नई दिल्ली: NEET पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ-साथ पेपर लीक के चलते मृतक परिजनों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस लेने के लिए केंद्र सरकार सहमत हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने यह जानकारी दी। सीजेपी ने कहा कि केंद्र सरकार ने हमारी मांगों को मान लिया है। इसलिए हम 36 दिनों से जारी आंदोलन वापस ले रहे हैं। 25 जुलाई को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सीजेपी के प्रतिनिधियों के साथ केंद्र सरकार ने बातचीत की।
केंद्र सरकार की तरफ से मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह शामिल हुए। यह बैठक लगभग दो घंटे तक चली। सीजेपी की मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस बैठक के बाद सीजेपी के प्रतिनिधियों और केंद्रीय मंत्रियों ने संयुक्त रूप से मीडिया से बात की। इस मौके पर सीजेपी के प्रतिनिधियों ने कहा कि हमारी तीनों मांगों को केंद्र ने मान लिया है। धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा हमारी मुख्य मांग पहले ही पूरी हो गई है। सरकार ने कहा कि बाकी दो मांगों पर मंगलवार तक लिखित आश्वासन देंगे।
प्रतिनिधियों ने कहा कि धर्मेंद्र का इस्तीफा हमारी पहली जीत है। NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर से केस वापस लेने के लिए केंद्र मान गया है और भविष्य में भी कोई कार्रवाई नहीं होगी। इसकी गारंटी सरकार ने दी है। वहीं, सरकार ने कहा कि NEET पेपर लीक से दुखी होकर आत्महत्या कर चुके 21 छात्रों के परिवारों को जल्द एक्स-ग्रेशिया दिया जाएगा। सीजेपी ने घोषणा की है कि हमारी मांगों को मान लिए जाने के बाद केंद्र सरकार के अनुरोध पर हम आंदोलन वापस ले रहे हैं।
सीजेपी के प्रतिनिधियों से बैठक के बाद जेपी नड्डा ने मीडिया से कहा कि सीजेपी की तीनों मांगों को केंद्र सरकार ने मान लिया है। सीजेपी की मुख्य मांग के अनुसार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। साथ ही NEET पेपर लीक के कारण मृतक छात्रों के परिजनों को मुआवजा देंगे। नियमों के अनुसार एक्स-ग्रेशिया दिया जाएगा। इसके अलावा NEET के खिलाफ लड़ने वाले छात्रों पर देशभर में दर्ज केस वापस ले लेंगे। छात्रों के खिलाफ भविष्य में भी कोई कार्रवाई नहीं होगी।
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ज्ञातव्य है कि NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। इस मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी ने बड़ा प्रदर्शन किया था। सीजेपी के प्रदर्शन के समर्थन में प्रसिद्ध शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आमरण अनशन शुरू किया था।
दूसरी तरफ धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा दिलाने के लिए केंद्र पर दबाव बनाने के मकसद से 20 जुलाई को कॉकरोच पार्टी ने संसद मार्च (चलो संसद) कार्यक्रम किया। चलो संसद कार्यक्रम काफी हिंसक हो गया। सीजेपी के प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने दमन जारी रखा। छात्रों पर अंधाधुंध लाठीचार्ज करने के साथ-साथ टीयर गैस और पेलेट गन का इस्तेमाल किया। पुलिस के हमले में दर्जनों प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हो गए।
ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सरकार की कड़ी आलोचना हुई। प्रदर्शनकारियों पर हमले के विरोध में कांग्रेस के साथ-साथ विपक्षी पार्टियां मैदान में उतर आईं। धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफे की मांग को लेकर चार दिनों से विपक्ष ने संसद को ठप कर दिया था। एक तरफ सीजेपी और दूसरी तरफ विपक्ष से सरकार पर जबरदस्त दबाव बढ़ गया। इसके चलते मजबूरन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
