हैदराबाद : बोलारम स्थित मद्रास रेजिमेंट में बड़े पैमाने पर हथियार चोरी की घटना की जांच जारी रहने के बीच उसी इलाके में डेटोनेटर मिलने से हड़कंप मच गया। फायरिंग रेंज के पीछे दीवार के पास प्लास्टिक की बाल्टी में 8 बंडलों में रखे कुल 160 इलेक्ट्रिकल डेटोनेटर्स को आर्मी स्टाफ ने देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की जांच की। बताया जा रहा है कि मल्काजगिरी बॉम्ब डिस्पोजल टीम के निर्देश पर डेटोनेटर्स को सुरक्षित रखा गया है। उन्हें वहां कौन छोड़ गया? क्या किसी काम के तहत वहां लाए गए थे? या किसी अन्य जगह से लाकर वहां फेंक दिए गए? इन सभी एंगल से पुलिस जांच कर रही है। मिले डेटोनेटर्स की कीमत लगभग 32 हजार रुपये तक होने का अनुमान है।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था वाले आर्मी क्षेत्र के मद्रास रेजिमेंट में यह घटना होना चर्चा का विषय बन गया है। इससे अधिकारी सतर्क हो गए हैं। खासकर हथियार चोरी के मामले की जांच चल रही है। उसी दौरान डेटोनेटर मिलने से पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया है। क्या दोनों घटनाओं में कोई संबंध है? या वे अलग-अलग घटनाएं हैं? इस पहलू पर भी जांच जारी है।
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आर्मी अधिकारियों ने पाया है कि दो दिन पहले मद्रास रेजिमेंट में हथियार रखने वाले कमरे का ताला अज्ञात लोगों ने तोड़कर हथियार और गोला-बारूद चोरी की है। इस घटना पर आर्मी अधिकारियों की शिकायत से बोलारम पुलिस स्टेशन में सोमवार को मामला दर्ज हुआ। रक्षा मामलों से जुड़ा केस होने से जांच की जानकारी पुलिस गोपनीय रख रही है। सिकंदराबाद कैंटोनमेंट सीमा में रक्षा बलों के प्रशिक्षण संस्थान, विभिन्न रेजिमेंट चल रहे हैं। उनमें मद्रास रेजिमेंट भी एक है। यहां आर्मी स्टाफ द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हथियारों को सुरक्षित रखने वाला विशेष विभाग है। अनुमति प्राप्त स्टाफ के अलावा अन्य लोगों को प्रवेश न होने वाले इस इलाके में हथियारों के कमरे का ताला तोड़ा जाना सुरक्षा खामियों पर सवाल उठा रहा है।
हथियार चोरी में चार एके-47 राइफलें, छह पिस्टल, एक इंसास राइफल के साथ ही गोला-बारूद चोरी होने की प्रारंभिक पहचान की गई है। इन हथियारों का पता लगाने के लिए पुलिस, रक्षा अधिकारी मिलकर जांच जारी रखे हुए हैं। हाल ही में डेटोनेटर मिलने से चोरी के मामले में जांच और भी अहम हो गई है। डेटोनेटर्स के स्रोत, उन्हें वहां लाने वाले लोग और हथियार चोरी से उनका कोई संबंध है या नहीं। इन सभी विषयों की जांच के बाद जांच एजेंसियां स्पष्टता पर पहुंचने की संभावना है।
