साहित्य सेवा समिति की मासिक गोष्ठी का सफल आयोजन, इन वक्ताओं ने इस विषय पर प्रकाश डाला

हैदराबाद : साहित्य सेवा समिति ने अपनी 133वीं मासिक गोष्ठी ऑनलाइन प्रारूप में 1 मार्च को आयोजित की। साहित्य सेवा समिति के अध्यक्ष डॉ दयाकृष्ण गोयल व महामंत्री ममता जायसवाल की उपस्थिति में इस गोष्ठी को दो सत्रों में क्रियान्वित किया गया। प्रथम सत्र गोष्ठी में विषय चर्चा व द्वितीय सत्र गोष्ठी में स्वरचित काव्य रचनाओं का पाठ किया गया। गोष्ठी का प्रारंभ नीमा रवि के मधुर सरस्वती वंदना के द्वारा किया गया।

तदुपरांत डॉ दया कृष्ण गोयल ने होली संदर्भित स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। होली उत्सव को दृष्टि में रखते हुए गोष्ठी में “हिंदी साहित्य और फिल्मी गीतों में होली के रंग” विषय पर प्रवेश देते हुए ममता जायसवाल ने कहा यह विषय साहित्य संदर्भ में मध्य युग व छायावादी युग में अपनी विभिन्न पूर्णता से रहा है, परंतु इसका आकर्षित स्वरूप हमें लोक गीतों और लोक साहित्य में बृहत रूप में पाया जाता है। फिल्मी गीतों में होली के गीत सदैव प्रासंगिक रहे हैं। 1940 से प्रारंभ हुआ यह फिल्मी गीतों का दौर अब तक अपने प्रसिद्ध गीतों के साथ अनवरत चल रहा है।

उज्जैन के प्रमुख स्तंभकार शशांक दुबे ने प्रमुख प्रवक्ता के रूप में विषय पर प्रकाश डालते हुए यह बात सिद्ध किया कि गीत हमारे जन मन में उतर जाते हैं। वही संवाद कभी-कभी हम पर प्रभाव डाल सकते हैं। साहित्य हो या फिल्म दोनों में ही संवाद व पद्य प्रस्तुति महत्वपूर्ण होती है। सी. पी. दायमा ने विषय चर्चा को आगे करते हुए यह विचार रखा कि फिल्मी साहित्य व मान्य साहित्य में भिन्नता गीतों के संदर्भ में लगभग शून्य सी दिखाई देती है। सुनीता लुल्ला, दर्शन सिंह, जी. परमेश्वरन, गीता अग्रवाल, प्रहलाद जोशी आदि सभी ने होली के संदर्भ में फिल्मी गीतों की वर्चस्व को स्वीकार किया।

यह भी पढ़ें-

प्रथम सत्र का संचालन ममता जायसवाल और द्वितीय सत्र के संचालन गीता अग्रवाल ने किया। दोनों ने खूबसूरत से संचालन करते हुए उपस्थित लेखक और कवि द्वारा प्रस्तुत विविध लोकगीतों, श्रृंगार गीतों, गजलों, व्यंग्यों की प्रस्तुति का आनंद उठाया। इस अवसर पर सी. पी. दायमा, सत्य प्रसन्न, बैजनाथ सुनहरे, प्रह्लाद जोशी, संगीता श्रीवास्तव, उमेश चंद यादव, दर्शन सिंह, गीता अग्रवाल, ममता जायसवाल, सुनीता लुल्ला, डॉ दया कृष्ण गोयल आदि ने काव्य पाठ किया। साथ ही गिरधारी लाल गुप्ता, जी. परमेश्वर, नीमा रवि, के पी अग्रवाल की उपस्थिति कार्यक्रम में बनी रही। डॉ दया कृष्ण गोयल ने विषय की प्रस्तुति व कवियों की प्रस्तुति का विषय प्रासंगिक होने पर साधुवाद दिया। के पी अग्रवाल के धन्यवाद ज्ञापन के उपरांत सभा समाप्त हो गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

Recent Comments

Archives

Categories

Meta

'तेलंगाना समाचार' में आपके विज्ञापन के लिए संपर्क करें

X