Delhi liquor scam : क्या है दिल्ली शराब घोटाला? क्या है KCR की बेटी व एमएलसी कविता का संबंध? बड़ा खुलासा

मालूम हो कि दिल्ली शराब घोटाला मामला पिछले दो साल से चर्चा का विषय बना हुआ है। गली से लेकर दिल्ली तक हर जगह एक ही नाम सुनाई देता है-दिल्ली शराब घोटाला। यही चर्चा का गर्म विषय बन गया है क्योंकि इसमें बड़े-बड़े लोग शामिल हैं। इस केस में सीबीआई और ईडी आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रही है। दिल्ली शराब घोटाला मामले में ईडी अधिकारियों ने शुक्रवार को तेलंगाना के पूर्व सीएम की बेटी और एमएलसी कविता को गिरफ्तार कर लिया। ईडी के अधिकारियों ने कविता को हैदराबाद स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया और कुछ ही देर बाद विमान से दिल्ली ले गए। ईडी ने कविता को दिल्ली के राउज़ के राजस्व न्यायालय में पेश किया।

असली में क्या है दिल्ली शराब घोटाला है?

पहले देश की राजधानी दिल्ली में 60 फीसदी शराब की दुकानें सरकारी और 40 फीसदी निजी स्वामित्व में थीं। लेकिन 2020 में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने इनमें से 100 फीसदी को निजी क्षेत्र को सौंपने का फैसला लिया। आप सरकार के निर्णय के अनुसार दिल्ली सरकार ने 5 जनवरी 2021 को शराब नीति तैयार करने के लिए मंत्रियों के साथ एक समिति का गठन किया है। इस समिति में डिप्टी सीएम मनीष सिसौदिया, सत्येन्द्र जैन और कैलाश गहलोत शामिल हैं। दो महीने बाद ये सभी नई शराब नीति लेकर आए। नई शराब नीति को AAP सरकार ने 21 मई 2021 को बिना किसी संशोधन के मंजूरी दे दी थी। यह नीति सरकार के राजस्व को कम करने और दुकानदारों को भारी मुनाफा कमाने के लिए बनाई गई थी। करीब चार महीने तक लंबित रहने के बाद नवंबर 2021 में केजरीवाल सरकार द्वारा लाई गई नई शराब नीति को दिल्ली के उपराज्यपाल ने हरी झंडी दिखा दिया है। इसके साथ ही केजरीवाल सरकार 2021 में नई शराब नीति लागू कर दी है। सरकार ने शराब की बिक्री के लिए टेंडर बुलाए और दुकानें निजी लोगों को सौंप दीं। इसके लिए उनसे लाइसेंस शुल्क वसूला गया है। नई आबकारी नीति के तहत दिल्ली में 849 शराब की दुकानें खुल गई हैं।

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लाइसेंस फीस में भी भारी बढ़ोतरी

इस नीति को लागू करने के दौरान सरकार ने लाइसेंस फीस में भी भारी बढ़ोतरी की। नई शराब नीति लागू होने के बाद एल-1 लाइसेंस के लिए ठेकेदारों को 5 करोड़ रुपये देने होंगे, जबकि पहले ठेकेदारों को 25 लाख रुपये देने होते थे। इसी तरह आप सरकार ने अन्य श्रेणियों में भी लाइसेंस फीस में काफी बढ़ोतरी की है। इससे बाजार में बड़े शराब ठेकेदारों को ही लाइसेंस मिल गया। दिल्ली सरकार द्वारा लाई गई नई नीति के अनुसार, शराब की होम डिलीवरी और सुबह 3 बजे तक शराब की दुकानें खोलने का विकल्प है। शराब दाम के विषय में निजी व्यापारी स्वतंत्र हैं। यानी निजी व्यापारी अपनी इच्छानुसार कीमतें बढ़ा सकते हैं। केजरीवाल सरकार ने लाइसेंस जारी करने के विषय में असीमित छूट की पेशकश की है। उस समय केजरीवाल सरकार ने घोषणा की थी कि इन रियायतों से सरकार का राजस्व 27 प्रतिशत बढ़ जाएगा और सरकार के खजाने में 8,900 करोड़ रुपये अतिरिक्त जुड़ जाएगी।

नई शराब नीति रद्द

इसी बीच अप्रैल 2022 में नरेश कुमार को दिल्ली का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया। नौकरी ज्वाइन करने के बाद नरेश कुमार ने नई शराब नीति का गहनता से अध्ययन किया और पाया कि शराब नीति के डिजाइन में अनियमितताएं हैं और शराब की दुकानों के आवंटन में भी गलतियां हुई हैं। इस पर मुख्य सचिव ने एक रिपोर्ट उपराज्यपाल को तैयार कर सौंपी। इस मामले पर उपराज्यपाल ने केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला को पत्र लिखा। 22 जुलाई 2022 को पत्र को संज्ञान में लेते हुए केंद्रीय गृह विभाग ने सीबीआई जांच के आदेश जारी कर दिए। लेकिन एक तरफ जब मुख्य सचिव की रिपोर्ट तैयार हो रही थी, उसी वक्त केजरीवाल सरकार ने घोषणा कर दी कि नई शराब नीति रद्द कर रहे हैं। आप सरकार ने घोषणा की है कि वह नई नीति रद्द कर रही है क्योंकि सरकार का राजस्व उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ रहा है।

आरोप और कविता की भूमिका

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री सिसौदिया ने लाइसेंस जारी करने में रिश्वत लिया और अनुमति देकर सरकार को 145 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया। इस तरह सरकार ने बीयर की प्रत्येक पेटी पर सरकार को भुगतान की जाने वाली आयात शुल्क को माफ कर दिया है। आरोप है कि सरकार ने कोविड के नाम पर शराब कारोबारियों की लाइसेंस फीस के रूप में सरकार को मिलने वाले 145 करोड़ रुपये एकतरफा माफ कर दिये। ऐसे कई आरोप हैं कि नई शराब नीति कुछ निजी व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के लिए लाई गई थी और दक्षिण के कुछ लोगों ने साउथ ग्रुप नामक एक सिंडिकेट बनाया और इस नीति से लाभ उठाया।

ईडी और सीबीआई अलग-अलग जांच

अगस्त 2022 में सीबीआई ने नई शराब नीति में नियमों के उल्लंघन और प्रक्रियात्मक अनियमितताओं के मामले में 15 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। उसके बाद, ईडी ने सीबीआई द्वारा दर्ज मामले के संबंध में पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच शुरू कर दी। दिल्ली सरकार की नई शराब नीति में हुए घोटाले की जांच ईडी और सीबीआई अलग-अलग कर रही है। ईडी इस नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रही है। नीति निर्माण में अनियमितता के आरोपों की जांच सीबीआई कर रही है। हैदराबाद के मशहूर शराब कारोबारी और रॉबिन डिस्टिलरीज के नाम से कारोबार करने वाले अरुण रामचंद्र पिल्लई, वाईसीपी ओंगोल सांसद मागुंटा श्रीनिवासुलुरेड्डी, उनके बेटे राघव मागुंटा व अरबिंदो फार्मा के संस्थापक शरत चंद्र रेड्डी की “साउथ ग्रुप” पर इस शराब घोटाले में भ्रष्टाचार के आरोप हैं।

पिल्लई के खिलाफ मुख्य आरोप

सीबीआई के अनुसार, पिल्लई उन आरोपियों में से एक है जिन्होंने उत्पाद शुल्क विभाग के अधिकारियों के साथ दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति 2021-22 को तैयार करने और लागू करने में सक्रिय भूमिका निभाई है। ईडी के मुताबिक ये अरुण रामचंद्र पिल्लई शराब बनाने वाली कंपनी इंडोस्पिरिट्स के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस कंपनी में 32.5 फीसदी हिस्सेदारी पिल्लई की है। पिल्लई के खिलाफ मुख्य आरोप यह है कि हैदराबाद का यह व्यवसायी मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल है और दिल्ली में शराब लाइसेंस के मामले में अवैध रूप से जन प्रतिनिधियों को लाभ पहुंचाया।

रिश्वत का भुगतान

सीबीआई की जानकारी के मुताबिक, हैदराबाद स्थित रॉबिन डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड के पिल्लई निदेशक हैं। 22 अप्रैल 2022 को स्थापित इस कंपनी को प्रेमसागर गांड्रा के साथ एक अन्य निदेशक के रूप में कार्य किया। दिल्ली स्थित समीर महेंद्रू की इंडो स्पिरिट प्राइवेट लिमिटेड के साथ राबिन डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड का संबंध है। दिल्ली स्थित ‘Only Touch Louder’ (ओनली टच लाउडर) नामक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के ई महेंद्रु और शराब घोटाले में अहम भूमिका निभाने वाले विजय नायर मालिक है। सीबीआई का कहना है कि पिल्लई ने महेंद्रु और विजय नायर के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। सीबीआई साफ किया है कि विजय नायर को पिल्लई ने 100 करोड़ रुपये भुगतान करता था। इसके बाद उस पैसे को दिल्ली सरकार के कर्मचारियों को रिश्वत के रूप में विजय नायार ट्रांसफर करता था। सीबीआई ने खुलासा किया है कि रिश्वत का भुगतान करने के लिए पैसा पिल्लई को कहीं से नहीं आता है। महेंद्रू की इंडो स्पिरिट्स कंपनी के जरिए मिलने वाले पैसे को विजय नायर को रामचंद्र पिल्लई भेजते था।

कविता का बेनामी रामचंद्र पिल्लई

ईडी के ब्योरे के मुताबिक, इंडोस्पिरिट्स कंपनी द्वारा अवैध रूप से कमाए गए 69 करोड़ में से 29 करोड़ रुपये पिल्लई के खातों में ट्रांसफर किए गये। प्रवर्तन निदेशालय ने पाया कि इस रकम को पिल्लई ने एक टीवी चैनल के प्रमुख को 4.75 करोड़ और अभिषेक बोइनापल्ली के खाते में 3.85 करोड़ रुपये का भुगतान किया। गौरतलब है कि अभिषेक बोइनापल्ली दिल्ली शराब घोटाला मामले में भी आरोपी हैं। यहां एक और मोड़ यह है कि अरुण रामचंद्र पिल्लई की रॉबिन डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड और रॉबिन डिस्ट्रीब्यूशन एलएलपी का पता और बीआरएस एमएलसी कविता के रिश्तेदार के ब्यूटी पार्लर का पता समान है। बताया गया है कि अरुण रामचंद्र पिल्लई ने ईडी की जांच में स्वीकार किया है कि वह बीआरएस एमएलसी कविता के प्रतिनिधि हैं और उनकी ओर से साउथ ग्रुप का प्रतिनिधित्व करते हैं। ईडी पुरजोर दलील दे रहा है कि कविता का बेनामी रामचंद्र पिल्लई है।

क्या है कविता की भागीदारी

दिल्ली बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा और दिल्ली के पूर्व विधायक मंजींदर सिरसा ने दिल्ली शराब घोटाले में कविता की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली की शराब नीति केसीआर के परिवार के सदस्यों के निर्देश पर बनाई गई। कविता ने खुद शराब नीति संबंध में चर्चा में भाग लिया। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री सिसोदिया, उत्पाद शुल्क अधिकारियों और केसीआर के परिवार के सदस्यों ने उक्त होटल में हुई चर्चा में एक समझौता किया। अरुण रामचन्द्र पिल्लई ने बताया कि कविता के लिए दिल्ली के ओबेरॉय होटल में छह महीने के लिए एक कमरा बुक किया गया। यह भी कहा जाता है कि कविता दिल्ली में शराब व्यापार करने के लिए रामचंद्रन पिल्लई को लेकर आई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब माफिया के कमीशन को 10 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए 150 करोड़ रुपये के सौदे की पूरी पहली किश्त कविता के माध्यम से दिल्ली के डिप्टी सीएम सिसोदिया को हस्तांतरित की गई। (संकलन-तेलंगाना समाचार)

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