बेंगलुरु : क्राइस्ट एकेडमी इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (CAIAS), बेंगलुरु के भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) केंद्र की ओर से भारतीय नृत्य संस्कृति पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें शास्त्रीय और लोक नृत्यों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपराओं और क्षेत्रीय विविधता को प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और प्रार्थना गीत से हुआ। आयोजक डॉ. मोहम्मद सफवान ने स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर IKS केंद्र की मासिक पत्रिका ‘सारा’ का विमोचन भी किया गया। संस्थान के उप-प्राचार्य डॉ. विनय कुमार ने भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व, शिक्षा के क्षेत्र में उसकी प्रासंगिकता तथा IKS समिति की भूमिका और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय ज्ञान-विरासत को शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ने की आवश्यकता रेखांकित की।

मुख्य अतिथि क्रिस्टिन विल्सन ने भारतीय ज्ञान परंपरा को सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने वाला आधार बताते हुए नृत्य को उसकी सजीव अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने गणपति स्तुति, कृष्ण लीला और तिल्लाना की प्रस्तुतियां भी दीं। स्टूडेंट जॉइंट डायरेक्टर फादर डॉ. लिटों ने नृत्य को आध्यात्मिक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक एकता का माध्यम बताते हुए विद्यार्थियों को भारतीय विरासत से जोड़ने में इसकी भूमिका पर जोर दिया।
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कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की नृत्य परंपराओं की झलक देखने को मिली। चेतना पी ने राजस्थानी लोक नृत्य और गोपिका सुरेश ने दैवी स्तुति प्रस्तुत की। पल्लवी और उनकी टीम ने ‘कल्याण राम कीर्तनम्’ पेश किया, जबकि नीना ऐन मैथ्यू ने लोक नृत्य प्रस्तुत किया। यांकी और उनकी टीम ने अरुणाचल प्रदेश के आदि समुदाय के पारंपरिक लोक नृत्य के माध्यम से क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत को मंच पर उतारा। पल्लवी ने वर्णम प्रस्तुत किया। क्रिस्टिन विल्सन की गणपति स्तुति, कृष्ण लीला और तिल्लाना की प्रस्तुतियां भी कार्यक्रम का हिस्सा रहीं।

कार्यक्रम के सह-आयोजक डॉ. मिलन बिश्नोई ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा, भाषाओं, कलाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। विभिन्न नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विविधता और आध्यात्मिक परंपराओं को उजागर करते हुए इस विरासत को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।

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