महिला अधिकार लोकतंत्र को और अधिक मजबूत, संतुलित और समावेशी बनाते हैं : डॉ. दिवाकर
कौशाम्बी (अमरदीप दिवाकर की रिपोर्ट) : 13 अप्रैल को कौशाम्बी जिला (उत्तर प्रदेश) विधिक सेवा प्राधिकरण कौशाम्बी के तत्वावधान में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय जानकीपुर चायल में यौन अपराधों से बच्चों का सरंक्षण अधिनियम-2012, शोषण के विरुद्ध अधिकार, लैंगिक समानता, नशा मुक्त भारत एवं बाल विवाह मुक्त भारत अभियान विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर के मुख्य वक्ता डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने महिलाओं के अधिकार पर बात करते हुए कहा कि महिला अधिकार वे मानवाधिकार हैं जिसमें हिंसा और भेदभाव से मुक्त जीवन जीने का अधिकार है। साथ ही उच्चतम स्तर की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का आनंद लेने का अधिकार, शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार, संपत्ति रखने का अधिकार शामिल है। इसके अलावा मतदान करने का अधिकार, निःशुल्क विधिक सहायता का अधिकार, रात में गिरफ्तार न होने का अधिकार, पीछा किए जाने के विरुद्ध अधिकार, अभद्र चित्रण के विरुद्ध अधिकार, मातृत्व अवकाश का अधिकार और समान वेतन अर्जित करने का अधिकार शामिल है।

बाल अधिकार और शोषण के विरुद्ध बालकों के अधिकारों के बारे में विस्तार से बताते हुए दिवाकर ने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अधिवेशन, किशोर न्याय अधिनियम, पॉक्सो अधिनियम और राष्ट्रीय बाल नीति आदि के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र के प्रत्येक बच्चे को बालक माना गया है। बच्चों को मारना, चिढ़ाना, मजाक करना, मजदूरी करवाना, उनके साथ छल करना, उनकी बात अनसुनी करना, अश्लील चित्र या किताब दिखाना, भद्दे इशारे करना, गाली-गलौच करना, डराना-धमकाना, तंग करना व बलात्कार आदि जैसे कृत्य अपराध की श्रेणी में आते हैं।
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मुख्य वक्ता ने कहा कि बाल अधिकारों के हनन को रोकने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 और 24 में शोषण के विरूद्ध अधिकारों का प्रावधान हैं। अनुच्छेद 45 में बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है। बाल मज़दूरी (निषेध एवं नियमन) अधिनियम, 1986 के मुताबिक 14 साल से कम उम्र के किसी बच्चे को किसी कारखाने या खदान में काम नहीं लगाया जा सकता। लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो एक्ट) के तहत, बालक के लिए मित्रतापूर्ण वातावरण बनाए रखने का प्रावधान है।

साथ ही हमारे देश में लड़कियों और लड़कों के बीच न केवल घरों और समुदायों में है अपितु हर जगह लिंग असमानता दिखाई देती है। लैंगिक असमानता दूर करने के लिए महिलाओं, बच्चों और थर्ड जेंडर लोगों को शिक्षा और कौशल विकास के साथ-साथ भयमुक्त माहौल अर्थात सुरक्षित वातावरण प्रदान करना होगा साथ ही रोजगार के क्षेत्र में लैंगिक असमानता को दूर करना होगा तथा सभी क्षेत्रों में जेंडर आधारित भेदभाव को समाप्त कर लैंगिक समानता को बढ़ावा देना होगा। नायब तहसीलदार संजय कुमार ने कहा कि बाल अधिकारों के हनन व बच्चों के शोषण से उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से गहरी चोट पहुंचती है और उनका स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास भी प्रभावित होता है।
पी एल वी ममता दिवाकर ने कहा कि महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 जिसे पॉश एक्ट भी कहा जाता है, भारत में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने, प्रतिबंधित करने और उसका समाधान करने के लिए एक सशक्त कानूनी ढांचा है। यह महिलाओं को प्रोटेक्ट करता है। यह कानून सरकारी और निजी सभी प्रकार के संगठनों और संस्थानों में शिकायत समितियों के गठन, जागरूकता कार्यक्रम चलाने और कार्य करने हेतु सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने पर बल देता है, जिससे यौन उत्पीड़न से पीड़ित महिलाएँ भयमुक्त होकर शिकायत कर सकें और न्याय पा सकें।
साथ ही राष्ट्रीय, राज्य और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा प्रदत्त सेवाओं आदि के बारे में विस्तार से बताया। यदि किसी बालक के अधिकारों का उल्लंघन होता है तो हेल्पलाइन नंबर्स 1090, 1098, 181 आदि पर संपर्क कर सकते हैं या फिर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय द्वारा नियुक्त पीएलवी के जरिए शिकायत करें या विधिक सेवा प्राधिकरण के टोल फ्री नंबर 15100 पर शिकायत दर्ज कराएं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदान की जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता, उत्तर प्रदेश पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना, आपदाग्रस्त लोगों की मदद आदि से संबंधित प्रदान की जाने वाली सेवाओं के बारे में भी विस्तार से बताया।
महिला एवं बाल कल्याण विभाग कौशाम्बी से सविता यादव ने विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, स्पांसरशिप योजना, निराश्रित महिला पेंशन योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना आदि के बारे जानकारी प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन पीएलवी अमरदीप दिवाकर ने तथा धन्यवाद ज्ञापन विद्यालय की अधीक्षिका ममता अंजली ने किया। इस अवसर पर हल्का लेखपाल बीरेंद्र सिंह विद्यालय की शिक्षिकाएं शालिनी मिश्रा, शाहिदा बीबी, आंशिक कुशवाहा, मीना पटेल, नीलू यादव लेखाकार रोहिणी सोनकर एवं पैरा लीगल वालंटियर डॉ नरेंद्र दिवाकर, ममता दिवाकर एवं अमरदीप दिवाकर सहित छात्राएं भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
