हैदराबाद (सरिता सुराणा की रिपोर्ट) : सूत्रधार साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, हैदराबाद भारत द्वारा 79 वीं मासिक गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया गया। संस्थापिका सरिता सुराणा ने सभी सदस्यों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन किया और वरिष्ठ गीतकार विनीता शर्मा को गोष्ठी की अध्यक्षता करने हेतु मंच पर आमंत्रित किया। शुभ्रा मोहन्तो ने महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला द्वारा रचित सरस्वती वन्दना से गोष्ठी का शुभारम्भ किया और कबीरदास जी के भजनों की सस्वर प्रस्तुति दी। यह गोष्ठी दो सत्रों में आयोजित की गई।

प्रथम सत्र में विषय प्रवेश करते हुए सरिता सुराणा ने कबीरदास जी के जन्म से लेकर उनके रचना-संसार के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की और कहा कि कबीरदास जी न केवल कवि थे बल्कि समाज सुधारक भी थे। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों की सदैव आलोचना की। उनके लिए सभी धर्मावलंबी एक समान थे और वे सबको ही ढोंग और आडम्बरों से दूर रहने को कहते थे। उनका एक-एक दोहा जीवन की सीख देने वाला है। वे आज भी कालजयी रचनाकार हैं।

दर्शन सिंह ने कबीर साहित्य के तीनों भागों- साखी, सबद और रमैनी की चर्चा की और उनके कई दोहों के माध्यम से कबीरदास के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। आर्या झा ने कहा कि कबीरदास ने आत्मा और परमात्मा की स्पष्ट व्याख्या की। उन्होंने उनके जीवन से जुड़े कई अछूते प्रसंगों की चर्चा की। उपस्थित सभी सदस्यों ने परिचर्चा को बहुत ही सुन्दर और सार्थक बताया।
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द्वितीय सत्र में श्रीया धपोला ने मुक्त छंद कविता प्रस्तुत की तो बिनोद गिरि अनोखा ने भोजपुरी गजल सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। किरन सिंह ने स्वरचित दोहे और पद प्रस्तुत किए तो दर्शन सिंह ने अपने तीखे तेवरों से सज्जित रचना का पाठ किया। सुहास भटनागर ने अपने चिर परिचित अंदाज में अपनी लघु कहानी प्रस्तुत की। रिमझिम झा ने कटक, उड़ीसा में मनाए जाने वाले रजपर्व की जानकारी दी और धरती माता के प्रति आभार प्रकट करते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की। आर्या झा ने अपनी अपनी लघुकथा का वाचन किया। गजानन पाण्डेय ने समसामयिक विषयों पर आधारित रचना का पाठ किया। सरिता सुराणा ने कबीरदास जी का पद प्रस्तुत किया।
विनीता शर्मा ने अध्यक्षीय उद्बोधन में सभी सहभागियों की रचनाओं की सराहना की और अपने गीतों की शानदार प्रस्तुति दी। उन्होंने बाहर करते सही व्यवस्था, अंदर रहते बिखरे बिखरे गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में तृप्ति मिश्रा और सिंह साहब की उपस्थिति रही। आर्या झा के धन्यवाद ज्ञापन से गोष्ठी सम्पन्न हुई।
