हैदराबाद : दशहरा त्योहार के समय तेलंगाना के राज्य पक्षी नीलकंठ (पालपिट्टा) के अवैध कब्जे पर हैदराबाद पुलिस ने कार्रवाई की है। त्योहार की परंपरा के नाम पर पक्षियों को पिंजरों में बंद करके दिखाना, उन्हें पैसे के लिए इस्तेमाल करना जैसी घटनाओं पर अधिकारियों ने एक बार फिर चेतावनी जारी की है। नागरिकों से मिली सूचना पर शहर के 3 इलाकों में जांच पड़ताल करके कुल 4 नीलकंठ पक्षियों को पुलिस ने बचाया। उन्हें वन विभाग के अधिकारियों को सौंप दिया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि बेजुबान जीवों को प्रताड़ित करने वालों पर कानून के मुताबिक कार्रवाई करेंगे। इस घटना से जुड़ी जानकारी पर हैदराबाद सीपी वीसी सज्जनार ने एक्स पर प्रतिक्रिया दी।
कुछ लोगों का मानना है कि तेलंगाना के राज्य पक्षी के रूप में पहचान पाए नीलकंठ को दशहरे के दिन देखने से शुभ होता है। लेकिन इस मान्यता का सहारा लेकर पक्षियों को पकड़कर बंद करना, मंदिरों के पास दिखाना, उनसे पैसे कमाना जैसी हरकतें हो रही हैं। इस पर पक्षी संरक्षण संगठनों ने पहले भी चिंता जताई थी। हाल ही में हैदराबाद में सामने आई घटनाएं इस समस्या की गंभीरता को एक बार फिर याद दिला रही हैं।
हैदराबाद सिटी पुलिस को मिली सूचना पर तीन अलग-अलग इलाकों में जांच पड़ताल की गई। लंगरहाउस के बापूघाट के पास मंदिर में तंग पिंजरों में रखे दो नीलकंठ पक्षियों को पहचान कर छुड़ाया। बाद में उन्हें केबीआर पार्क के वन अधिकारियों को सौंप दिया। छत्रीनाका के श्री चित्रगुप्त स्वामी मंदिर के पास पेड़ पर पिंजरा लटकाकर बंद किए गए एक और नीलकंठ को पुलिस ने बचाया।
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मंगलहाट के बालाजीनगर मंदिर के पास पिंजरे में रखे एक और नीलकंठ को भी छुड़ाया। पुलिस ने बताया कि इन दोनों पक्षियों को भी वन विभाग के अधिकारियों को सौंप दिया। अधिकारियों ने बताया कि इस घटना के दोषियों पर वन विभाग के साथ मिलकर कानूनी कार्रवाई करेंगे। पुलिस ने लोगों से अपील की कि वन्यजीवों को बंद करना, उन्हें अवैध रूप से बेचना, इस तरह प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल करना जैसी हरकतों को बढ़ावा न दें।
इस नीलकंठ को बंद करने पर हैदराबाद सीपी सज्जनार ने ट्वीट किया। “आसमान में आजादी से उड़ने वाले तेलंगाना के राज्य पक्षी नीलकंठ को दशहरे के समय कुछ लोगों ने स्वार्थ के लिए लोहे के पिंजरों में बंद कर दिया। बेजुबान जीवों को प्रताड़ित करने पर कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई होगी, ऐसा हमने पहले ही स्पष्ट चेतावनी दी थी, फिर भी कुछ लोगों ने अनसुना करके उन बेसहारा पक्षियों को भारी परेशानी में डाल दिया। सतर्क नागरिकों से मिली पक्की सूचना पर हैदराबाद सिटी पुलिस ने तुरंत प्रतिक्रिया देकर, तीन अलग-अलग इलाकों में छापे मारकर कुल 4 नीलकंठ पक्षियों को जिंदा बचाया”।
सीपी ने कहा, “लंगरहाउस बापूघाट के पास मंदिर में तंग पिंजरों में नरक यातना झेल रहे दो नीलकंठ पक्षियों को छुड़ाकर केबीआर पार्क के वन अधिकारियों को सौंपा गया, जबकि छत्रीनाका श्री चित्रगुप्त स्वामी मंदिर के पास पेड़ पर पिंजरा लटकाकर कैद किए गए एक नीलकंठ को, और मंगलहाट बालाजीनगर मंदिर के पास पिंजरे में रखे एक और नीलकंठ को रेस्क्यू करके वन अधिकारियों को सौंपा गया। दोषियों पर वन विभाग के समन्वय से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी”।
सज्जनार ने सुझाव दिया, “त्योहार के नाम पर एक बेसहारा पक्षी को बंद करके, खाना-पानी के बिना प्रताड़ित करके देखना किसी के लिए अच्छा नहीं करता.. यह हमारे समाज के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। जान के डर से पिंजरे की सलाखों के बीच तड़प रहे पक्षी के रोने में शुभ कैसे दिखेगा? सच्ची भक्ति का मतलब जीवदया ही है, प्रकृति को कैद करना नहीं। बेजुबान जीवों की आजादी छीनकर, पैसों के शिकार के लिए इस तरह के अमानवीय तौर-तरीकों को कोई बढ़ावा न दे। वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाएं कहीं भी दिखें तो तुरंत टोलफ्री नंबर 18004255364, 9803338666, डायल 112 पर जानकारी देकर जिम्मेदार नागरिक के रूप में व्यवहार करने की अपील कर रहे हैं”।
हैदराबाद में नीलकंठ पक्षियों को बंद करना नई बात नहीं है। पिछले दशहरा त्योहारों के समय भी ऐसी घटनाएं सामने आई थीं। 2025 अक्टूबर में ग्रेटर हैदराबाद सोसाइटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स (जीएचएसपीसीए) के स्वयंसेवकों ने शहर के 4 इलाकों में 6 नीलकंठ पक्षियों को बचाया था। आबिड्स के एक पेट शॉप पर बिक्री से जुड़ी घटना में एक पक्षी को जब्त किया गया, जबकि ताड़बंद हनुमान मंदिर के आसपास 3 पक्षियों को.. सिकंदराबाद के महाकाली पुलिस स्टेशन क्षेत्र में एक को.. आरके पुरम के अष्टलक्ष्मी मंदिर के पास एक और पक्षी को बचाया।
नीलकंठ पक्षियों के संरक्षण के लिए काम कर रही जीएचएसपीसीए के आंकड़ों के मुताबिक.. 2019 में तीन पक्षियों को.. 2020 में पांच को.. 2021 में 11 पक्षियों को बचाया। संगठन ने बताया कि 2022, 2023 साल में आठ-आठ पक्षियों को.. 2024 में नौ पक्षियों को बचाया। दशहरा त्योहार से पहले तेलंगाना वन विभाग ने भी नीलकंठ पक्षियों को पिंजरों में बंद करने पर सख्त कार्रवाई करने का अधिकारियों को आदेश दिया था। वन विभाग के उच्च अधिकारी ने बताया कि पिछले साल त्योहार के समय 28 पिंजरों में मौजूद नीलकंठ पक्षियों को वन अधिकारियों ने जब्त करके छुड़ाया।
पक्षी संरक्षण कार्यकर्ता चेतावनी दे रहे हैं कि नीलकंठ पक्षियों को बंद करने से उन्हें भारी तनाव, चोटें, कमजोरी जैसी समस्याएं होती हैं। स्वाभाविक रूप से कीड़ों को भोजन के रूप में लेने वाले इन पक्षियों को पिंजरों में सही भोजन, पानी न मिलना भी जान के खतरे का कारण बन सकता है। बता रहे हैं कि पंख काटना, पैर और शरीर को बांधना जैसी हरकतें पक्षियों की सेहत को नुकसान पहुंचाती हैं।
