नई दिल्ली : 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 14 अगस्त को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए अहम टिप्पणी की। इस दौरान राष्ट्रपति ने कहा कि आतंकवाद को पनाह देने वाले देश के साथ सिंधु जल समझौते को रद्द करना एक निर्णायक कदम है।

उन्होंने आतंकवादियों को पनाह देने वालों को चेतावनी भी दी। साथ ही कहा कि आतंकवादी चाहे जहां भी छिपे हों, उन्हें परिणाम भुगतने होंगे और ऑपरेशन सिंदूर के जरिए सशस्त्र बलों द्वारा दिखाए गए शौर्य को याद किया। राष्ट्रपति ने कहा कि नक्सलियों का उन्मूलन देश की बड़ी उपलब्धि है। बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद कम हुआ है और सांस्कृतिक रूप से बड़े बदलाव आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में अनिश्चितता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था विकास कर रही है।
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पिछले दस वर्षों में देश में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। उनकी इच्छा है कि आर्थिक परेशानियों के कारण कोई भी न्याय से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि गरीबों को भी न्याय मिलना चाहिए। न्यायपालिका में हर किसी को इस बात पर विचार करना चाहिए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कामना की कि पूरा भारत राष्ट्रीय रक्षा, आंतरिक सुरक्षा और व्यापक विकास की दिशा में एकजुट होकर आगे बढ़े।
