नोट- वर्ष 2026 का एफआईएच (FIH) पुरुष और महिला हॉकी वर्ल्ड कप संयुक्त रूप से बेल्जियम और नीदरलैंड्स (हॉलैंड) में खेला जा रहा है। यह टूर्नामेंट 15 से 30 अगस्त 2026 तक आयोजित हो रहा है। यह मैच बेल्जियम: वेव्रे (Wavre) स्थित बेलफियस हॉकी एरिना और नीदरलैंड्स: एमस्टेलवीन (Amstelveen) स्थित वैगनर हॉकी स्टेडियम में खेले जाएंगे।
हैदराबाद/बेल्जियम/नीदरलैंड्स (हॉलैंड) : एक समय हॉकी कभी भारत की धड़कन हुआ करती थी। दुनिया में कहीं भी टूर्नामेंट होता था तो माना जाता था कि मेडल भारत का ही होगा। इसी दबदबे के साथ भारत ने ओलंपिक में 8 गोल्ड, 1 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज मेडल जीते। बाकी इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स में भी कई मेडल जीते हैं। हालांकि, वर्ल्ड कप में भारत उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया। उसे सिर्फ 3 मेडल से ही संतोष करना पड़ा। 1971 में बार्सिलोना में भारत ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। 1973 में एम्स्टर्डम में सिल्वर मेडल जीता। इसके बाद 1975 में कुआलालंपुर में पाकिस्तान को 2-1 से हराकर पहली बार गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उसके बाद से भारत ने किसी भी वर्ल्ड कप में मेडल की दिशा में कदम नहीं बढ़ाया।

नीदरलैंड्स: एमस्टेलवीन (Amstelveen) स्थित वैगनर हॉकी स्टेडियम
फैंस का गुस्सा
1971 में वर्ल्ड कप शुरू हुआ तो पहले तीन बार भारत ने मेडल जीते। लेकिन 1975 के बाद हुए वर्ल्ड कप से भारत का पतन शुरू हो गया। उसके बाद 12 बार टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के बावजूद छोटी टीमों के खिलाफ भी जीत नहीं पाने की स्थिति आ गई। नतीजतन 2023 तक भारत सेमीफाइनल बर्थ तक भी पक्की नहीं कर पाया। कभी ध्यानचंद, बलबीर सिंह जैसे दिग्गजों के खेल से चमका भारत का हॉकी, बाद में आई नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के खेल के कारण कई आलोचनाओं का शिकार हुआ। 1980 ओलंपिक में गोल्ड जीतने के बावजूद वर्ल्ड कप में मेडल न जीत पाने से आलोचनाएं और बढ़ गईं। इसके साथ ही पड़ोसी देश पाकिस्तान का 4 बार वर्ल्ड कप जीतना फैंस को और गुस्सा दिला रहा था।
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पुराना गौरव मिला
कभी सामान्य ग्राउंड्स पर खेली जाने वाली हॉकी धीरे-धीरे आर्टिफिशियल टर्फ की तरफ बढ़ गई। भारत के खिलाड़ी इसके आदी नहीं हो पाए। हार का एक कारण ये था तो दूसरा कारण नए नियम थे। इन नियमों को ठीक से न समझ पाने के कारण भारत का हॉकी धीरे-धीरे अपना दबदबा खो बैठा। इसी समय यूरोप के देशों के खिलाड़ियों ने फिटनेस को प्राथमिकता दी जिससे खेल में रफ्तार बढ़ गई। लेकिन इन दोनों मामलों में भारत के खिलाड़ी काफी पीछे रह गए। नतीजतन सही फिटनेस न होने से खेल में गति कम हो गई। इसके कारण वर्ल्ड कप के साथ-साथ ओलंपिक में भी भारत का प्रदर्शन गिरता गया। 10 साल तक भारी उतार-चढ़ाव झेलने के बाद विदेशी कोचों के आने से भारत ने फिर से वापसी की। 2020 टोक्यो और 2024 पेरिस ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल और एशियन गेम्स में मेडल जीतने के बाद लगा कि भारत के हॉकी को फिर से पुराना गौरव मिल गया है।

कड़ी टक्कर
हालांकि, अब तक सब ठीक था, वर्ल्ड कप आते ही असली कहानी शुरू होती है। कम से कम मुकाबला देने लायक भी भारत का प्रदर्शन नहीं है। 2014 में नीदरलैंड्स में हुए टूर्नामेंट में भारत 9वें स्थान पर रहा। इसके बाद 2018 और 2023 में अपने ही देश में हुए टूर्नामेंट में लगातार 6वें और 9वें स्थान पर रहा। 5 दशक के इंतजार को इस बार खत्म करने की फैंस की बड़ी उम्मीद है, लेकिन इस बार भी वो सपना पूरा होता नहीं दिख रहा। क्योंकि टूर्नामेंट की मेजबानी बेल्जियम और नीदरलैंड्स कर रहे हैं, इसलिए भारत से ज्यादा उम्मीदें नहीं हैं। ग्रुप-D में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स के साथ कड़ी टक्कर मिलेगी। 16 टीमों वाले इस टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल को छोड़िए, कम से कम सेमीफाइनल तक पहुंच जाए तो भी बड़ी बात होगी।

कुल मिलाकर…
2025 एशिया कप में पाकिस्तान के दूर रहने के कारण वो टूर्नामेंट जीतकर भारत ने वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई किया। उसके बाद हुए FIH प्रो लीग में फिर निराशाजनक प्रदर्शन रहा। 9 टीमों में भारत 8वें स्थान पर रहा। वर्ल्ड कप से पहले राउरकेला प्रो लीग में भारत का नीदरलैंड्स और जर्मनी को हराना आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहा। मौजूदा टीम भी अच्छे फॉर्म में है। घरेलू मैदान पर मैच नहीं होने के कारण टीम पर ज्यादा दबाव नहीं होगा। डिफेंस भारत की सबसे बड़ी ताकत है। बेस्ट पेनल्टी कॉर्नर खिलाड़ी हरमनप्रीत सिंह के खेल पर ही भारत की ज्यादा निर्भरता है। लेकिन मिडफील्ड की कमजोरियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। कुल मिलाकर पिछली नाकामियों को भूलकर मैदान में टीम के रूप में खेलकर जीत हासिल की जाए तो मेडल अपने आप आ जाएंगे।

बेल्जियम: वेव्रे (Wavre) स्थित बेलफियस हॉकी एरिना
महिला मैच से उम्मीद
महिला मैच भी पुरुष टूर्नामेंट के साथ होने के कारण इस बार टूर्नामेंट में थोड़ी दिलचस्पी बढ़ी है। लेकिन पुरुष टीम के मुकाबले भारत की महिला टीम काफी कमजोर है। 1974 वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल तक पहुंचकर मेडल की उम्मीद जगाई थी, लेकिन चौथे स्थान पर रह गई थी। इसके बाद 2018 में रानी रामपाल की कप्तानी में क्वार्टर फाइनल तक पहुंची, लेकिन पेनल्टी शूटआउट में आयरलैंड से हारकर खाली हाथ लौट आई। उसके बाद हुए 5 टूर्नामेंट में निराश किया। 2022 के टूर्नामेंट में 9वें स्थान से संतोष करना पड़ा। इसलिए इस बार भी ज्यादा उम्मीदों के बिना मैदान में उतर रही है। इस बार भी भारत को मुश्किल ड्रॉ मिला है। ग्रुप-D में चीन, इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका से भिड़ना है। इनमें जीतकर आगे बढ़ना हमारे खिलाड़ियों के लिए तलवार की धार पर चलने जैसा है। टूर्नामेंट के लिए चुनी गई टीम में ज्यादातर यंगस्टर्स हैं और कई लोगों का ये पहला वर्ल्ड कप है, इसलिए स्वाभाविक रूप से दबाव ज्यादा होगा। अब देखना है कि इस दबाव को पार करके ये कहां तक जाते हैं।
