दलित शहीदों की श्रद्धांजलि सभा में गदर का आह्वान, बोले- “नहीं चाहिए गुलामी और जी हूजूर की जिंदगी”

हैदराबाद: जन नाट्य मंडली के व्यवस्थापक, गीतकार, कवि और लोक गायक ग़दर ने कहा कि गुलाम और जी हूजूर की जिंदगी हमें नहीं चाहिए। साथ ही आह्वान किया कि नव राष्ट् निर्माण के लिए संघर्ख करने की विचारधारा आनी चाहिए। ऐसा होने पर ही हम आगे बढ़ सकते हैं। इसके लिए हमारे बीच कोई विरोधाभास न हो और न रहे।

गदर ने रविवार को लकड़ी का पुल अंबेडकर रिसोर्स सेंटर में आयोजित दलित शहीदों की श्रद्धांजलि सभा में यह बात कही। गदर ने बताया कि वह इन तीन शहीदों को बहुत अच्छी तरह जानते हैं। इन शहीदों ने क्रांतिकारी आंदोलन और अम्बेडकर की विचारधाराओं को जोड़कर संघर्ष किया है। इस कार्यक्रम लोक गायक गदर ने अपनी शैली में गीत गाये और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने बताया कि बालनाथम ने शहरी इलाकों में मलिन बस्तियों के अन्याय के खिलाफ लड़ाई संघर्ष किया, जबकि राजाराम ने ग्रामीण इलाकों में अन्याय खिलाफ आंदोलन किया। जब राजाराम की मौत हो गई थी, तब मंथनी गया था। लोगों में उनके प्रति अपार श्रद्धा थी। एक नेता को तैयार करने और एक आंदोलन जारी रखना बहुत मुश्किल होता है। इसके लिए बहुत लंबा समय लगता है। शासक वर्गों की राजनीतिक और अधिकार नागरिकों की विचारधारा पर आधारित होनी चाहिए।

गदर ने आगे कहा कि मानव समाज को तबाह करने वाली साजिशों को नाकाम करने के लिए क्रांतिकारी आंदोलन और जाति के लिए लड़ने की विचारधारा जानी चाहिए। इस समय हमारे संस्कृति पर आक्रमण हो रहा है। नव राष्ट्र निर्माण के लिए संषर्ष की विचारधारा आनी चाहिए। शहीदों की आकांक्षाओं को पूरा करना है। श्रद्धांजलि अर्पित करने का मतलब है कि उनके दिखाये हुए मार्ग पर चलना। इस तरह गायक ग़दर ने अपने गीतों के जरिये राष्ट्र के निर्माण के लिए अपने प्राणों की आहुति दे चुके शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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