प्लांट रिवर्ट्स से निकल और कोबाल्ट की रिकवरी के लिए मिधानि ने भारी पानी बोर्ड और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन पर किए हस्ताक्षर, जानें इसके लाभ

हैदराबाद : संसाधन रिकवरी, टिकाऊ विनिर्माण और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, रक्षा मंत्रालय के अधीन मिश्र धातु निगम लिमिटेड (मिधानि), हैदराबाद, परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन भारी पानी बोर्ड और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, मुंबई, ने 27 अक्टूबर को प्लांट रिवर्ट्स (रिवर्स) से कोबाल्ट और निकल के उत्पादन और रिकवरी पर सहयोग करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह समझौता ज्ञापन तीनों संगठनों के बीच सहयोग के लिए एक ढांचा स्थापित करता है। इसके तहत प्लांट रिवर्ट्स से मूल्यवान धातुओं को निकालने के लिए कुशल प्रक्रियाओं का पता लगाने और उन्हें लागू करने के लिए उनकी विशेषज्ञता, तकनीकी क्षमताओं तथा औद्योगिक संसाधनों का लाभ उठाया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य संसाधनों के उपयोग को अधिकतम करना, प्राथमिक खनिज संसाधनों पर निर्भरता को कम करना और पर्यावरण के अनुकूल धातु उत्पादन को बढ़ावा देना है।

कोबाल्ट और निकल महत्वपूर्ण धातुएं हैं जिनका उपयोग उन्नत बैटरी तकनीकों, इलेक्ट्रिक वाहनों, स्टेनलेस स्टील, सुपरअलॉय और अन्य रणनीतिक औद्योगिक अनुप्रयोगों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। प्लांट रिवर्ट्स से इन धातुओं को निकालने से घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, संसाधन दक्षता में सुधार करने और महत्वपूर्ण धातुओं की बढ़ती मांग को पूरा करने में काफी मदद मिल सकती है। द्वितीयक स्रोतों से कोबाल्ट और निकल की रिकवरी करके, यह सहयोग प्लांट रिवर्ट्स से मूल्य प्राप्त करना चाहता है जो अन्यथा कम उपयोग में रह जाते और महत्वपूर्ण धातुओं की अधिक लचीली और टिकाऊ आपूर्ति में योगदान देते।

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इस अवसर पर मिधानि के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. एस वी एस नारायण मूर्ति ने कहा, “इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर द्वितीयक संसाधनों से महत्वपूर्ण धातुओं की रिकवरी को बढ़ावा देने के हमारे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस सहयोग के माध्यम से, हमारा लक्ष्य अपनी ताकतों को मिलाना और प्लांट रिवर्ट्स से कोबाल्ट और निकल के उत्पादन के लिए व्यवहार्य, टिकाऊ और व्यावसायिक रूप से प्रतिस्पर्धी समाधान विकसित करना है।” समझौता ज्ञापन पर डॉ. एस वी एस नारायण मूर्ति, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, मिधानि, वी.वी.एस.ए. प्रसाद, अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी भारी पानी बोर्ड और डॉ. आलोक अवस्थी, एसोसिएट डायरेक्टर, मटेरियल ग्रुप, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र ने हस्ताक्षर किए।

इस कार्यक्रम में मिधानि की निदेशक (वित्त) श्रीमती के. मधुबाला और भारी पानी बोर्ड के कार्यकारी निदेशक संदीप वाधवा भी शामिल हुए। इन तीनों संगठनों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोग धातु रिकवरी और रीसाइक्लिंग में नए अवसर पैदा करेगा, सर्कुलर इकोनॉमी का समर्थन करेगा और भारत के बढ़ते औद्योगिक और स्वच्छ-ऊर्जा क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल की दीर्घकालिक उपलब्धता में योगदान देगा।

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