[हमारे मित्र शिवानंद कालेकर जी ने 16 अगस्त की रात को भेजे गये एक संदेश में बताया कि दक्षिण समाचार के संपादक मुनींद्र जी की बेटी, उप निदेशक (दक्षिण), लेखक और साहित्यकार बेला कक्कड़ (57) का 15 अगस्त को निधन हो गया। वह विजयनगरम (आंध्र प्रदेश) में एक कार्यक्रम में भाग लेने गई थी। रात को एक होटल में भोजन करने के बाद उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की। इसके तुरंत बाद उनका निधन हो गया। वह अपने पीछे पति अनिल कक्कड़, पुत्र यश कक्कड़ और पुत्री अदिति कक्कड़ को छोड़ गई है। पुत्री विदेश में पढ़ती है। 18 अगस्त को हैदराबाद में अंतिम संस्कार किया जाएगा।]
श्रीमती बेला मैडम का इस कदर हमारे बीच से जाना मर्माहत करनेवाली सूचना है। हिंदी शिक्षण योजना के उप निदेशक के रूप में बेला जी हिंदी के प्रति निष्ठावान बनी रहीं। नये साथियों को प्रोत्साहित करना इनका खास स्वभाव था। पिछले वर्ष नराकास-2, हैदराबाद की बैठक में इन्होंने जब भरी सभा में मेरा नाम लेते हुए हिंदी अनुभाग, आईआईसीटी की सराहना की तो मैं सुखद आश्चर्य से भर गया था। दरअसल उस बैठक से पहले मेरा और बेला जी की कोई औपचारिक बातचीत या मुलाकात नहीं हुई थी। वह पल मेरे लिए अविस्मरणीय बन गया है। उस पल के साथ स्वर्गीय बेला जी हमेशा हमारे ज़ेहन में जीवंत रहेंगी।
हिंदी, तेलुगू और अंग्रेजी पर इनकी बराबर पकड़ी थी। इनके हंसमुख चेहरे से कविता सुनना, काव्य – सागर में गोता लगाने जैसा था। भावों का आरोह-अवरोह इनके शब्दों में स्पंदित होकर सभा को भाव-विभोर कर देता था। राजभाषा हिंदी की तमाम चुनौतियों के बावजूद आप हिंदी के प्रति सकारात्मक और आस्थावान थीं। आपकी आस्था हम हिंदी अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए चिंगारी के समान शोला भड़काती रहेगी।
एक बुलावे पर आ जाना। न गाड़ी का तामझाम, न अतिरेक सम्मान की लालसा, इनकी अद्भूत शख्सियत की पहचान थी। एक बार संस्थान में अत्याधिक व्यस्तता के कारण वाहन की व्यवस्था नहीं हो पाई, इसके बावजूद बेला जी प्रतिभागी से पहले कार्यक्रम स्थल पर मौजूद थीं। इससे अभिभूत होकर एक आयोजक के रूप में मेरे जेहन में महात्मा गांधी का समय आ जाना लाजिमी था, जब उनके कार्यकर्ता दक्षिण भारत की गलियों, गांवों में सुविधाओं के अभाव में हिंदी की अलख जगा रहे थे।
राजभाषा हिंदी को ऐसे ही व्यक्तित्व की आज नितांत आवश्यकता है, जब भाषा के स्तर पर हिंदी के सामने कई चुनौतियां खड़ी हैं। भाषा के प्रति इनके कई अवधान बाकी थे। ऐसे में अचानक यह सूचना राजभाषा हिंदी जगत के लिए हृदयविदारक है। विनम्र श्रद्धांजलि
– अजय जोशी
उप महानिदेशक
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र
नई दिल्ली
हमारी उप निदेशक (दक्षिण) आदरणीय श्रीमती बेला जी का 15 अगस्त की रात में निधन हो गया। अभी तक भी विश्वास नहीं हो रहा है कि वे हमारे बीच नहीं रही। ईश्वर उनकी आत्मा को सद्गति प्रदान करे और उनके शोक संतप्त परिवार को इस दुख की घड़ी में शक्ति व सबल दें। ॐ प्रभु शांति।
– शिवानंद कालेकर सहायक निदेशक
