हैदराबाद (सरिता सुराणा की रिपोर्ट) : “काव्य की धारा – भावों की धुन” विषय पर आधारित जैन साहित्य संगम, तेलंगाना इकाई द्वारा आयोजित पंचम मासिक काव्य गोष्ठी सह राष्ट्रीय कवि सम्मेलन हर्षोल्लास पूर्वक संपन्न हुआ। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता जैन साहित्य संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध कवि जगदीप जैन ‘हर्षदर्शी’ ने की।
तेलंगाना इकाई अध्यक्ष सरिता सुराणा द्वारा नमस्कार महामंत्र से काव्य गोष्ठी का शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात् उपाध्यक्ष एवं कवि अशोक दोशी ‘दिवाकर’ ने स्वरचित सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर मां शारदे का आह्वान किया। इस कवि सम्मेलन में देश भर के विभिन्न प्रांतों से लगभग 25 कवि-कवयित्रियों ने काव्य-गंगा बहाई। उपस्थित समस्त प्रबुद्ध साहित्यकारों ने देशभक्ति, अध्यात्म, सामाजिक सरोकारों और प्रकृति पर आधारित रचनाओं के पाठ से सभी श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कवि सम्मेलन 2 घंटे से अधिक समय तक चला।
इसमें कैलाश जैन ‘तरल’ (उज्जैन), हुकुमचंद कोठारी “असगर” (मुंबई) श्रीमती चंचल जैन (मुम्बई) अनिल पंचाल, श्रीमती कनक पारख (विशाखापट्टनम), अरुण जैन (फरीदाबाद), सुश्री पिंकी जैन (बाड़मेर), श्रीमती ललिता जोगड़ (मुंबई), श्रीमती हिम्मत चौरड़िया (कोलकाता), श्रीमती हर्षलता दुधोड़िया (हैदराबाद), पदमचंद गाँधी (भोपाल), श्रीमती चंदा-अजय जैन (मंदसौर), डॉ. राजेश कुमार जैन, जयंती लाल जैन (मुंबई), सुश्री परिधि भंडारी, अर्जुन लाल शाह, डॉ. सी. एम.मेहता (जावरा), श्रीमती कुसुम सुराणा (मुंबई), पवन संकलेचा (बाड़मेर), भव्य नाहर, राजा जैन (कोलकाता), श्रीमती नीलम जैन (बाड़मेर) और श्रीमती प्रतिमा पुलक (बाड़मेर) ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। अध्यक्षीय काव्य पाठ से पहले कार्यक्रम संचालक सरिता सुराणा ने अपनी रचना प्रस्तुत की।
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अंत में कार्यक्रम अध्यक्ष कविवर जगदीप जैन ‘हर्षदर्शी’ (उदयपुर) ने माँ के महात्म्य पर काव्यपाठ किया। आपने सभी सहभागियों और आयोजन समिति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “साहित्य साधना एवं समाज आराधना” के संकल्प के साथ हम आगे भी ऐसे विविध विषयक आयोजन करते रहेंगे। कार्यक्रम का सुंदर संचालन जैन साहित्य संगम तेलंगाना इकाई की अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कवयित्री सरिता सुराणा ने किया। अशोक दोशी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
