कादम्बिनी क्लब की मासिक गोष्ठी में मुख्य वक्ता ने अपने ही इस कविता संग्रह पर रखे विचार, सुषमा बैद के निधन पर जताया शोक

हैदराबाद : कादम्बिनी क्लब हैदराबाद के तत्त्वावधान में 17 मई को क्लब की 406वीं मासिक गोष्ठी का आयोजन ऑनलाइन गूगल मीट पर संपन्न हुआ। प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए महासचिव प्रवीण प्रणव और महासचिव मीना मुथा ने बताया कि प्रथम सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार प्रो ऋषभदेव शर्मा ने की। सर्व प्रथम प्रवीण प्रणव ने पटल पर उपस्थित सभी गणमान्य साहित्यकारों का शब्दकुसुमों से स्वागत करते हुए शुभ्रा मोहन्तो को सरस्वती वंदना प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया। तत्पश्चात हैदराबाद की कवयित्री/लेखिका एवं क्लब की सदस्या स्व सुषमा बैद के निधन पर शोक जताया एवं पटल पर उपस्थित साहित्यकारों ने दो मिनट का मौन धारण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

संगोष्ठी सत्र का आरंभ करते हुए प्रवीण प्रणव ने कहा कि आज मुख्य वक्ता के रूप में डॉ अनामिका अनु (युवा साहित्यकार, तिरुवनंतपुरम, केरल) अपनी आगामी कविता संग्रह “मैं दीवारों पर खिड़कियां लिख रही हूँ” पर बात रखेंगी। हैदराबाद में “क से कविता” के बैनर तले हम इनकी कहानी संग्रह पर चर्चा कर चुके हैं, आज हम इन्हीं के द्वारा इनकी कविताओं के बारे में सुनेंगे।

अवधेश कुमार सिन्हा (नई दिल्ली) ने अनामिका अनु का संक्षिप्त परिचय देते हुए कहा कि मुजफ्फरपुर बिहार में जन्मी अनामिका अनु मूल रूप से कवयित्री हैं जिनकी कथा संग्रह भी प्रकाशित हैं। उन्होंने आगे कहा कि अनामिका अनु एक ऐसी कवयित्री हैं जो अपनी कविताओं में जीवन को तैयार रत्न स्वीकार नहीं करतीं, वह मिट्टी को छूती हैं और उसमें भूगोल सुनती हैं, वह देह को देखती हैं और उसमें इतिहास पढ़ती हैं। वह प्रेम को सुनती हैं और उसमें एक ऐसी ध्वनि पहचानती हैं जो कही नहीं गई। भूख को बिम्ब और दुख को भाषा बनाने वाली अनामिका अनु साहित्य में पूरी तरह से संलग्न हैं। इनकी कई कृतियाँ प्रकाशित हैं और कई पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं।

डॉ अनामिका अनु ने अपने वक्तव्य में अपनी काव्य संग्रह “मैं दीवारों पर खिड़कियां लिख रही हूँ” के अलग-अलग खंडों के साथ काव्य संग्रह का परिचय करवाया। उन्होंने कहा कि कविता संग्रह के विभिन्न खंडों की कविताओं में अलग अलग भावों का समावेश है। कविताएँ छोटी अवश्य हैं, लेकिन इन्हें कहने के पीछे कई वर्षों का मेहनत है। उन्होंने अपना अनुभव साझा किया जिनसे प्रभावित होकर उन्होंने ये कविताएँ लिखीं हैं।

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उन्होंने बताया कि कविता सीधे मसलों पर बात करने के अतिरिक्त सुई भी चुभाती हैं। सामाजिक मसलें गुब्बारों की तरह फैले हुए हैं जिससे समाज में असहिष्णुता बढ़ रही है। इन गुब्बारों में अगर समाज के लोग अपनी अपनी ओर से सुई चुभायें तो इन मसलों को सुलझाया जा सकता है। नफ़रत के माहौल को कम किया जा सकता है। कवि संवादों के पैरोकार होते हैं। अतः इस संग्रह के कविताओं के माध्यम से कोशिश की गई है कि समाज में सहिष्णुता को बचाए रखें। कुछ कविताएँ प्रेम की है क्योंकि प्रेम के बिना जीवन चलता नहीं है। कविताएँ भावनाओं के तीक्ष्ण और सघन माध्यम हैं। उन्होंने संग्रह से अपनी कुछ कविताएँ भी सुनाईं।

प्रो ऋषभदेव शर्मा ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि कवयित्री अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से मूल पैरोकार रखती हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करती हैं। वे कविता के माध्यम से समाज को कहना चाह रही हैं कि दीवारें और खिड़कियां एक नहीं अनेक हैं। मनुष्य के मुक्ति के प्रयास खिड़कियां हैं। अनामिका आत्म और अन्य दोनों ही अभिव्यक्ति का सम्मान करने वाली कवयित्री हैं। भाषा के प्रयोग एवं शैली की दृष्टि से ये जागरूक हैं। इनकी रचनाएँ बिंबों प्रतीकों और रूपकों से पूर्ण हैं। उन्होंने “मिट्टी रंभाती हैं”, “कविताएँ ज़िंदगी का लिखत ही तो हैं,” कविता उम्मीद से है” आदि कविताओं की चर्चा की। काव्यात्मक प्रयोगों से भरी हुई रचनाओं के लिए कवयित्री को बधाई देते हुए उन्होंने अपनी बात समाप्त की।

अवधेश कुमार सिन्हा ने अनामिका अनु से कविता लिखने की प्रेरणा कहाँ से मिली सवाल किया जिसका जवाब देते हुए अनामिका ने अपनी माँ जो पिता के जाने के बाद अकेली रह गई थीं का अनुभव सुनाया और कविता लिखने के लिए उन्हें ही प्रेरणा स्रोत बताया। टिप्पणी देते हुए सरिता सुराणा ने कहा कि उनका शब्द चयन सरल है लेकिन अर्थ गाम्भीर्य है। डॉ रक्षा मेहता ने कहा कि कविताएं बहुत गहरी हैं। डॉ आशा मिश्र “मुक्ता” ने कहा कि कविताएं नश्तर चुभोकर सोचने पर मजबूर करती हैं। प्रवीण प्रणव ने कहा कि कविताएँ चापा कल की तरह जितनी बाहर है उससे कहीं अंदर हैं। सरिता सुराणा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ प्रथम सत्र संपन्न हुआ।

दूसरे सत्र में शिल्पी भटनागर के संचालन में कवि गोष्ठी का आयोजन चंद्र प्रकाश दायमा की अध्यक्षता में हुआ। इसमें विनीता शर्मा, ऋषभ देव शर्मा, प्रवीण प्रणव, कमल राठी, डॉ रमा बहेड़, हर्षलता दुधोरिया, गीता अग्रवाल, निशि कुमारी, डॉ रक्षा मेहता, शिल्पी भटनागर, मधु भटनागर, सरला भूतोडिया, अंशु श्री सक्सेना, निशि कुमारी, भावना पुरोहित, डॉ आशा मिश्रा, शोभा देशपांडे, दीपक कुमार दीक्षित, वर्षा शर्मा, रेखा अग्रवाल, प्रियंका पांडे, दर्शन सिंह ने काव्यपाठ किया। श्रुतिकांत भारती ने आशीर्वचन दिया। प्रदीप देवी शरण भट्ट, उषा शर्मा, आर्या झा, डॉ बालाजी, प्रतिमा सिंह, पुष्पा वर्मा, सरिता दीक्षित, भगवती अग्रवाल, दीपक दीक्षित, डॉ चक्रपाल सिंह, डॉ राशि सिंहा की उपस्थिति कार्यक्रम में रही। रवि वैद ने कार्यक्रम में उपस्थित होने व सहयोग के लिए क्लब की ओर से सभी के प्रति आभार व्यक्त किया एवं डॉ आशा मिश्र ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया।

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