हैदराबाद: तेलंगाना सिनेमा की मधुर गायिका एस. जानकी का अंतिम संस्कार 12 जुलाई को शाम 5 बजे कणियरहुंडी गांव के फार्म हाउस में किया जाएगा। इसके चलते अंतिम संस्कार की तैयारियां जोरों पर जारी है। इससे पहले जानकी का पार्थिव शरीर लोगों के दर्शनार्थ मैसूर स्थित महाराजा कॉलेज ग्राउंड में 4 बजे तक रखा जाएगा। गौरतलब है कि एस. जानकी (88) का बीमारी के कारण 11 जुलाई को निधन हो गया था। उन्हें हार्ट अटैक आया था। मैसूर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने आखिरी सांस ली। उनकी मृत्यु की खबर सुनकर सिनेमा जगत स्तब्ध रह गया। सिनेमा जगत के दिग्गजों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
50 हजार से ज्यादा गानों के साथ रिकॉर्ड
23 अप्रैल 1938 को आंध्र प्रदेश के तत्कालीन गुंटूर जिले के रेपल्ले के पास पल्लापटला गांव में जन्मी जानकी को बचपन से ही संगीत में रुचि थी और वह गायिका बनीं। उन्होंने नादस्वरम विद्वान पेद्दीस्वामी से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा ली। 1957 में तमिल फिल्म विधियिन विलयाट्टु से उन्होंने प्लेबैक सिंगर के रूप में सिनेमा में प्रवेश किया। तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, हिंदी के साथ-साथ 20 से ज्यादा भारतीय और विदेशी भाषाओं में गाने गाए। अपने करियर में 50 हजार से ज्यादा गाने गाकर उन्होंने एक दुर्लभ रिकॉर्ड बनाया। तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के लगभग सभी प्रमुख संगीत निर्देशकों के साथ काम करने का श्रेय उन्हें प्राप्त है।
इन दिग्गजों के साथ काम
जानकी ने घंटसाला, एम. एस. विश्वनाथन, के. वी. महादेवन, चक्रवर्ती, इलैयाराजा, राज-कोटि, एम. एम. कीरावाणी, ए. आर. रहमान, बप्पी लहरी जैसे कई संगीतकारों के साथ काम किया। एस. पी. बालासुब्रमण्यम के साथ गाए उनके युगल गीत दक्षिण भारतीय सिनेमा संगीत में अमर हो गए। साथ ही पी. बी. श्रीनिवास, डॉ. राजकुमार, के. जे. येसुदास जैसे दिग्गजों के साथ भी उन्होंने कई हिट गाने गाए। हालांकि, एस. जानकी के रूप में विशेष पहचान और मेलोडी क्वीन का नाम दिलाने वाला गाना फिल्म बावा मरदल्लु का गाना “नीली मेघाललो..” था। इस गाने से उनकी आवाज की मिठास और भाव अभिव्यक्ति की खूब प्रशंसा हुई। उन्होंने गानों में मिमिक्री मिक्स करके कई फिल्मों में दर्शकों को प्रभावित किया। पुरानी पीढ़ी से लेकर आज की पीढ़ी तक जानकी की मधुर आवाज के दीवाने कई फैन हैं।
नहीं भूल पाने वाले गाने
गायिका जानकी के आज भी न भूल पाने वाले गानों में – पदहारेल्ला वयसु फिल्म का “सिरिमल्ले पुवा” गाना आज भी बहुत लोगों का पसंदीदा गाना है। पूजा फलं में “पगले वेन्नेल जगमे ऊयल”, सिरिसिरि मुव्वा में “झुम्मंदि नादं”, सागर संगमं में “मौनमेलनोयि” जैसे गानों के साथ-साथ “आकाशं एनाटिदो अनुरागं आनाटिदि”, “जाबिल्ली कोसं आकाशमल्ले”, “मनसा तुल्लिपडकेई अतिगा आशपडकेई”, “वेन्नेल्लो गोदारि अंदं”, “कन्ने पिल्लवाणि”, “गुन्न मामिडि”, “नरुडा ओ नरुडा”, “कदिले कालमे जीवनं मेघं तेल्ला कागितं” जैसी कई मधुर गीतों को उन्होंने अपनी आवाज दी।
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पुरस्कार और सम्मान
1986 में तमिलनाडु सरकार ने उन्हें “कलैमामणि” की उपाधि से सम्मानित किया। वहीं कर्नाटक सरकार ने “राज्योत्सव प्रशस्ति” प्रदान की। मैसूर विश्वविद्यालय से उन्हें मानद डॉक्टरेट भी मिली। 4 राष्ट्रीय पुरस्कारों सहित अपने करियर में उन्होंने कुल 32 पुरस्कार प्राप्त हुए। इनमें केरल सरकार से 11, तमिलनाडु सरकार से 6 और ओडिशा से 1 पुरस्कार शामिल हैं। उन्होंने 10 नंदी पुरस्कार भी जीते हैं। केंद्र सरकार ने उन्हें पद्मभूषण देने की घोषणा की, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। 1997 में फिल्मफेयर, 2002 में अचीवर अवार्ड, 2005 में स्वरालय येसुदास विशेष पुरस्कार, 2011 में कर्नाटक बसव भूषण अवार्ड, 2012 में नित्यनूतन गायन के लिए विजया म्यूजिकल अवार्ड, 2013 में मा म्यूजिक लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, 2015 में साइमा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड और 2017 में सेफ-वेटूरी लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार भी जानकी को मिले हैं।
