विशेष : अंबेडकर की जयंती और उनके अनमोल विचार

आज डॉ भीमराव अंबेडकर की 131 जयंती है। डॉ भीमराव अंबेडकर को डॉ बाबा साहेब अम्बेडकर के नाम से भी जाना जाता है। अंबेडकर जयंती हर साल 14 अप्रैल को एक पर्व के रूप में भारत समेत पूरे विश्व में मनाया जाता है। इस दिन सभी भारतीय राज्यों में सार्वजनिक अवकाश के रूप में घोषित किया गया।

इस दिन को ‘समानता दिवस’ और ‘ज्ञान दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है। क्योंकि उन्होंने जीवन भर समानता के लिए संघर्ष किया। ऐसे महान अम्बेडकर को समानता और ज्ञान के प्रतीक माना जाता है। अम्बेडकर को विश्व भर में उनके मानवाधिकार आंदोलन संविधान निर्माता और उनकी प्रकांड विद्वता के लिए जाने जाते हैं। आज का दिन अंबेडकर के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है।

डॉ भीमराव रामजी अंबेडकर को भारतीय संविधान के पिता के रूप में सम्मानित किया गया। क्योंकि उनकी अध्यक्षता में ही संविधान सभा ने दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान तैयार किया था। अंबेडकर जयंती को मनाने के पीछे का कारण जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न जैसी सामाजिक बुराइयों से लड़ने में न्यायविद के समर्पण को याद करना है। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने एक ऐसे भारत की कल्पना की जहां सभी नागरिकों को कानून के तहत समान माना जाए और उन्होंने ब्रिटिश शासन से भारत की आजादी के लिए अभियान भी चलाया था।

डॉ बी आर अम्बेडकर की पहली जयंती सदाशिव रणपिसे ने 14 अप्रैल 1928 में पुणे नगर में मनाई थी। रणपिसे अम्बेडकर के अनुयायी थे। उन्होंने अम्बेडकर जयंती की प्रथा शुरू की। भीम जयन्ती के अवसरों पर बाबा साहेब की प्रतिमा को हाथी के अम्बारी में रखकर रथ से ऊँट के उपर कई रैलियां निकाली थी। अम्बेडकर के जन्मदिन पर हर साल उनके लखों-करोड़ों लोग उनके जन्मस्थल भीम जन्मभूमि महू (मध्य प्रदेश), बौद्ध धम्म दीक्षास्थल (दीक्षाभूमि, नागपुर) उनके समाधी स्थल चैत्य भूमि (मुंबई) जैसे कई स्थानिय जगहों पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्रित होते हैं। सरकारी कार्यलयों और बौद्ध-विहारों में भी आम्बेडकर की जयन्ती मनाई जाती है। विश्व के 100 से अधिक देशों में अम्बेडकर जयन्ती मनाई जाती है।

अंबेडकर की जयंती के दिन सार्वजनिक अवकाश रहता है। भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री और अन्य पार्टियों के नेता जयंती कार्यक्रम में भाग लेते हैं। सार्वजनिक जगहों पर स्थापित अंबेडकर मूर्तियों पर लोग उन्हे पुष्पमाला पहनाकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। पूरे देश में गांव, नगर तथा छोटे-बड़े शहरों में अंबेडकर जयन्ती मनायी जाती है। आंबेडकर के जन्मदिवस उत्सव के लिये विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाते है। मुख्य रूप से चित्रकारिता, सामान्य ज्ञान प्रश्न-उत्तर प्रतियोगिता, चर्चा, नृत्य, निबंध लेखन, परिचर्चा, खेल प्रतियोगिता और नाटक आयोजित किये जाते है। भारत के हर राज्य में, राज्य के प्रत्येक जनपद में और जनपद के लाखों गाँवों में मनाई जाती हैं। सौ से अधिक देशों में हर साल डॉ अंबेडकर जी की जयन्ती मनाई जाती हैं।

अंबेडकर को बचपन से ही उन्हें आर्थिक और सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। स्कूल में छुआछूत और जाति-पाति का भेदभाव झेलना पड़ा। विषम परिस्थितियों के बाद भी अंबेडकर ने अपनी पढ़ाई पूरी की। ये उनकी काबलियत और मेहनत का ही परिणाम है कि अंबेडकर ने 32 डिग्री हासिल की। विदेश से डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद भारत में दलित समाज के उत्थान के लिए काम करना शुरू किया। संविधान सभा के अध्यक्ष बने और आजादी के बाद भारत के संविधान के निर्माण में अभूतपूर्व योगदान दिया। जीवन के हर पड़ाव पर संघर्षों को पार करते हुए उनकी सफलता हर किसी के लिए प्रेरणा है।

अंबेडकर की जयंती पर उनके अनमोल विचारों को जानते हैं। अंबेडकर ने कहा है- मैं ऐसे धर्म को मानता हूं जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है। यदि मुझे लगा कि संविधान का दुरुपयोग किया जा रहा है, तो मैं इसे सबसे पहले जलाऊंगा। जो व्यक्ति अपनी मौत को हमेशा याद रखता है, वह सदा अच्छे कार्य में लगा रहता है। अपने भाग्य के बजाए अपनी मजबूती पर विश्वास करो। जीवन लंबा होने के बजाए महान होना चाहिए। जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता नहीं हासिल कर लेते, कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है वो आपके लिए बेईमानी है। समानता एक कल्पना हो सकती है, लेकिन फिर भी इसे एक गवर्निंग सिद्धांत रूप में स्वीकार करना होगा। जो व्यक्ति अपनी मौत को हमेशा याद रखता है, वह सदा अच्छे कार्य में लगा रहता है। शिक्षित बनो, संगठित रहो और उत्तेजित बनो। धर्म मनुष्य के लिए है न कि मनुष्य धर्म के लिए। एक महान आदमी एक प्रतिष्ठित आदमी से इस तरह से अलग होता है कि वह समाज का नौकर बनने को तैयार रहता है।वे इतिहास नहीं बना सकते जो इतिहास भूल जाते है। (एजेंसियां)

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