हैदराबाद : देशभर में विनायक चतुर्थी का त्योहार भक्ति और श्रद्धा के साथ बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। आकर्षक मंडप बनाकर, अलग-अलग रूपों में आकर्षक गणपति की मूर्तियां स्थापित कर पूजा की जा रही है। कहीं-कहीं फूलों, फलों और करेंसी नोटों से मूर्तियां बनाई गई हैं।
वहीं, हैदराबाद में तो गणेश उत्सव के बारे में अलग से कहने की जरूरत ही नहीं है। खैरताबाद के गणपति की देशभर में विशेष पहचान है। वैसे ही बालापुर के गणेश जी की भी। हालांकि, इस बार बेगम बाजार में गणपति की मूर्ति विशेष आकर्षण बनी हुई है।

सोने और हीरों से सजाई गई गणपति की मूर्ति भक्तों को बेहद आकर्षित कर रही है। फीलखाना इलाके में 48 किलो के ‘सोने के गणेश जी’ मुख्य आकर्षण बने हुए हैं। इस अद्भुत गणपति मूर्ति को देखने के लिए भारी संख्या में भक्त आ रहे हैं। बेहद कुशल कारीगरों ने लगभग 3.83 लाख से ज्यादा अमेरिकन डायमंड से मूर्ति को सर्वांग सुंदर बनाया है। इनके साथ-साथ 24 कैरेट सोने की परत चढ़ाई गई है। सोने और हीरों की चमक से भगवान शोभायमान होकर जगमगा रहे हैं। इस दिव्य सुंदर रूप को देखकर भक्त मंत्रमुग्ध हो रहे हैं।
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आयोजकों ने बताया कि मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा और कलियुग के भगवान बालाजी के रूपों से प्रेरणा लेकर इस मूर्ति को बनाया गया है। इन दोनों दिव्य रूपों के संगम से विराजे ये स्वर्ण गणपति भक्तों को अनोखे रूप में दर्शन दे रहे हैं। इससे यह गणपति मूर्ति शहर में सबसे खास के तौर पर मशहूर हो रही है।
फीलखाना के अनिल अग्रवाल, आधार अग्रवाल और निखितेश अग्रवाल नामक भाइयों ने इस गणपति मूर्ति को बनवाया है। वहां उनकी दुकान के पास लगाए गए मंडप में इस गणपति मूर्ति की स्थापना की गई है। तीन फीट ऊंची और 48 किलो वजनी इस गणपति मूर्ति को कुल 8 कारीगरों ने बनाया है। 11 दिनों तक गणेश जी की पूजा की जाएगी।
