हैदराबाद : स्वतंत्रता सेनानी पंडित गंगाराम स्मारक मंच की ओर से हिन्दी पत्रकारिता दिवस के उपलक्ष्य में डेली हिंदी मिलाप संपादक विपमा वीर और सुप्रसिद्ध लेखिका डॉ कमला गणोरकर को पुरस्कृत किया जाएगा। यह भव्य कार्यक्रम 30 मई को सायं 5 बजे पंडित नरेंद्र भवन सभागृह (राजमोहल्ला, नारायणगुड़ा) में होगा। मंच के संस्थापक अध्यक्ष भक्तराम और मंत्री श्रुतिकान्त भारती यहां जारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी।
उन्होंने आगे बताया कि इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी होंगे। विशेष अतिथि प्रोफेसर आर. एस. सर्राजू, ( वरिष्ठ विशेषज्ञ, भारतीय भाषा समिति, नई दिल्ली ) और सम्माननीय अतिथि डॉ. संगीता व्यास (चेयरपर्सन, बोर्ड ऑफ़ स्टडीस, उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद) होंगे। मंच ने सभी हिन्दी प्रेमियों से निवेदन किया है कि इस भव्य पुरस्कृत समारोह में सम्मिलित होकर कार्यक्रम को सफल बनाएं।

मंच का संदेश
प्रत्येक आन्दोलन के लिए लेखन व वाणी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे ही एक लेखक की लेखनी और वाणी ने हैदराबाद स्टेट में अहम भूमिका निभाई है। उनका नाम था पंडित गंगाराम जी। गंगाराम जी ने 23 वर्ष की उम्र में सन् 1939 में आर्य सत्याग्रह हेतु नियम पूर्वक एक समाचार बुलेटिन प्रकाशित करके रात के अंधेरे में बस्तियों की दीवारों पर चिपकाते थे। इस तरह जन-जन में धर्म युद्ध के लिए सहानुभूति व जोश पैदा करके दिखा दिया। इसके बाद 1946 में “ऋषि चरित्र प्रकाश” पुस्तक लिखी और उसे शिक्षण संस्थानों में पढ़ाने की स्वीकृति आर्य प्रतिनिधि सभा ने दी, लेकिन तत्कालीन निज़ाम शासन द्वारा इसे सरकार के विरुद्ध विद्रोह की एक ज्वाला समझकर इसे जब्त कर दिया और प्रतिबंध लगा दिया था। इसके पश्चात स्वतंत्र पत्रकारिता और लेखनी को आगे चलाने के लिए “वर्णाश्रम पत्रिका” का प्रकाशन लगभग 30 वर्षों तक किया। इसके अलावा आपके लेख आर्य जगत के पत्र – पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। इसके अलावा “वेद ईश्वरीय ज्ञान है – कुरान बाइबल नहीं”, “मक्का में हल्ला – हैदराबाद में दंगा”, “बे मां-बाप के 2 करोड़ बच्चे”, “मंदिरों की भूमि बेचना पाप है”, “हैदराबाद के गणेश उत्सव- करोड़ों रुपया पानी में,” “नौबत पहाड़ – मंदिर या मस्जिद” आदि ज्वलंत मुद्दों पर लिखी गई पुस्तकों को आर्यसमाज, सुलतान बाजार, हैदराबाद ने प्रकाशित किया। ऐसे महान क्रांतिवीर लेखक और पत्रकार गंगाराम वानप्रस्थी की स्मृति में यह सम्मान समारोह है।
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पुरस्कार ग्रहीता विपमा वीर का संक्षिप्त परिचय
गंगाराम वानप्रस्थी जी की स्मृति में इस वर्ष का हिन्दी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर “हिन्दी समाचार पत्र सम्मान पुरस्कार” श्रीमती विपमा वीर (संपादक, डेली हिंदी मिलाप, हैदराबाद) को दिया जा रहा है। श्रीमती विपमा वीर का जन्म नई दिल्ली में हुआ। आप बचपन से ही शिल्प एवं कला में अभिरुचि के कारण फैशन डिजाइन में डिप्लोमा किया। आपने सामाजिक जीवन और गाइड संबंधी स्वयं सेवी संस्था से शैक्षिक काल में जुड़ी। 70 के दशक में सर्वश्रेष्ठ गाइड के रूप में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ नीलम संजीव रेड्डी से सम्मान ग्रहण किया। स्नातक की शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से पूरी की। 1989 में हैदराबाद के सुप्रसिद्ध पत्रकार युद्धवीर (सुपुत्र महात्मा आनन्द स्वामी जी) की पुत्रवधू बनी और पति विनयवीर जी के प्रोत्साहन से पत्रकारिता की ओर आकर्षित हुई। वर्तमान में आप “डेली हिंदी मिलाप” जो सन् 1950 से हैदराबाद में प्रकाशित और हिन्दी की सेवा में दक्षिण भारत में अपना नाम स्थापित किया है, उसका सर्वस्व हैं। आधुनिक विषयों का समर्थन कर हिन्दी पत्रकारिता के दक्षिणी इतिहास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
पुरस्कार ग्रहीता डॉ. कमला गणोरकर का संक्षिप्त परिचय
इसी तरह इस वर्ष “संध्या” पुस्तक की लेखिका डॉ. कमला गणोरकर को “हिन्दी लेखक सम्मान पुरस्कार” सम्मानित किया जाएगा। आप हैदराबाद में सन् 1934 में जन्मी और भारतीय प्राचीन संस्कृति गुरुकुल की परंपरा में देहरादून से शिक्षा प्राप्त कर विद्यालंकार की उपाधि लेकर हैदराबाद लौट आई। आपने नवजीवन बालिका विद्यालय में अध्यापन करते हुए एम. ए. की पढ़ाई पूरी की। 1961 में विवाह के बाद पति की प्रेरणा से पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। वनिता महाविद्यालय में हिन्दी विभाग की अध्यक्षा बनी। इसके बाद वाइस प्रिंसिपल हुई। आपकी साहित्यिक रचनाएं दुर्गाबाई देशमुख, भारत कोकिला सरोजिनी नायडू, आस्था, जापानी सांस्कृतिक लोक कथा, साहसी महिला – निडर बुढ़िया, आदि पुस्तकें प्रकाशित हुई है। “जीवन एक अवसर है – जीवन एक यात्रा है – पूरा करो”। यह पंक्तियां उनके द्वारा लिखी पुस्तक “यत्र तत्र सर्वत्र” से हैं। इस समय आपकी आयु 92 वर्ष की हैं और अब भी आप अपनी कलम चलाती रहती हैं।
