साहित्य सेवा समिति की मासिक गोष्ठी में इस विषय पर इन बुद्धिजीवियों ने दिया यह सुझाव, जरूर पढ़ें खबर

हैदराबाद : साहित्य सेवा समिति की 135 वीं मासिक गोष्ठी 10 मई को राष्ट्रीय स्तर पर गूगल मीट पर ऑनलाइन सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इसमें हैदराबाद, जयपुर, नोएडा, पुरनपुर, सीकर, और अन्य राज्यों के साहित्यकार, लेखक और कवि उपस्थित रहे हैं। गोष्ठी का प्रारंभ तृप्ति मिश्रा की मधुर कंठ से स्वरचित सरस्वती वंदना से हुआ। समिति के अध्यक्ष डॉ. दया कृष्ण गोयल की उपस्थित में यह गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी का आयोजन दो सत्रों में हुआ। प्रथम सत्र में “आणविक शस्त्रों के मध्य सिसकती मानवता और आम आदमी!” विषय पर रहा है।

अध्यक्ष गोयल ने सभी उपस्थित साहित्यकारों का स्वागत करते हुए विषय से अवगत कराते हुए कहा कि एशिया की धरती को ही आणविक शस्त्रों की त्रासदी से गुजरना पड़ा है। इससे पूर्व जापान और अब इजरायल व ईरान युद्ध की विश्व विभीषिका से गुजर रहे हैं। उसका प्रभाव आम आदमी पर पड़ रहा है। युगो-युगो से यह धरती युद्ध की विभीषिका से गुजर रही है। इसी विषय के प्रवेश में वरिष्ठ विद्वान गिरधारी लाल गुप्ता ने भली भांति से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने हिरोशिमा नागासाकी पर हुए परमाणु बम का उल्लेख करते हुए भयंकर परिणामों का स्मरण कराया। अहंकार और विस्तारवाद युद्ध का सबसे बड़ा कारण है। आपका कहना था कि भारत हमेशा शांति मार्ग चाहता है। वसुधैव कुटुंबकम की भावना से ओतप्रोत भारत को भी इसके भयंकर परिणामों का असर पड़ता रहा है।

विषय की प्रमुख प्रवक्ता विदुषी साहित्यकार डॉ. अर्चना पांडे जो कि स्वयं डीआरडीओ में कार्यरत हैं। विस्तृत रूप से विषय पर चर्चा करते हुए परमाणु बम का आविष्कार कैसे हुआ? पुरातन से आधुनिक तक हथियारों का विकास किन-किन चरणों से गुजरा आदि जानकारी बहुत ही विस्तृत रूप से दी। आपने कहा आज विश्व बारूद की ढेर पर बैठा है और आज इतने भयंकर आणविक हथियार हैं कि पूरी पृथ्वी नष्ट हो सकती है। युद्ध का कारण 5 देशों के पास परमाणु बम का होना और दूसरे देशों को परमाणु बम बनाने से रोकना समझ में नहीं आ रहा है। फिर भी अपनी सुरक्षा के लिए हर राष्ट्र परमाणु हथियार रखना चाहता है। उन्होंने बताया कि भारत के पास ऐसी मिसाइलें हैं, जो बहुत दूर तक मार सकते हैं। हम काफी सुरक्षित हैं।

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इसके उपरांत विषय चर्चा में दर्शन सिंह, बैद्यनाथ सुनहरे, सुनीता लुल्ला, संगीता सिंघल, उमेश यादव, गीता अग्रवाल आदि ने भी अपने विचार रखें। इसका सारांश यही था कि इन स्थितियों से कोई भी बचा नहीं जा सकता। हमें इनका सामना करना ही पड़ेगा। युद्ध झेलने पड़ेंगे। बस संपन्न वर्ग ही आम आदमी की सहायता के लिए आगे आए ताकि देश का दर्द कम हो सके।

द्वितीय सत्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। काव्य गोष्ठी में मातृ दिवस पर गीत, कविताएं, दोहे, गजल, भोजपुरी गीत आदि की महक रही हैं । इसमें डॉ दया कृष्ण गोयल, सुनीता लुल्ला, गीता अग्रवाल, डॉ. अर्चना पांडे, तृप्ति मिश्रा, उमेश सिंह यादव, के पी अग्रवाल, सी पी दायमा, बैजनाथ सुनहरे, दर्शन सिंह, सुनीला गुप्ता, संगीता श्रीवास्तव, संगीता सिंघल, आशा अग्रवाल, भारती अग्रवाल, साधना गर्ग आदि की रचनाओं ने सभी को भाव विभोर कर दिया। मातृ दिवस के गीत और कविताएं होने के कारण बहुत ही हृदय स्पर्शी रहे हैं। इस सुनकर सब की आंखें नम हो गई।

वर्षा शर्मा एवं गिरधारी लाल गुप्ता की गरिमामयी उपस्थित रही। डॉ. दया कृष्ण गोयल ने अध्यक्षीय भाषण में गोष्ठी की सफलता पर सभी को बधाई दी और काव्य के निरंतर बढ़ते हुए स्तर पर प्रसन्नता जाहिर की। गोष्ठी का संचालन एवं तकनीकी सहयोग गीता अग्रवाल द्वारा सफल रूप से किया गया। के. पी. अग्रवाल के धन्यवाद ज्ञापन के द्वारा गोष्ठी का समापन किया गया।

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