हैदराबाद : काव्य-धारा साहित्यिक समूह एवं काव्य-धारा प्रकाशन का नौवाँ वार्षिक राष्ट्रीय अधिवेशन 25 जुलाई को भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। इस अधिवेशन की प्रमुख साहित्यकार और कवि अध्यक्षता प्रो. ऋषभ देव शर्मा एवं मुख्य अतिथि अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायर और चित्रकार विज्ञान व्रत रहे है। संपादक मंडल के साहित्यकार सत्य प्रसन्न मंचासीन हुए। यह कार्यक्रम में दो सत्रों में आयोजित किया गया।
प्रथम सत्र के कार्यक्रम का आरंभ मंचासीन विद्वजनों द्वारा दीप प्रज्वलन व नीमा रवि के मधुर कंठ से सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रसिद्ध कवित्री काव्यधारा की महामंत्री वर्षा शर्मा एवं काव्यधारा की संयोजिका गीता अग्रवाल ने किया। काव्य-धारा की अध्यक्षा सुनीता लुल्ला ने सभी मंचस्थ अतिथियों, कवियों एवं स्थानीय प्रबुद्धजनों का स्वागत किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. ऋषभदेव शर्मा, मुख्य अतिथि विज्ञान व्रत को शॉल, माला और स्मृति चिह्न भेंट करके सम्मानित किया गया।

इसी कड़ी में काव्य धारा के संपादक मंडल सत्य प्रसन्न और काव्य-धारा अध्यक्ष सुनीता लुल्ला का भी सम्मान किया गया। अध्यक्षीय उद्बोधन में ऋषभदेव शर्मा ने छोटी रचनाओं की वकालत करते पाठको के दिल में उतरने योग्य सामग्री, मातृभाषा पर जोर दिया। मुख्य अतिथि विज्ञान व्रत ने भी अपनी स्वाभाविक माँ की भाषा को प्राथमिकता दी।
संबंधित खबर-
दो एकल पुस्तकें ‘आस-पास परिहास’ व्यंग और हास्य बैजनाथ सुनहरे की ‘उड़ जाने दो’ ( ग़ज़ल-संग्रह) ताजम्मुल ‘ताज’ फातिमा का भी लोकार्पण किया गया। इसके अलावा काव्य-धारा के नौवें, दसवें साझा-संकलन 2026 के खु़श्बू-ए-सुख़न’ एवं ‘मानसी’ में विभिन्न प्रांतो के प्रसिद्ध कवियों की गजल, नज्म, गीत, दोहे, छंद विधाओं में संकलित हैं, का भी लोकार्पित किया गया।
काव्यधारा प्रकाशन एवं काव्यधारा साहित्यिक समूह हिंदी के क्षेत्र में प्रयासरत लगातार अनेक ‘एकल काव्य संग्रह’ एवं 9 वर्षों से लगातार विभिन्न प्रांतो के कवियों की रचनाओं से ‘साझा संकलन’ के प्रकाशन में उतर रहा है। यह अपने आपमें एक मिसाल है। साझा संकलन के विषय में अपने विचार व्यक्त करते हुए वरिष्ठ कवि सत्य प्रसन्न ने काव्यधारा के अनवरत चलने वाली यात्रा का सबसे परिचय कराया।

प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने अध्यक्षीय वक्तव्य में साझा संकलनों की उपयोगिता और आयोजन की गरिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन साहित्य चेतना के लिए समृद्ध धारक हैं। विशेष अतिथि विज्ञान व्रत ने सभी कवियों के उत्साह का अभिनंदन करते हुए प्रकाशित पुस्तकों और कवियों के साहित्य समर्पण की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
साझा-संकलन एकल पुस्तक में सम्मिलित सभी कवियों को शॉल, माला और स्मृति चिह्न भेंट किए गए। जानी-मानी कवित्री ज्योति नारायण ने काव्यधारा की अध्यक्ष सुनीता लल्ला के साहित्य के क्षेत्र में अनुपम, अद्भुत कार्यों के लिए शॉल, माला पहनाकर सम्मानित किया। नरेश दावर को काव्यधारा में तकनीकी अभूतपूर्व सहयोग एवं नूपुर अग्रवाल की अनुपम पेंटिंग के जरिए पुस्तकों के कवर पृष्ठ का चयन के लिए सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर काव्य-धारा साहित्यिक समूह की अध्यक्ष सुनीता लुल्ला ने नई कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के बारे में बताया और उसका विस्तार किया। उन्होंने मार्गदर्शक प्रो. ऋषभदेव शर्मा, अध्यक्ष सुनीता लुल्ला, सम-अध्यक्ष सत्य प्रसन्न, संरक्षक डॉ ऋता शुक्ला, के. पी. अग्रवाल, महासचिव प्रतिभा गर्ग और रचना चतुर्वेदी संयोजिका, गीता अग्रवाल, जन-सम्पर्क मंत्री वर्षा शर्मा को घोषित किया। प्रथम सत्र का सफल संचालन डॉ. प्रतिभा गर्ग एवं रचना चतुर्वेदी ने किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन सुनीता लुल्ला ने अत्यंत भावुक मन से अभ्यर्थना भाव से प्रस्तुत किया।
द्वितीय सत्र में कवियों की रचनाओं से सभागार गूँज उठा। इस अवसर डॉ. ऋता शुक्ला, रचना चतुर्वेदी, गीता अग्रवाल, विज्ञान व्रत, सुनीता लुल्ला, सत्य प्रसन्न, के पी अग्रवाल, प्रहलाद जोशी, विनोद गिरि अनोखा, आरजू महक, राजीव सिंह ‘नयन’, शहनाज रहमत, एलिजाबेथ कुरियन मोना, बैद्यनाथ सुनहरे, दर्शन सिंह, चंद्रप्रकाश दायमा, ताजमुल्ल ताज फातिमा, वर्षा शर्मा, प्रो. ऋषभदेव शर्मा, प्रतिभा गर्ग, विनीता शर्मा, किरण सिंह और अन्य ने अपनी रचनाओं का सुनाया। काव्यगोष्ठी तालियों की गड़गड़ाहट के साथ संपन्न हुआ।
