लंबित चालान नहीं भरे तो बिजली कनेक्शन काट दो: सुप्रीम कोर्ट

Note- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक फैसला सुनाया कि लंबित चालान नहीं भरे तो बिजली कनेक्शन काट दो या उस बिजली बिल के साथ जुर्माना की रकम वसूला जाये। साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों को इस संबंधित में कानून बनाने या संसोधन करने का सुझाव दिया है। इस फैसले का गंभीर परिणाम वाहन चालकों पर पड़ने वाला है। विश्लेषकों का मानना है कि अदालतें सर्वोपरि है। हालांकि, इसके फैसले भिन्न प्रकार के होते हैं। अर्थात न्याय के साथ न्याय और अन्याय के साथ अन्याय नहीं होता है। यह फैसला भी इसी दायरे में आता है। क्योंकि निचली अदालतों के अनेक फैसले ऊपरी अदालते बदलते या बदल दिये जाते हैं। इतना ही नहीं, वर्तमान में अदालतों के अनेक फैसले विवादों के घेरे में है। इन फैसले को लेकर बड़े-बड़े आंदोलन किये गये और किये जा रहे है। कहा जा रहा है कि सोमवार को आया फैसला भी विवादास्पद है। क्योंकि बिजली बिल और वाहन चालान अलग-अलग विषय है। मतलब बिजली बिल एक महीने के बाद आता है और वह भी युनिट पर आधारित होता है। वाहन चालान एक आपराधिक मामला है। इसे जुर्माना कहा जाता है। चालान जुर्माना भी हजारों रुपये के हैं। अनेक लोगों को दिन भर काम करने पर भी एक हजार रुपये नहीं मिलता। ऐसे व्यक्तियों से बिजली बिल के साथ हजारों रुपये चालान काटना कहां तक उचित है। शहर के लोगों के पास काम पर जाने के लिए छोटे-छोटे वाहन होते है। इनके पास से हजार रुपये जुर्माना और वह भी करंट बिल के साथ वसूल करना कहां का न्याय है। वाहन चालकों को नियमों का पालन करना चाहिए। सब जानते हैं कि चालान जारी करने में अनेक कमियां है। हालांकि, शहरों के अनेक ठिकानों पर पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। सड़कें ठीक नहीं है। दूर-दूर यू टर्न है। इससे पेट्रोल की बरबादी हो रही है और प्रदूषण बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

नई दिल्ली : पेंडिंग चालानों की वसूली को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम फैसला सुनाया। सालों से जमा पड़े चालानों से जुड़े जुर्माने को संबंधित वाहन चालक के घर के बिजली बिल में जोड़कर वसूलने का प्रस्ताव दिया। इस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया।

इस संबंध में मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 136ए के तहत ‘इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट मैकेनिज्म’ लागू करने का आदेश देने की मांग वाली याचिका पर जस्टिस जेबी पारदीवाला व जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि देश भर में विभिन्न राज्यों में करीब 45,000 करोड़ रुपये के ई-चालान बकाया हैं, जिसमें से अब तक सिर्फ 25,000 करोड़ रुपये ही वसूले गए हैं। इस पर बेंच ने कहा कि ट्रैफिक स्टाफ सिर्फ चालान काटे तो काफी नहीं है, जुर्माना वसूलने पर भी ध्यान देना चाहिए। इसके लिए नए तरीकों पर विचार करने का अधिकारियों को सुझाव दिया।

कोर्टन ने कहा कि वाहन चालकों के घर के बिजली बिल में इन पेंडिंग चालानों की जुर्माना राशि जोड़ दी जाए, तब भी न भरें तो बिजली कनेक्शन बंद कर दिया जाए। संबंधित वाहनों को जब्त करने के साथ परिवहन पोर्टल में ब्लैक लिस्ट में डालने का भी सुझाव दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पेंडिंग चालानों की पूरी रकम चुकाने तक संबंधित वाहन मालिक के ड्राइविंग लाइसेंस के साथ, वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के रिन्यूअल, फिटनेस, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट जारी करने को रोकने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

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इन प्रस्तावों पर विचार करने के लिए केंद्र व राज्य सरकारों को जस्टिस जेबी पारदीवाला व जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने सुझाव दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट बेंच ने स्पष्ट किया कि ये सभी केस की सुनवाई के दौरान की गई शुरुआती सिफारिशें ही हैं, आधिकारिक आदेश नहीं हैं। सड़क सुरक्षा को लेकर समय-समय पर जारी गाइडलाइंस के अमल पर एमिकस क्यूरी (सीनियर एडवोकेट गौरव अग्रवाल) से बेंच ने सवाल किया। कोर्ट के आदेशों को सिर्फ कागजों तक सीमित किया जा रहा है, उन्हें लागू करने में सरकार फेल हो रही है। ऐसा बेंच ने चेतावनी दी कि अगर यही चलता रहा तो किसी दिन उन्हें कड़ा फैसला लेना पड़ेगा, जो अधिकारियों को पसंद नहीं आएगा।

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