बीएड् प्रशिक्षणार्थियों के आयोजित 12वें ‘हिंदी भाषा संचेतना शिविर’ का समापन, गुरुओं ने दिये गुरु मंत्र

हैदराबाद : केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के हैदराबाद केंद्र द्वारा दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, खैरताबाद, हैदराबाद के बीएड् के प्रशिक्षणार्थियों के प्रशिक्षण के लिए 16 से 28 अक्टूबर तक आयोजित 12वें हिंदी भाषा संचेतना शिविर का समापन समारोह दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के प्रांगण में संपन्न हुआ। समापन समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के निदेशक प्रो. सुनील बाबुराव कुलकर्णी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. श्यामराव राठौड़, पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष एवं डीन, पुस्तकालय, इफ्लू, हैदराबाद उपस्थित थे।

इस दौरान पाठ्यक्रम संयोजक एवं क्षेत्रीय निदेशक प्रो. गंगाधर वानोडे, सम्मानित अतिथि पी. ओबय्या, अध्यक्ष, द. भा. हिं. प्रचार सभा, आंध्र एवं तेलंगाना, श्रीमती ए. जानकी, सचिव (प्रभारी) एवं संपर्क अधिकारी, द. भा. हिं. प्रचार सभा, आंध्र एवं तेलंगाना, विशिष्ट अतिथि डॉ. सी. एन. मुगुटकर, प्राचार्य, शिक्षा महाविद्यालय, द. भा. हिं. प्रचार सभा, खैरताबाद, हैदराबाद, पाठ्यक्रम प्रभारी डॉ. फत्ताराम नायक, सह-आचार्य, केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र एवं डॉ. रणजीत भारती, सह-आचार्य, केंद्रीय हिंदी संस्थान, मैसूर केंद्र मंच पर उपस्थित थे। इस संचेतना शिविर में कुल 105 (महिला-63, पुरुष-42) प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया था।

सर्वप्रथम मंचस्थ अतिथियों ने माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया। छात्रों द्वारा माँ सरस्वती वंदना, संस्थान गीत व स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. श्यामराव राठौड़, पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष एवं डीन, पुस्तकालय, इफ्लू, हैदराबाद ने अपने वक्तव्य में कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। भाषाई अस्मिता का सवाल हमारे सामने उभर कर आया है। इसलिए हमें आज संचेतना शिविर की आवश्यकता का अनुभव हो रहा है। भाषाई चेतना व जागरूकता के लिए इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन करना पड़ रहा है। आप सब भावी शिक्षक हैं। इस देश के निर्माता हैं। उस जिम्मेदारी को आपको बखूबी निभाना है। आपने यहाँ जो कुछ सीखा है, पाया है, उसे जीवन भर संजोकर रखिए। वह आपके जीवन की दिशा निर्धारित करेगा।

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सम्मानित अतिथि पी. ओबय्या, अध्यक्ष, द. भा. हिं. प्रचार सभा, आंध्र एवं तेलंगाना ने अपने वक्तव्य में गर्व के साथ कहा कि मैं केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा का छात्र रहा हूँ। मैंने वर्ष 1969 में केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा से हिंदी शिक्षण पारंगत के तीसरे बैच में पाठ्यक्रम पूर्ण किया है। जब मैं आगरा गया तब मैं तेलुगु व हिंदी बोलता था। किंतु प्रशिक्षण पूर्ण होने तक मैंने शुद्ध हिंदी सीख ली। वर्ष के अंत में जो प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती थी। उसमें मैंने प्रथम स्थान प्राप्त किया था। आपको भी शुद्ध हिंदी सीखना चाहिए, ताकि आप भावी नागरिकों का भविष्य उज्ज्वल बना सकें। श्रीमती ए. जानकी, सचिव (प्रभारी) एवं संपर्क अधिकारी, द. भा. हिं. प्रचार सभा, आंध्र एवं तेलंगाना ने अपने वक्तव्य में कहा कि आशा करती हूँ कि आप सबने संचेतना शिविर के इन 13 दिनों में बहुत कुछ सीखा होगा। मुझे पूरा विश्वास है कि प्राप्त ज्ञान को आप अपने भावी जीवन में पूरा-पूरा प्रयोग करेंगे।

विशिष्ट अतिथि डॉ. सी. एन. मुगुटकर, प्राचार्य, शिक्षा महाविद्यालय, द. भा. हिं.प्रचार सभा, खैरताबाद, हैदराबाद ने कहा कि केंद्रीय हिंदी संस्थान ने हिंदी भाषा संचेतना शिविर के माध्यम से शुद्ध वर्तनी के साथ भाषा को समाज तक पहुँचाने का कार्य आरंभ किया है जिसमें आप सब लाभार्थी बने हैं। इसका जीता जागता उदाहरण आपके द्वारा बनाई गई हस्तलिखित पत्रिका है। भाषा ही नहीं सामाजिक, सांस्कृतिक दर्शन भी इस हस्तलिखित पत्रिका में देखने को मिला है। पाठ्यक्रम प्रभारी डॉ. फत्ताराम नायक, सह-आचार्य, केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र ने अपने आशीर्वचन में कहा कि आप जहाँ भी जाएँ आपके छात्रों को ज्ञान रूपी दीप से प्रज्ज्वलित करें। डॉ. रणजीत भारती, सह-आचार्य, केंद्रीय हिंदी संस्थान, मैसूर केंद्र ने अपने वक्तव्य में कहा कि शिक्षक को राष्ट्र निर्माता कहा जाता है। हमें उस जिम्मेदारी का निर्वहन भली भाँति करना चाहिए। हमें व्यक्तिनिष्ठ नहीं, वस्तुनिष्ठ होना चाहिए। तभी हम इस कार्य में सफल होंगे।

कार्यक्रम संयोजक और क्षेत्रीय निदेशक प्रो. गंगाधर वानोडे ने अपने आशीर्वचन में कहा कि किसी भी विषय को पढ़ने, ग्रहण करने के लिए भाषा की आवश्यकता होती है। इसीलिए भाषा का अच्छा ज्ञान होना चहिए। भाषा का जो ज्ञान आपने इस संचेतना शिविर में प्राप्त किया है उसे आत्मसात करने के लिए अभ्यास की आवश्यकता है। हर रोज आप दूरदर्शन में आधे घंटे के लिए समाचार सुनने का प्रयास करें। मस्तिष्क में संग्रहित कर उसे फिर से बोलने का प्रयास करें। पुस्तकें पढ़कर उसमें किस प्रकार की वर्तनी लिखी है, देखकर अपनी अभ्यास पुस्तिका में लिखें जिससे आपकी भाषा में सुधार आएगा। इस अवसर सुश्री रानी मल्लिक, वीरेंद्र भुईया, सुश्री अन्वेषा साहू, मनोज कहाकुल, संजय कुमार साहू, सुश्री कर्णिका धन्सना, चौभीन बाहे आदि ने शिविर के संबंध में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत लोक नृत्य, स्वरचित कविता पाठ, देशभक्ति गीत, नाटक आदि प्रस्तुत किए।

इस अवसर पर हस्तलिखित पत्रिका ‘भारतीय सांस्कृतिक दिग्दर्शिका‘ का विमोचन अतिथियों के कर कमलों द्वारा किया। साथ ही पर-परीक्षण में प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान एवं प्रोत्साहन पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को पुरस्कार वितरित किए गए। इसी दौरान सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए। सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन डॉ. टी. अरुणा देवी एवं पूरे कार्यक्रम का संचालन डॉ. शेख ज़ुबेर अहमद द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के अध्यापकगण, अधिकारी, छात्र तथा केंद्र के सदस्य उपस्थित थे।

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