हैदराबाद: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत वोटर गणना फॉर्म को तेलुगु समेत अन्य भाषाओं में क्यों वितरित नहीं किया जा रहा है, इस पर स्पष्टीकरण देने के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग (ईसी) को आदेश जारी किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वोट का अधिकार संविधान से मिला है और सिर्फ भाषा के कारण कोई भी अपने अधिकार से वंचित नहीं होना चाहिए। ‘SIR’ फॉर्म को तेलुगु में उपलब्ध कराए बिना सिर्फ अंग्रेजी वाले फॉर्म बांटने को चुनौती देते हुए करीमनगर के सामाजिक कार्यकर्ता एम. मुजीब अयूब ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
इस याचिका पर जस्टिस पुल्ला कार्तिक ने गुरुवार को सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी. रघुनाथ ने दलील देते हुए कहा कि यह सभी जानते हैं कि राज्य के विभिन्न जिलों में रहने वाले मतदाताओं की मातृभाषा तेलुगु नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रवासी मजदूर, पेशेवर, छात्र, व्यापारी बड़ी संख्या में मतदाता हैं। उन्होंने इसे अल्पसंख्यकों को मतदाता सूची से हटाने की साजिश बताया।
ईसी की ओर से वकील ने दलील देते हुए कहा कि प्रशासनिक सुविधा को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया गया है। उन्होंने बताया कि सभी पार्टियों से बात करने के बाद GHMC में अंग्रेजी में और राज्यभर में तेलुगु में बांटने का फैसला किया गया है। राज्य में करीब 3.5 करोड़ मतदाताओं के संबंध में SIR प्रक्रिया जारी है। तेलुगु फॉर्म की छपाई पूरी हो चुकी है, सभी भाषाओं में छापने पर भारी खर्च के साथ अन्य समस्याएं हैं। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन में अंग्रेजी, तेलुगु, उर्दू में उपलब्ध हैं।
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उन्होंने कहा कि बूथ लेवल एन्यूमरेटर घर-घर जाने के समय अंग्रेजी फॉर्म भी ले जा रहे हैं और ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं। दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि ऑनलाइन उपलब्ध होने की दलील सही नहीं है और तेलुगु समेत अन्य भाषाओं में फॉर्म बांटने पर स्पष्टीकरण देने को कहते हुए सुनवाई एक हफ्ते के लिए स्थगित कर दी है।
