नई दिल्ली : कॉकरोच जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं ने आलोचना की कि सीईसी ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोशिश कर रहे हैं। इस समय ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए ये देश की जनता से ही युद्ध कर रहे हैं। नेताओं ने कहा कि पाबंदियों और मामले दर्ज करके हमारे संघर्ष को रोक नहीं सकते। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा देने तक हमारा संघर्ष नहीं रुकेगा। उन्होंने फटकारा लगाया कि ज्ञानेश कुमार को क्यों बचा रहे हैं। इतनी जरूरत क्या है? ज्ञानेश को बचाने के लिए पूरे देश में भयावह स्थिति बना रहे हैं।
जंतर-मंतर आंदोलन की पृष्ठभूमि में पुलिस की हिरासत से रविवार को रिहा होने के बाद CJP नेता सौरव दास, आशुतोष रांका ने मिलकर मीडिया कॉन्फ्रेंस की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कल हमें विमान में ही हिरासत में लिया गया। अपहरण करने जैसा विमान से ही जबरदस्ती खींचकर ले गए। उन्होंने कहा कि कल दिल्ली में इमरजेंसी जैसे हालात दिखे। पहले इमरजेंसी के बारे में सिर्फ सुना था। अब प्रत्यक्ष देखा। पहले इमरजेंसी के समय भी ट्रेनें रद्द नहीं हुई थीं लेकिन मोदी के कार्यकाल में तो बड़ी संख्या में ट्रेनें रद्द की गईं। ट्रेनें और इंटरनेट सेवाएं रोककर लोगों को परेशान किया।
मोदी सबसे महान प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। सवाल किया कि हालांकि लोगों और युवाओं को देखकर मोदी क्यों डर रहे हैं। 1975 के बाद फिर से इमरजेंसी देश में देख रहे हैं। सवाल किया कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने का हक भी लोगों को नहीं है क्या। कल दिल्ली में 40 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गये। आरोप लगाया कि माओवादी प्रभावित इलाकों व सीमाओं से बलों को बुलाया। जम्मू-कश्मीर सीमाओं से भी बलों को बुलाया। दिल्ली में ट्रेनें व मेट्रो रेल सेवाओं को रद्द करके लोगों को परेशान किया। कल हमें माफिया गिरोहों को गिरफ्तार करने जैसा किया गया। हमारे सेल फोन छीनकर किसी से बात न करने दिया। प्राइवेट गाड़ियों में एक-एक को एक-एक इलाके में ले गए।
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आरोप लगाया कि कम से कम वकीलों से संपर्क करने का मौका भी न देकर हमारे हकों को छीना गया। हमारे फोन छीनकर हैकिंग और क्लोनिंग की। CJP मुंबई को-ऑर्डिनेटर प्रणय को कस्टडी में प्रताड़ित किया। कस्टोडियल हिंसा पर कोर्ट और मानवाधिकार संस्थाएं प्रतिक्रिया नहीं दे रही हैं। कल ड्यूटी पर रहे पुलिसकर्मियों में किसी के पास नेम बैज नहीं थे। निष्पक्ष रूप से काम कर रहे पत्रकारों को परेशान कर रहे हैं। पत्रकारों पर भी केस लगाकर बंद कर रहे हैं।
