[नोट- तेलंगाना में नए स्थापित ‘तेलंगाना रक्षण सेना’ (टीआरएस) पार्टी को केंद्रीय चुनाव आयोग (ईसी) ने झटका दिया है। पार्टी के नाम पर जनता से भारी संख्या में आपत्तियां आने के कारण नाम बदलने या वैकल्पिक नाम सुझाने का आदेश ईसी ने कविता को दिया है। हालांकि, कविता ने स्पष्ट किया है कि नाम बदलने का कोई सवाल ही नहीं है और इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हूं ।
ईसी की आपत्ति: कल्वकुंटला कविता ने ‘तेलंगाना रक्षण सेना’ (टीआरएस) नाम से नई पार्टी रजिस्टर कराने के लिए आवेदन किया था। लेकिन, पुरानी टीआरएस (बीआरएस) के नाम से मिलता-जुलता होने के कारण इसे बदलने का सुझाव ईसी ने दिया है।
कविता की प्रतिक्रिया: ईसी द्वारा उठाई गई आपत्तियों का कविता ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि नए नाम नहीं दिए (बदले) जाएंगे और अपने वकीलों के जरिए कानूनी रूप से लड़ेंगी।]
हैदराबाद: तेलंगाना की राजनीति में एक बार फिर कल्वकुंटला कविता की पार्टी का नाम चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक पार्टी का नाम सिर्फ पहचान नहीं होता, बल्कि उस पार्टी का इतिहास, विचारधारा, आंदोलन और नेतृत्व का प्रतीक होता है। ऐसे हालात में कविता द्वारा स्थापित ‘तेलंगाना रक्षण सेना’ (टीआरएस) पार्टी के नाम पर अनिश्चितता होने से इसका असर राजनीतिक रूप से भी पड़ सकता है। बीआरएस पार्टी में अपने पिता केसीआर से सीधे मतभेद कर कविता ने नई पार्टी स्थापित की थी। हालांकि, उनकी पार्टी का जश्न तीन दिन की बात ही लग रही है। उनके द्वारा स्थापित ‘तेलंगाना रक्षण सेना’ पर बड़े पैमाने पर आपत्तियां आने से पार्टी का भविष्य अंधकार में पड़ गया है। आखिरकार क्या कविता को पार्टी का नाम बदलना ही पड़ेगा? इस पर जोरों की चर्चा चल रही है।
बीआरएस से बाहर आने के बाद कविता ने 25 अप्रैल को नई पार्टी की घोषणा की। मुनीराबाद स्थापना समारोह में इसे ‘तेलंगाना राष्ट्र सेना’ के नाम से घोषित किया और झंडा का अनावरण भी किया। इसके बाद के घटनाक्रम में 28 अप्रैल को चुनाव आयोग ने कविता की पार्टी के नाम को ‘तेलंगाना रक्षण सेना’ (टीआरएस) के रूप में अस्थायी रूप से मान्यता दी। सिर्फ तीन दिनों में पार्टी का नाम दो तरह से लोगों तक पहुंच गया। इससे कविता के समर्थकों में पहले से ही बेचैनी शुरू हो गई थी। इसके तुरंत बाद चुनाव आयोग ने ‘तेलंगाना रक्षण सेना’ पर राय मांगी।
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नाम रजिस्टर कराते समय पहले से मौजूद पार्टियों के नामों से मिलता-जुलता नहीं होना चाहिए। मतदाताओं में भ्रम पैदा होने की संभावना न हो, इसके लिए कानूनी नियमों के अनुसार नाम बदलना होगा, ऐसी शर्तें चुनाव आयोग ने रखी हैं। इन बातों की जांच के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। लेकिन कविता ने टीआरए नाम के साथ ही पार्टी की घोषणा कर दी थी। इसलिए राज्यभर से 1000 से ज्यादा आपत्तियां आईं। पड़ोसी राज्य से भी कई लोगों ने आपत्ति जताई। इसके चलते चुनाव आयोग ने ताजा आदेश जारी कर कविता को पार्टी का नाम बदलने को कहा है। ईसी ने स्पष्ट किया कि 15 दिनों के अंदर तीन नाम भेजने का सुझाव दिया, वरना पार्टी का आवेदन रद्द करना पड़ेगा।
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कविता ने घोषणा की कि अगर प्रस्तावित नाम को चुनाव आयोग मंजूरी नहीं देता तो मैं इसे अदालत में चुनौती दूंगी। उन्होंने साफ कहा कि नए नाम नहीं दिए जाएंगे। हालांकि कविता के कोर्ट जाने से ही क्या पार्टी का नाम वैसे ही जारी रखने के पक्ष में फैसला आएगा? इसको लेकर संदेह जताए जा रहे हैं। इन घटनाक्रमों के बीच कविता की राजनीतिक भूमिका पर भी चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी का नाम घोषित कर उन्होंने हाल ही में राज्यभर में पार्टी के झंडे का अनावरण करना शुरू किया है। अधिकांश जिलों में यह कार्यक्रम पहले ही पूरे हो चुके हैं। इस पर चर्चा शुरू हो गई है कि ऐसे में अगर अदालत भी कविता की याचिका खारिज कर देती है तो उनका भविष्य क्या होगा। अगर नई पार्टी का नाम घोषित करना पड़ा तो वे कौन सा नाम होगा? ईसी क्या नियम लगाएगी? इसे लेकर सबमें उत्सुकता है। इस पर पार्टी के नेताओं में चर्चा चल रही है अगर नाम बदलना पड़ा तो झंडा और रंग कैसे होंगा।
