हैदराबाद : कादम्बिनी क्लब हैदराबाद के तत्वावधान में क्लब की 409वीं मासिक गोष्ठी का आयोजन प्रो. ऋषभदेव शर्मा (साहित्यकार, कवि, समीक्षक, पत्रकार) की अध्यक्षता में ऑनलाईन के माध्यम से 16 अगस्त को किया गया। प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए मीना मुथा (कार्यकारी अध्यक्षा) एवं प्रवीण प्रणव (महासचिव) ने बताया कि इस माह की मासिक गोष्ठी संपूर्णतः राष्ट्र को समर्पित रहीं।
शुभ्रा मोहतों ने निराला रचित सरस्वती वंदना की सुमधुर स्वर में प्रस्तुति दीं। मीना मुथा ने बताया कि संस्थापिका स्व डॉ अहिल्या मिश्र के नेतृत्व में अपनी 33 वें वर्ष की साहित्यिक यात्रा में गतिमान है। युवा पीढ़ी को नियमित रूप से अनुभवी, प्रबुद्ध साहित्यकारों का मार्गदर्शन मिल रहा है। उनके लेखन को परखा और तराशा जाता है। पठन पाठन के लिए प्रेरित किया जाता है। 80वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में पटल पर उपस्थित गणमान्य रचनाकारों ने देशप्रेम से ओतप्रोत अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी और भारत देश सदा हराभरा, शांति का दूत बनकर दुनिया को राह दिखाएं यह कामना की।

राष्ट्र को समर्पित काव्यपाठ में भावना पुरोहित गजानन पाँडे, इंदु सिंह, रचना चतुर्वेदी, मीरा ठाकुर, सुषमा त्रिपाठी, मधु भटनागर, डॉ निशिकुमारी (चंडीगढ़ ), डॉ रक्षा मेहता, प्रियंका वाजपेयी पाँडे, विनोद गिरी अनोखा, दर्शन सिंह, धीरेंद्र कुमार झा ‘धीरू’, मोनिका भट्ट, डॉ बी. बालाजी, वर्षा शर्मा, जयप्रकाश नागला, चंद्रप्रकाश दायमा, सरला प्रकाश भूतोडिया, सुनीता लुल्ला, रेखाअग्रवाल, आर्या झा, शिल्पी भटनागर, हर्षलता दुधोडिया, डॉ सुरभि दत्त, अंशुश्री सक्सेना, डॉ आशा मिश्रा ‘मुक्ता’, प्रवीण प्रणव, तृप्ति मिश्रा, मीना मुथा, डॉ सीमा मिश्रा, भगवती अग्रवाल आदि ने भाग लिया।
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श्रुतिकांत भारती ने कहा कि विगत 80 वर्षों में देश ने काफी उपाधियाँ प्राप्त की है, आगे भविष्य की डोर नवयुवकों के हाथ में है। डॉ सुमनलता ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत माता की रक्षा की जिम्मेदारी केवल जवानों की नहीं है, हम सबका भी कर्तव्य है देश को सर्वांगीण विकास की ओर ले जाने में सहयोग करें। डॉ मदनदेवी पोकरणा ने कहा कि डॉ अहिल्या मिश्र के मार्गदर्शन में ही मैं आगे बढ़ी, पढ़ाई पूर्ण की। मुझे उनके प्रति बहुत सम्मान है। ममता सक्सेना, दीपक दीक्षित, दीपक कुमार दीक्षित, डॉ सुपर्णी मुखर्जी, शेखर त्रिपाठी, अलका चौधरी, प्रदीप दत्त, कृष्ण मोहन, मोहिनी गुप्ता, के राजन्ना (तेलंगाना समाचार), डॉ अर्चना झा, सरिता दीक्षित की पटल पर उपस्थिति रही।
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गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे प्रो ऋषभदेव शर्मा ने अध्यक्षीय टीप्पणी में कहा कि आज का अवसर बहुत ही महत्त्वपूर्ण अवसर था। कल ही 15 अगस्त संपूर्ण देशभर में पूरे देश भक्ति के साथ मनाया गया। आज वहीं रंग आप सभी की रचनाओं में प्रस्फुटित हुआ है। जब हम विषय निर्धारित करते हैं तो विषयबद्ध लेखन सरल नहीं होता। सब प्रकार की रचनाओं का यह मंच है। रचनाकारों को स्वयं मूल्यांकन करना है अपनी रचना का। पठन-पाठन की आदत डालें क्योंकि जितना अधिक पढ़ोगे उतना ही आपका लेखन और निखरेगा। सभी की रचनाओं में देशभक्ति का भाव नजर आ रहा था। रचना चाहे पुरानी क्यों न हो, दिल को छू जाएं यह बात उसमें हों।
प्रो. ऋषभजी ने लगभग सभी रचनाकारों का उल्लेख करते हुए सभी की रचनाओं पर संक्षिप्त में अपना मार्गदर्शन दिया। अध्यक्षीय काव्यपाठ के अंतर्गत उनकी पांक्तयाँ “बड़े मियाँ यह लोकतंत्र है, धौंस नहीं चलने वाली, आश्वासन के ठंडे जल में, दाल नहीं गलने वाली।’ सभी के दिलों को छू गयी। “सहसा बादल फट गया, जल बरसा घनघोर, इसी प्रलय की राह में, रोए थे क्या मोर!” आदि दोहे प्रस्तुत किए। अपनी बात को विराम देते हुए वे देश के नौजवानों के प्रति भाव व्यक्त किया कि युवा पीढ़ी तन मन से समर्पित होकर देश-संस्कृति-साहित्य के लिए लगन से आगे बढ़े। डॉ आशा मिश्र व प्रवीण प्रणव ने तकनीकी सहयोग दिया। चंद्रप्रकाश दायमा ने आभार व्यक्त किया। मीना मुथा ने गोष्ठी का संचालन किया।
