हैदराबाद : रक्षा मंत्रालय के अधीन रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम, मिश्र धातु निगम लिमिटेड (मिधानि), भारत के स्वदेशी एयरोस्पेस प्रोपल्शन के सफर में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड का एक भरोसेमंद भागीदार होने पर हर्ष का अनुभव करता है। मिधानि ने उन्नत धातु विज्ञान और स्वदेशी सामग्री प्रौद्योगिकी में अपनी क्षमताओं के माध्यम से विभिन्न एयरो-इंजन कार्यक्रमों के लिए सिंगल-क्रिस्टल सुपरअलॉय और अन्य उच्च तापमान वाली सामग्रियों सहित महत्वपूर्ण मिश्र धातुओं के स्वदेशीकरण में योगदान दिया है।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के कोरापुट डिवीजन में 2,000वें एयरो – इंजन की डिलीवरी भारत के बढ़ते स्वदेशी एयरो – इंजन इकोसिस्टम में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह अवसर मिधानि के लिए विशेष महत्व रखता है, जो महत्वपूर्ण एयरोस्पेस अनुप्रयोगों में संप्रभु क्षमता के निर्माण में रणनीतिक सामग्रियों और उन्नत मिश्र धातुओं की भूमिका को दर्शाता है। मिधानि के लिए यह विशेष रूप से उत्साहजनक था जब उसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, ओडिशा के माननीय मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशख रवि के. से विभिन्न एयरो -इंजन कार्यक्रमों में इसके योगदान के लिए सराहना मिली। यह मान्यता एयरोस्पेस प्रोपल्शन में सच्ची आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में स्वदेशी सामग्री क्षमता के महत्व को पुष्ट करती है।
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इस मील के पत्थर पर टिप्पणी करते हुए मिधानि के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. एस. वी. एस. नारायण मूर्ति ने कहा, “एयरो – इंजन में आत्मनिर्भरता का सफर महत्वपूर्ण सामग्रियों में आत्मनिर्भरता से शुरू होता है। मिधानि को मांग वाले एयरो – इंजन अनुप्रयोगों के लिए उन्नत मिश्र धातुओं को विकसित करने और देशीकरण में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और देश के एयरोस्पेस इकोसिस्टम के साथ साझेदारी करने पर गर्व है। 2,000वें इंजन का मील का पत्थर भारत की बढ़ती स्वदेशी क्षमता की ताकत को दर्शाता है और मिधानि देश के वर्तमान तथा भविष्य के एयरोस्पेस कार्यक्रमों के लिए सामरिक सामग्रियों को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।” सामग्रियों से लेकर इंजनों तक, क्षमता से लेकर आत्मनिर्भरता तक — मिधानि भारत के एयरोस्पेस सफर को शक्ति प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
