच रोकने के लिए प्रोबायोटिक्स के इस्तेमाल के साथ शेड में भीड़ कम करनी चाहिए।
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अमूल प्लांट इस चुनौतियों के बीच राज्य में डेयरी उद्योग को मजबूत करने के लिए अहम कदम उठाए जा रहे हैं। 4 अक्टूबर को मेदक जिले के तूप्रान में ऊर्जी इंडस्ट्रियल पार्क में केंद्रीय गृह, सहकारिता मंत्री अमित शाह दौरा करने वाले हैं। इस दौरान साबर डेयरी प्रोजेक्ट का भूमिपूजन करने के साथ, अमूल संस्था द्वारा बनाया गया पहला आधुनिक डेयरी प्लांट वह शुरू करने वाले हैं। इस प्लांट के जरिए रोज 5 लाख लीटर दूध जुटाने का टारगेट रखा गया है।
इसके अलावा 200 मीट्रिक टन दही जैसे उत्पाद बनाने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘श्वेत क्रांति 2.0’ के तहत तेलंगाना में नए सिरे से 1,525 डेयरी सहकारी समितियां बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने एक बयान में बताया है। उन्होंने कहा कि डेयरी कोऑपरेटिव्स के जरिए दूध संग्रह बढ़ा कर और किसानों को बाजार के मौके देना ही इन प्रोजेक्टों का मुख्य लक्ष्य है।
