लखनऊ: आचार्य बालकृष्ण जी के जन्मदिवस के अवसर पर नई पीढ़ी फाउंडेशन के कार्यालय में जड़ी-बूटी दिवस मनाया गया। इस अवसर पर “स्वस्थ भारत के निर्माण में वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों की भूमिका एवं प्रासंगिकता” विषय पर ई- परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों, आयुर्वेद और जड़ी-बूटियों के महत्व पर विचार रखे। नई पीढ़ी फाउंडेशन की पहल जड़ी-बूटियों एवं भारतीय पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ इस विषय पर निरंतर संवाद और विमर्श को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

उल्लेखनीय है कि नई पीढ़ी फाउंडेशन पिछले सात वर्षों से लगातार जड़ी-बूटी दिवस का आयोजन करता आ रहा है। कोरोना काल के बाद शुरू हुई इस पहल के तहत प्रत्येक वर्ष जड़ी-बूटियों और उनके महत्व पर केंद्रित विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसी क्रम में ‘नई पीढ़ी’ राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका द्वारा प्रतिवर्ष जड़ी-बूटियों पर आधारित विशेषांक का प्रकाशन भी किया जाता है। इस वर्ष जड़ी-बूटी दिवस के अवसर पर ‘नई पीढ़ी’ के जड़ी-बूटी विशेषांक का लोकार्पण भी किया गया। विशेषांक में जड़ी-बूटियों, भारतीय पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान, आयुर्वेद तथा स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े विषयों को प्रमुखता दी गई है।

परिचर्चा की अध्यक्षता प्रसिद्ध बागवानी विशेषज्ञ एवं उद्यान रत्न एस सी. शुक्ला ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मेघदूत ग्रामोद्योग सेवा संस्थान के संस्थापक एवं मैनेजिंग डॉयरेक्टर विमल शुक्ला रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, झांसी के प्राचार्य प्रोफेसर माखनलाल उपस्थित रहे। विशेष वक्ताओं के रूप में कादंबिनी के पूर्व चीफ कॉपी एडिटर एवं वैकल्पिक चिकित्सा मामलों के जानकार संत समीर तथा एएलवीएएस आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज, मंगलोर, कर्नाटक की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रतिभा ने अपने विचार रखे।
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वक्ताओं ने कहा कि भारत में आयुर्वेद और जड़ी-बूटियों की समृद्ध परंपरा रही है। स्वस्थ भारत के निर्माण के लिए पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़ने तथा औषधीय पौधों के संरक्षण और उनके प्रमाण-आधारित उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन नई पीढ़ी फाउंडेशन के संस्थापक श्री शिवेंद्र प्रकाश द्विवेदी ने किया।
