आप सभी हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। हिंदी दिवस के इस विशेष अवसर पर आप सबसे कुछ बातें साझा करना चाहता हूँ। मेरी मातृभाषा तेलुगु है और मैंने अपनी शिक्षा-दीक्षा भी तेलुगु और अंग्रेज़ी में ही पूरी की। पर जब मैं संगठन में विभिन्न राज्यों के सहकर्मियों के साथ काम करने लगा, तो धीरे-धीरे यह समझ आया कि हिंदी सचमुच हम सबको आपस में जोड़ने वाली एक कड़ी है।
हमारे देश में 22 अनुसूचित भाषाएँ हैं और सैकड़ों बोलियाँ बोली जाती हैं। मैं जब भी उत्तर भारत के अपने कार्यालयों का दौरा करता हूँ, तो पाता हूँ कि वहाँ के साथी चाहे कोई भी भाषा घर में बोलते हों, हिंदी में बात करते ही एक जुड़ाव-सा महसूस होता है। यही अनुभव मुझे बार-बार यह सोचने पर मजबूर करता है कि हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि हमारे संस्थान और हमारे देश की साझा पहचान है। मेरा अपना निजी अनुभव रहा है कि हिंदी मेरी मातृभाषा से अलग है किंतु भावनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए इन दोनों में कोई अंतर नहीं हैं।

केंद्र सरकार के कार्यलयों में हिंदी का अपना महत्व है। हमारे संगठन में भी मैंने देखा है कि कार्यालयीन पत्राचार और सूचनाएँ अक्सर हिंदी और अंग्रेज़ी, दोनों में तैयार की जाती हैं, ताकि हर कर्मचारी तक बात सही तरीके से पहुँचे; रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों और सार्वजनिक स्थलों पर हिंदी में लिखी सूचना पट्टिकाएँ लोगों की रोज़मर्रा की मदद करती हैं; सरकारी योजनाओं और नीतियों की जानकारी हिंदी में देने से आम जनता तक उनकी पहुँच बढ़ती है। मैं तकनीकी क्षेत्र में काम कर रहे हिंदी भाषा के जानकार विद्वानों से निवेदन करना चाहता हूँ कि आप बच्चों के लिए हिंदी में तकनीकी साहित्य का सृजन करें। इससे हमारी नई पीढ़ी को भी प्रेरणा मिलेगी। तकनीकी साहित्य भारत के आम जन तक हिंदी में पहुँचेगा।
एक दक्षिण भारतीय होने के नाते जब मैं हिंदी सीख रहा था, तब यह सिर्फ एक कामकाजी ज़रूरत लगती थी। पर समय के साथ यह मेरे लिए अपने उत्तर भारतीय सहकर्मियों, मित्रों और ग्राहकों से जुड़ने का एक सहज माध्यम बन गई।
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हिंदी भाषा से एकता की भावना प्रकट होती है। महात्मा गांधी ने हिंदी को ‘जनभाषा’ कहा था, और आज भी यह बात उतनी ही सच लगती है। स्वतंत्रता संग्राम में भी हिंदी ने अलग-अलग प्रांतों के लोगों को एक मंच पर लाने का काम किया था। हिंदी फिल्में और साहित्य भी इस भावना को आगे बढ़ाते रहे हैं — चाहे कोई तेलुगु भाषी हो, तमिल भाषी हो, या बांग्ला भाषी, हिंदी फिल्म देखते समय हम सब एक जैसा ही अनुभव करते हैं।
मैं मानता हूँ कि अपनी मातृभाषा से प्रेम करना बहुत ज़रूरी है और मुझे अपनी तेलुगु भाषा पर गर्व है। पर साथ ही, हिंदी को अपनाना मुझे अपने देश के बाकी हिस्सों से और करीब से जोड़ता है। मेरा मानना है कि जब हम अपनी मातृभाषा के साथ-साथ हिंदी को भी सहजता से अपनाते हैं, तभी हम सच में ‘विविधता में एकता’ के उस भाव को जी पाते हैं, जिस पर हमारा देश खड़ा है।
आइए, हिंदी दिवस के इस अवसर पर हम सब यह संकल्प लें कि अपनी-अपनी मातृभाषाओं का सम्मान करते हुए, हिंदी को भी एक-दूसरे से जुड़ने के माध्यम के रूप में अपनाएँगे। जय हिंद।

डॉ. एस. वी. एस. नारायण मूर्ति,
अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, मिधानि,
हैदराबाद
