हैदराबाद: महानगर में आने वाली गर्मियों में पानी की कमी न हो, इसके लिए हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन वॉटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड (HMWSSB) पहले से कदम उठाने के लिए तैयार हो रहा है। निर्माण क्षेत्र, उद्योग, पार्क, ग्रीनबेल्ट, लैंडस्केपिंग जैसी जरूरतों के लिए पीने के पानी की जगह शुद्ध किए गए सीवेज पानी के उपयोग के लिए विशेष योजना बनाई है। जलमंडली एमडी अशोक रेड्डी ने बताया कि इसके तहत 1 नवंबर से ‘डायल-ए-ग्रीन टैंकर’ सेवाएं शुरू करने के लिए इंतजाम कर रहा है। इस सेवा के जरिए जरूरतमंदों को शुद्ध किया गया पानी टैंकरों से सप्लाई करने का अधिकारियों ने लक्ष्य रखा है।
एल नीनो प्रभाव से बारिश कम होने की संभावना और सिंगूर-मंजीरा जलाशयों में पानी के भंडार पर दबाव बढ़ सकता है, इस चिंता के बीच आने वाली गर्मी को ध्यान में रखकर जलमंडली अभी से कार्ययोजना तैयार कर रहा है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के निर्देशों के अनुसार पीने के पानी के स्रोतों पर अनावश्यक बोझ न पड़े, इसके लिए वैकल्पिक पानी के उपयोग को बढ़ावा देने का जलमंडली ने फैसला किया। आमतौर पर गर्मी नजदीक आने के बाद ज्यादा दिखने वाली पानी की समस्याएं इस बार पहले ही सामने आ रही हैं। हैदराबाद शहर के कई इलाकों की स्थितियां बता रही हैं।

भूजल की उपलब्धता कम होना, अपार्टमेंट, व्यावसायिक परिसर और अन्य जगहों में पानी की जरूरत बढ़ने से टैंकरों पर निर्भर रहने वालों की संख्या बढ़ रही है। इस पृष्ठभूमि में अधिकारी मान रहे हैं कि पीने के पानी को निर्माण कार्यों के लिए, अन्य गैर-पीने की जरूरतों के लिए उपयोग न करने से जल स्रोतों को बचाया जा सकता है। पहले चरण में रोज 100 मिलियन लीटर (100 MLD) शुद्ध किया गया सीवेज पानी गैर-पीने की जरूरतों के लिए उपलब्ध कराने का जलमंडली ने लक्ष्य रखा है। निर्माण क्षेत्र, उद्योग, पार्कों के रखरखाव, हरियाली बढ़ाने जैसे कामों के लिए इस पानी का उपयोग करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
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इस विषय पर जलमंडली मुख्यालय में क्रेडाई (CREDAI), नरेडको (NAREDCO) और तेलंगाना बिल्डर्स फेडरेशन (TBF) प्रतिनिधियों के साथ एमडी अशोक रेड्डी बैठक किए। उन्होंने सुझाव दिया कि निर्माण क्षेत्र की कंपनियां अपनी जरूरतों के लिए पीने के पानी, भूजल का उपयोग करने की जगह, और उपलब्ध शुद्ध पानी का उपयोग करें। साथ ही जलमंडली द्वारा किए जा रहे जल संरक्षण उपायों में सहयोग करने का आह्वान किया। हैदराबाद शहर के अपार्टमेंट और गेटेड कम्युनिटी के दायरे में मौजूद प्राइवेट सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से बचे हुए पानी को भी उपयोग में लाने का जलमंडली सोच रहा है। प्रारंभिक रूप से पहचाना गया है कि अब तक 51 प्राइवेट STP रजिस्टर किए हैं। उनसे रोज लगभग 1.5 MLD बचा हुआ शुद्ध पानी उपलब्ध है।
STP में शुद्ध किए गए पानी को जरूरी इलाकों तक ले जाने के लिए अधिकारी 2 तरीकों पर विचार कर रहे हैं। योजना बना रहे हैं कि नजदीकी शुद्धिकरण केंद्रों से जहां संभव हो सीधे पाइपलाइन के जरिए सप्लाई करना और अन्य इलाकों में टैंकरों के जरिए देना। पानी की गुणवत्ता, परिवहन खर्च, सप्लाई क्षमता, उपभोक्ताओं तक पहुंच जैसे विषयों को ध्यान में रखकर गाइडलाइन तैयार कर रहे हैं।
हालांकि रोज 100 MLD उपयोग पहले चरण में तय किया गया लक्ष्य है। प्राइवेट STP से अभी पहचाना गया बचा हुआ पानी सिर्फ 1.5 MLD ही है। ‘डायल-ए-ग्रीन टैंकर’ सेवाओं को आसानी से उपयोग करने के लिए विशेष डिजिटल प्लेटफॉर्म जलमंडली विकसित कर रहा है। एमडी अशोक रेड्डी ने बताया कि इस व्यवस्था के जरिए उपभोक्ता ऑनलाइन टैंकर बुक करने के साथ उनकी गतिविधियों को ट्रैक करने की सुविधा देने का अधिकारी सोच रहे हैं। इस प्लेटफॉर्म को 7 से 10 दिनों में तैयार करने का लक्ष्य रखा है।
इस तरीके से पानी उपलब्ध वाले शुद्धिकरण केंद्र, उपभोक्ताओं की जरूरतें, टैंकरों की उपलब्धता, सप्लाई दूरी जैसे विवरणों को जोड़कर पानी के वितरण को अधिक कुशलता से संभालने का सोच रहे हैं। हालांकि बुकिंग वेबसाइट, विशेष फोन नंबर, टैंकर कीमतें, सेवाएं देने वाले इलाके, पात्रता मानदंड, सप्लाई तरीका जैसे पूरे विवरण जलमंडली ने अभी घोषित नहीं किए हैं। इसलिए निर्माण कंपनियां, उद्योग और अन्य उपभोक्ता बुकिंग करने से पहले आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार करें।
जलमंडली अधिकारी मान रहे हैं कि आने वाली गर्मी को ध्यान में रखते हुए अगले मानसून शुरू होने तक जल प्रबंधन बेहद अहम है। पीने के पानी को जरूरी कामों के लिए ही उपयोग करते हुए जहां संभव हो शुद्ध किए गए पानी को विकल्प के रूप में उपयोग करें तो जलाशयों और भूजल पर दबाव कम करने का मौका रहेगा। कुल मिलाकर हैदराबाद में पानी की कमी के खतरे का सामना करने के लिए जलमंडली ला रही ‘डायल-ए-ग्रीन टैंकर’ सेवाएं वैकल्पिक जल आपूर्ति व्यवस्था के लिए एक कदम आगे के रूप में रहेंगी। हालांकि यह योजना कितने व्यापक रूप से लागू होगी, लक्ष्य रखा गया पानी की मात्रा कितनी उपलब्ध होगी, उपभोक्ताओं को कितने खर्च पर सप्लाई करेंगे, ये विषय आधिकारिक गाइडलाइन आने के बाद स्पष्ट होंगे।
