नई दिल्ली: “दलित और आदिवासी समुदायों के अधिकारों तथा आत्मसम्मान की रक्षा के लिए सभी को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। समाज को बांटने की कोशिशों के खिलाफ लगातार आवाज उठाई जाएगी।” यह बात पेद्दापल्ली के सांसद गड्डम वंशीकृष्ण ने नई दिल्ली में आयोजित दलित–आदिवासी आत्मसम्मान बैठक में कही हैं।
बैठक को संबोधित करते हुए सांसद वंशीकृष्ण ने “जय भीम” के नारे के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की और देश के विभिन्न हिस्सों से बैठक में पहुंचे नेताओं एवं प्रतिनिधियों का अभिवादन किया। हाल ही में सामने आए केसीआर के फार्म हाउस के पास हल्दी की पानी से शुद्धिकरण के मामलों का उल्लेख करते हुए सांसद वंशीकृष्ण ने कहा कि जाति और समुदाय के आधार पर भेदभाव की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

सांसद ने आरएसएस–मनुस्मृति विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज को बांटकर शासन करने की कोशिशों के खिलाफ सभी को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि दलित और आदिवासी समुदायों की एकता ही सामाजिक प्रगति का आधार है। “हम सबको साथ रहना है और साथ मिलकर आगे बढ़ना है। तभी हम प्रगति कर सकते हैं।”
एससी और एसटी समुदायों की आबादी तथा बजट आवंटन का मुद्दा उठाते हुए सांसद ने सवाल किया कि जब इन समुदायों की आबादी देश में लगभग 30 प्रतिशत है, तो बजट में उन्हें उनकी जनसंख्या के अनुरूप हिस्सेदारी क्यों नहीं मिल रही है। उन्होंने अपने भाषण में लगभग 30 प्रतिशत आबादी के बावजूद करीब 3 प्रतिशत बजट हिस्सेदारी और लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये के आवंटन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछड़े और वंचित वर्गों के साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है।
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सांसद गड्डम वंशीकृष्ण ने कहा कि दलित और आदिवासी समुदायों से जुड़े मुद्दों को संसद में लगातार उठाया जाएगा। उनके अधिकारों, सम्मान और सामाजिक न्याय के लिए मजबूती से आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने सभी से एकजुट होकर आगे बढ़ने और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ सामूहिक संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया। सांसद वंशीकृष्ण ने कहा, “जब तक हम एकजुट हैं, तब तक हमारे अधिकारों और आत्मसम्मान के लिए हमारी आवाज को कोई दबा नहीं सकता।”

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