दुनिया के सबसे बड़े पागल और सनकी राष्ट्रपति को एक बार फिर आया NATO पर गुस्सा, बोले- “इसका अंजाम अच्छा नहीं होगा”

हैदराबाद/वॉशिंगटन: दुनिया के सबसे बड़े पागल और सनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर गुस्सा आया है। उन्होंने नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) के सदस्य देशों पर एक बार फिर गुस्सा निकाला है। ट्रंप का कहना है कि ईरान के खिलाफ लड़ाई में नाटो ने अमेरिका की कोई मदद नहीं की है। ट्रंप ने ईरान को भी अमेरिका का प्रस्ताव स्वीकारने या फिर हमलों के लिए तैयार रहने के लिए धमकाया है। ट्रंप की नाटो देशों से नाराजगी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका के ज्यादातर सहयोगी देशों ने इस संघर्ष से खुद को दूर रखने की कोशिश की है।

डोनाल्ड ने गुरुवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपनी पोस्ट में लिखा है कि नाटो देशों ने ईरान के खिलाफ युद्ध में बिल्कुल कुछ नहीं किया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को NATO से किसी चीज की जरूरत नहीं है लेकिन हम इस बहुत ही महत्वपूर्ण समय को याद जरूर रखेंगे। ट्रंप पहले भी नाटो की आलोचना करते रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अपने जाने-पहचाने अंदाज में कई बातें कही हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने एक ओर नाटो के सहयोगियों को अमेरिका की मदद ना करने के लिए कोसा है तो वहीं ईरान के रवैये पर भी निराशा जताई है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान को जल्दी से जल्दी चीजों को मानना चाहिए क्योंकि समझौते के लिए समय निकलता जा रहा है।

ट्रंप ने कहा है कि ईरानी वार्ताकार बहुत अलग और अजीब हैं। वे हमसे समझौता करने की भीख मांग रहे हैं, ये उन्हें करना भी चाहिए, क्योंकि वे सैन्य रूप से पूरी तरह तबाह हो चुके हैं और उनकी वापसी की कोई गुंजाइश नहीं है। इसके बावजूद वे सार्वजनिक रूप से कहते हैं कि अमेरिकी प्रस्ताव पर ‘विचार’ कर रहे हैं। यह तरीका ठीक नहीं है। ट्रंप ने ईरान को धमकाने की कोशिश करते हुए कहा है कि बेहतर होगा कि वे जल्द ही गंभीर हो जाएं, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। क्योंकि एक बार ऐसा हो गया, तो फिर वापसी का कोई रास्ता नहीं होगा और इसका अंजाम अच्छा नहीं होगा। ऐसे में ईरान के लिए अमेरिका का प्रस्ताव मानना अच्छा होगा।

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डोनाल्ड ट्रंप ने सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि अमेरिका और ईरान संघर्ष समाप्त करने के लिए बातचीत कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने कहा था कि ईरान समझौता करने के लिए बहुत बेताब है लेकिन आंतरिक परिणामों के डर से सार्वजनिक रूप से ऐसा कहने से डरते हैं। अमेरिका और इजरायल के 28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद शुरू हुए युद्ध के बाद से ट्रंप ने लगातार कई तरह के बयान दिए हैं। (एजेंसियां)

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